
भाजपा संगठन में फेरबदल को लेकर बड़ा अपडेट। फोटो सोर्स- पत्रिका न्यूज
BJP Organization Reshuffle Update: उत्तर प्रदेशभाजपा संगठन की नई प्रदेश कार्यकारिणी के गठन को लेकर चल रही कवायद एक बार फिर टल गई है। प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी और महामंत्री संगठन धर्मपाल सिंह लगातार तीन दिनों तक दिल्ली में डेरा डाले रहे, लेकिन अंतिम निर्णय नहीं हो सका। अब संगठन में नई नियुक्तियों का इंतजार कर रहे नेताओं और कार्यकर्ताओं को कुछ दिन और प्रतीक्षा करनी पड़ सकती है। पार्टी सूत्रों का कहना है कि संगठनात्मक फेरबदल महीने के आखिर तक किए जाने की संभावना है।
प्रदेश संगठन में बदलाव को लेकर दिल्ली में कई दौर की चर्चा हुई थी। माना जा रहा था कि रविवार को राष्ट्रीय अध्यक्ष के साथ होने वाली बैठक में नए पदाधिकारियों की सूची को अंतिम रूप दे दिया जाएगा। हालांकि, केंद्रीय मंत्री नितिन नवीन के बंगलूरू में होने के कारण यह बैठक नहीं हो सकी। इससे पहले शनिवार को भी बैठक प्रस्तावित थी, लेकिन उस दिन नितिन नवीन पटना में आयोजित प्रशिक्षण वर्ग में व्यस्त रहे, जिसके चलते चर्चा टालनी पड़ी थी।
बैठक नहीं होने के बाद प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी सीधे गोरखपुर रवाना हो गए, जबकि महामंत्री संगठन धर्मपाल सिंह लखनऊ लौट आए। माना जा रहा है कि अगले कुछ दिनों में फिर से बैठक बुलाई जाएगी और उसके बाद नई प्रदेश टीम की घोषणा की जाएगी।
भाजपा के वरिष्ठ नेताओं के अनुसार, नई प्रदेश कार्यकारिणी में लगभग 60 प्रतिशत पद ऐसे नेताओं और कार्यकर्ताओं को दिए जाएंगे जो लंबे समय से संगठन से जुड़े हैं और लगातार सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।
पार्टी नेतृत्व का मानना है कि आगामी चुनावों को देखते हुए अनुभवी और संगठनात्मक पकड़ रखने वाले चेहरों की जरूरत सबसे अधिक है। इसी वजह से इस बार चुनावी प्रबंधन क्षमता और संगठनात्मक अनुभव को प्राथमिकता दी जा रही है।
सूत्रों के मुताबिक, प्रदेश संगठन में होने वाला बदलाव हाल ही में हुए योगी मंत्रिमंडल विस्तार से अलग रणनीति पर आधारित होगा। मंत्रिमंडल विस्तार में जहां सामाजिक और जातीय संतुलन पर विशेष जोर दिया गया था, वहीं संगठनात्मक बदलाव में अनुभव और कार्यक्षमता को अहम माना जा रहा है।
हाल ही में हुए योगी मंत्रिमंडल विस्तार में भाजपा ने ओबीसी और दलित समुदाय को खास महत्व दिया था। छह नए मंत्रियों में तीन ओबीसी वर्ग से और दो दलित समुदाय से शामिल किए गए थे। इसके अलावा प्रमोशन पाने वाले मंत्रियों में भी ओबीसी नेताओं की संख्या अधिक रही।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि भाजपा ने यह सामाजिक समीकरण विपक्ष के PDA (पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक) नैरेटिव का मुकाबला करने के लिए तैयार किया है।
लोकसभा चुनाव 2024 में विपक्ष ने इसी सामाजिक समीकरण के जरिए भाजपा को चुनौती देने की कोशिश की थी। ऐसे में भाजपा संगठन और सरकार दोनों स्तरों पर सामाजिक संतुलन और मजबूत संगठनात्मक रणनीति के जरिए आगामी चुनावों की तैयारी में जुटी हुई है।
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Published on:
26 May 2026 11:07 am
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