
BJP Organizational Reshuffle Update in UP:उत्तर प्रदेश भाजपा की नई प्रदेश कार्यकारिणी को लेकर कार्यकर्ताओं और नेताओं का इंतजार अभी खत्म नहीं हुआ है। संगठन की नई टीम का खाका लगभग तैयार माना जा रहा है, लेकिन अंतिम मंजूरी अभी बाकी है। पार्टी सूत्रों के अनुसार अधिकांश नामों पर सहमति बन चुकी है, मगर कुछ हाई-प्रोफाइल और वीवीआईपी मामलों पर फैसला शीर्ष नेतृत्व के स्तर पर होना है। यही वजह है कि प्रदेश भाजपा अध्यक्ष पंकज चौधरी और प्रदेश महामंत्री (संगठन) धर्मपाल सिंह अभी भी दिल्ली में डटे हुए हैं।
प्रदेश संगठन के पुनर्गठन को लेकर लखनऊ और दिल्ली में कई दौर की बैठकों का आयोजन हो चुका है। नई टीम की सूची लगभग तैयार बताई जा रही है, लेकिन कुछ संवेदनशील मामलों को देखते हुए पार्टी नेतृत्व बेहद सतर्कता बरत रहा है। इन मामलों का संबंध ऐसे नेताओं और परिवारों से है जिनका संगठन और राजनीति में विशेष प्रभाव माना जाता है।
काशी क्षेत्र प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संसदीय क्षेत्र है, इसलिए यहां से जुड़े संगठनात्मक फैसलों में शीर्ष नेतृत्व की भूमिका अहम मानी जाती है। प्रदेश टीम और क्षेत्रीय अध्यक्षों के चयन में भी यही स्थिति देखने को मिल रही है।
पार्टी सूत्रों का कहना है कि केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक अभी प्रस्तावित है। माना जा रहा है कि इस बैठक के बाद ही संगठन की नई टीम को अंतिम रूप दिया जाएगा और औपचारिक घोषणा की जाएगी।
भाजपा संगठन में चर्चा है कि एक केंद्रीय मंत्री के बेटे और एक पूर्व प्रदेश अध्यक्ष के पौत्र को लेकर शीर्ष नेतृत्व स्तर पर विचार-विमर्श चल रहा है। इन नामों को लेकर अंतिम सहमति बनना अभी बाकी है।
पार्टी सूत्रों के अनुसार पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अपने पौत्र को आगामी विधानसभा चुनाव में भी मौका दिलाना चाहते हैं। ऐसे में संगठनात्मक जिम्मेदारी और चुनावी रणनीति के बीच संतुलन साधने की कोशिश की जा रही है।
पार्टी के अंदरूनी सूत्रों का कहना है कि मौजूदा प्रदेश टीम के दर्जन भर से अधिक पदाधिकारी इस बार संगठन से बाहर हो सकते हैं। उनकी जगह नए और युवा चेहरों को मौका दिए जाने पर विचार किया जा रहा है।
भाजपा 2027 विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए संगठन को अधिक सक्रिय और प्रभावी बनाने की दिशा में काम कर रही है। इसी वजह से कई जिम्मेदारियों में बदलाव तय माना जा रहा है।
संगठन में सबसे ज्यादा चर्चा प्रदेश महामंत्री पद को लेकर हो रही है। बताया जा रहा है कि प्रदेश मंत्री अभिजात मिश्रा और अर्चना मिश्रा दोनों इस पद के प्रमुख दावेदारों में शामिल हैं।
दोनों नेताओं के पक्ष में दिल्ली स्तर पर मजबूत समर्थन बताया जा रहा है। ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि पार्टी नेतृत्व अंततः किसे प्रदेश महामंत्री की जिम्मेदारी सौंपता है।
क्षेत्रीय अध्यक्षों की सूची को लेकर भी चर्चाओं का दौर जारी है। कुछ मौजूदा अध्यक्ष अपनी जिम्मेदारी बरकरार रखने के लिए पूरी ताकत लगा रहे हैं।
वाराणसी में रामसकल पटेल को जिलाध्यक्ष बनाए जाने के बाद अब नजर काशी क्षेत्र के अध्यक्ष पद पर है। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि दिलीप पटेल अपनी कुर्सी बचाने में सफल होंगे या नहीं, इसका फैसला जल्द सामने आ सकता है।
हालांकि प्रदेश टीम का ऐलान अभी बाकी है, लेकिन भाजपा ने हाल ही में पांच जिलाध्यक्षों के नाम घोषित कर संगठनात्मक बदलाव की शुरुआत कर दी है। नई सूची में अंबेडकरनगर से दिलीप देव पटेल, वाराणसी से रामसकल पटेल, चंदौली से काशीनाथ सिंह, गोरखपुर महानगर से रमेश प्रसाद गुप्ता और देवरिया से काली प्रसाद को जिलाध्यक्ष नियुक्त किया गया है।