
UP Cabinet Meeting:उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने प्रदेश के किसानों, अधिवक्ताओं, शहरी यात्रियों और आम नागरिकों को बड़ी राहत देते हुए कैबिनेट बैठक में 24 महत्वपूर्ण प्रस्तावों को मंजूरी प्रदान की है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में आयोजित इस बैठक में कृषि, परिवहन, न्यायिक व्यवस्था, कारागार प्रशासन और आधारभूत सुविधाओं से जुड़े कई अहम निर्णय लिए गए। सरकार का दावा है कि इन फैसलों से न केवल किसानों की आय बढ़ेगी बल्कि प्रदेश की परिवहन व्यवस्था और प्रशासनिक सेवाएं भी अधिक मजबूत और प्रभावी बनेंगी।
कैबिनेट बैठक में खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 के लिए मूल्य समर्थन योजना के तहत मक्का खरीद नीति को मंजूरी दी गई। सरकार ने मक्का का न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) 2400 रुपये प्रति क्विंटल तय किया है। इस फैसले का सीधा लाभ उन किसानों को मिलेगा जो बड़े पैमाने पर मक्का की खेती करते हैं और उचित मूल्य न मिलने की समस्या से जूझते रहे हैं।
सरकार के अनुसार मक्का खरीद अभियान 15 जून से शुरू होकर 31 जुलाई तक चलेगा। इस दौरान प्रदेश के 25 जिलों में सरकारी खरीद केंद्र स्थापित किए जाएंगे, जहां किसानों से सीधे मक्का की खरीद की जाएगी। इनमें फिरोजाबाद, आगरा, मैनपुरी, अलीगढ़, कासगंज, हाथरस, एटा, बदायूं, शाहजहांपुर, रामपुर, संभल, बुलंदशहर, हापुड़, कानपुर नगर, औरैया, इटावा, कन्नौज, फर्रुखाबाद, हरदोई, उन्नाव, बहराइच, बलिया, गोंडा, फतेहपुर और मिर्जापुर शामिल हैं। सरकार का मानना है कि इस व्यवस्था से किसानों को बिचौलियों से मुक्ति मिलेगी और उनकी उपज का उचित मूल्य सुनिश्चित होगा।
कैबिनेट ने "यूपी बंदी मृत्यु एवं मुआवजा भुगतान नीति" को भी मंजूरी प्रदान की है। इस नीति के तहत जेलों में निरुद्ध किसी बंदी की अप्राकृतिक मृत्यु होने की स्थिति में उसके आश्रितों को आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई जाएगी। सरकार का कहना है कि यह कदम मानवाधिकारों की रक्षा और प्रभावित परिवारों को समय पर राहत देने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित होगा। नई नीति लागू होने के बाद ऐसे मामलों में मुआवजा देने की प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और व्यवस्थित होगी। इससे मृतक बंदियों के परिवारों को कानूनी और आर्थिक सहायता प्राप्त करने में आसानी होगी।
प्रदेश की सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को आधुनिक और पर्यावरण अनुकूल बनाने के लिए कैबिनेट ने 18 शहरों में एसी इलेक्ट्रिक बसों के संचालन को मंजूरी दे दी है। यह बसें ग्रॉस कॉस्ट कॉन्ट्रैक्ट (GCC) मॉडल के तहत संचालित की जाएंगी। इन शहरों में आगरा, अलीगढ़, अयोध्या, बरेली, फिरोजाबाद, गाजियाबाद, गोरखपुर, झांसी, कानपुर, लखनऊ, मथुरा-वृंदावन, मेरठ, मुरादाबाद, प्रयागराज, शाहजहांपुर, सहारनपुर, वाराणसी और नोएडा-जेवर शामिल हैं। सरकार का मानना है कि इलेक्ट्रिक बसों के संचालन से यात्रियों को आरामदायक यात्रा सुविधा मिलेगी, वहीं डीजल वाहनों पर निर्भरता कम होने से प्रदूषण नियंत्रण में भी मदद मिलेगी।
कैबिनेट बैठक में सरकारी अधिवक्ताओं के हित में भी महत्वपूर्ण फैसला लिया गया। सरकार ने उनके मानदेय और विभिन्न मासिक भत्तों में वृद्धि के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। लंबे समय से मानदेय बढ़ाने की मांग कर रहे सरकारी वकीलों के लिए यह निर्णय राहत लेकर आया है। इस फैसले के बाद प्रदेश के विभिन्न न्यायालयों में कार्यरत सरकारी अधिवक्ताओं को आर्थिक रूप से अधिक मजबूती मिलेगी। सरकार का मानना है कि बेहतर पारिश्रमिक मिलने से न्यायिक कार्यों की गुणवत्ता और दक्षता में भी सुधार होगा।
लखनऊ के मोहनलालगंज क्षेत्र में बढ़ती आबादी और प्रशासनिक जरूरतों को देखते हुए नए रजिस्ट्री कार्यालय के निर्माण के लिए भूमि संबंधी प्रस्ताव को मंजूरी दी गई है। इस फैसले से क्षेत्र के लोगों को संपत्ति पंजीकरण और अन्य राजस्व संबंधी सेवाओं के लिए दूर-दराज के कार्यालयों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। सरकार का उद्देश्य स्थानीय स्तर पर बेहतर प्रशासनिक सुविधाएं उपलब्ध कराना और नागरिक सेवाओं को अधिक सुलभ बनाना है।
प्रदेश में जेलों पर बढ़ते दबाव को कम करने और कारागार व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने के लिए कैबिनेट ने पांच जिलों में नई जेलों के निर्माण को मंजूरी दे दी है। भदोही, मुरादाबाद, औरैया, ललितपुर और कानपुर नगर में आधुनिक सुविधाओं से युक्त नई जेलें बनाई जाएंगी। सरकार का कहना है कि नई जेलों के निर्माण से वर्तमान जेलों में बंदियों की अधिक संख्या की समस्या कम होगी। साथ ही सुरक्षा व्यवस्था, बंदियों के पुनर्वास और जेल प्रशासन के संचालन में भी सुधार आएगा।
कैबिनेट बैठक में लिए गए 24 प्रस्तावों को प्रदेश के विकास और जनकल्याण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। किसानों को MSP का लाभ, आधुनिक परिवहन व्यवस्था, अधिवक्ताओं को आर्थिक राहत, नई जेलों का निर्माण और नागरिक सुविधाओं के विस्तार जैसे फैसले सरकार की प्राथमिकताओं को दर्शाते हैं।