UP Cabinet Yogi Government: उत्तर प्रदेश सरकार की कैबिनेट बैठक में आज शिक्षकों के लिए कैशलेस चिकित्सा सुविधा सहित कई अहम प्रस्तावों पर मुहर लग सकती है। करीब दस लाख शिक्षकों, शिक्षामित्रों और अनुदेशकों को बड़ी राहत मिलेगी, जबकि शहरी विकास, आपदा राहत, भवन निर्माण और ऊर्जा क्षेत्र से जुड़े मुद्दे भी एजेंडे में शामिल हैं।
UP Cabinet Set to Approve Cashless Healthcare for 1 Million Teachers: उत्तर प्रदेश की योगी सरकार की गुरुवार को होने वाली कैबिनेट बैठक कई मायनों में अहम मानी जा रही है। इस बैठक में प्रदेश के शिक्षकों, शिक्षामित्रों, अनुदेशकों और रसोइयों को बड़ी राहत देते हुए कैशलेस चिकित्सा सुविधा के प्रस्ताव पर मुहर लगने की संभावना है। इसके साथ ही आवास, शहरी विकास, आपदा राहत, भवन निर्माण और ऊर्जा क्षेत्र से जुड़े कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों को भी स्वीकृति मिल सकती है। कुल मिलाकर करीब 29 प्रस्तावों को एजेंडे में शामिल किया गया है।
प्रदेश सरकार राज्य कर्मचारियों की तर्ज पर अब शिक्षकों को भी कैशलेस चिकित्सा सुविधा देने की तैयारी में है। इस योजना के तहत करीब 8 से 10 लाख शिक्षकों, शिक्षामित्रों, अनुदेशकों और मिड-डे मील रसोइयों को लाभ मिलेगा।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 5 सितंबर, शिक्षक दिवस पर इस योजना की घोषणा की थी। अब इसे औपचारिक रूप से लागू करने की प्रक्रिया अंतिम चरण में है। यह सुविधा आयुष्मान भारत योजना की तरह लागू की जाएगी, जहां लाभार्थी सूचीबद्ध अस्पतालों में बिना नगद भुगतान इलाज करा सकेंगे।
शिक्षा विभाग के अधिकारियों के अनुसार, शिक्षकों को हेल्थ कार्ड जारी किए जाएंगे और डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए इलाज की प्रक्रिया संचालित होगी।
कैबिनेट बैठक में लखीमपुर खीरी में नाव पलटने से प्रभावित परिवारों को आवास देने का प्रस्ताव भी शामिल है। सरकार आपदा प्रभावित ग्रामीणों को राहत पैकेज के तहत स्थायी आवास उपलब्ध कराने की तैयारी में है। इससे आपदा प्रबंधन नीति को मजबूत करने का संदेश भी जाएगा।
बैठक में ‘उत्तर प्रदेश नगर योजना एवं विकास (विकास शुल्क) नियमावली, 2026’ और ‘उत्तर प्रदेश शहरी पुनर्विकास नीति, 2026’ को मंजूरी मिलने की संभावना है।
इन नीतियों के तहत
सरकार ने स्टांप एवं पंजीकरण विभाग के भवन निर्माण कार्यों को तेज करने के लिए ₹9.92 करोड़ की दूसरी किस्त जारी की है।
उप निबंधक कार्यालय भवन:
रिकॉर्ड रूम निर्माण:
सरकार का कहना है कि नए भवनों से पारदर्शिता, कार्यकुशलता और नागरिक सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार होगा।
दूसरी ओर, बिजली उपभोक्ताओं के लिए एक चिंता की खबर भी है। पावर कॉर्पोरेशन ने फरवरी में 10% ईंधन अधिभार शुल्क वसूलने का आदेश जारी किया है। कॉर्पोरेशन का तर्क है कि नवंबर 2025 में बिजली खरीद की दर ₹5.79 प्रति यूनिट रही, जबकि स्वीकृत दर ₹4.94 प्रति यूनिट थी। इस अंतर की भरपाई के लिए अतिरिक्त शुल्क लगाया जा रहा है। हालांकि, उपभोक्ता परिषद ने इसका विरोध किया है और नियामक आयोग में याचिका दाखिल की है। परिषद का कहना है कि नवंबर में मांग सामान्य थी, फिर भी महंगी खरीद संदिग्ध है। उन्होंने इस खरीद की उच्चस्तरीय जांच और शुल्क पर रोक की मांग की है।