लखनऊ

Yogi कैबिनेट का बड़ा एक्शन, फर्जी डिग्रियों पर जेएस विश्वविद्यालय बंद, ग्रेटर नोएडा में IIMT ऑफ-कैंपस मंजूर

Yogi Adityanath सरकार ने उच्च शिक्षा व्यवस्था को मजबूत और पारदर्शी बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। कैबिनेट बैठक में फर्जी डिग्री प्रकरण के चलते जेएस विश्वविद्यालय, शिकोहाबाद के परिसमापन को मंजूरी दी गई, जबकि आईआईएमटी विश्वविद्यालय, मेरठ के ग्रेटर नोएडा ऑफ-कैंपस को स्वीकृति मिली।

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Jan 07, 2026
जेएस विश्वविद्यालय का परिसमापन, IIMT विश्वविद्यालय के ग्रेटर नोएडा ऑफ-कैंपस को मंजूरी (फोटो सोर्स : WhatsApp News Group)

Yogi Cabinet: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई राज्य कैबिनेट की बैठक में उच्च शिक्षा विभाग से जुड़े दो अत्यंत महत्वपूर्ण और दूरगामी प्रभाव वाले प्रस्तावों को स्वीकृति प्रदान की गई। एक ओर जहां जेएस विश्वविद्यालय, शिकोहाबाद (जनपद फिरोजाबाद) में सामने आई गंभीर अनियमितताओं और फर्जी डिग्री प्रकरण के चलते उसके परिसमापन का निर्णय लिया गया, वहीं दूसरी ओर पश्चिमी उत्तर प्रदेश और एनसीआर क्षेत्र में उच्च शिक्षा के विस्तार की दिशा में आईआईएमटी विश्वविद्यालय, मेरठ के ग्रेटर नोएडा में ऑफ-कैंपस संचालन को मंजूरी दी गई। इन दोनों फैसलों को योगी सरकार की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के प्रति प्रतिबद्धता के रूप में देखा जा रहा है।

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फर्जी डिग्रियों पर योगी सरकार का कठोर प्रहार

कैबिनेट बैठक के बाद उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय ने जानकारी दी कि जेएस विश्वविद्यालय, शिकोहाबाद के विरुद्ध लंबे समय से शिकायतें प्राप्त हो रही थीं। विस्तृत जांच में यह तथ्य सामने आया कि विश्वविद्यालय द्वारा नियमों और अधिनियमों की अनदेखी करते हुए बीपीएड पाठ्यक्रम से संबंधित फर्जी एवं बैक डेट में मार्कशीट और डिग्रियां जारी की गईं। इन फर्जी दस्तावेजों का उपयोग राजस्थान शारीरिक शिक्षा अध्यापक भर्ती परीक्षा-2022 में चयन के लिए किया गया, जिससे पूरे शिक्षा तंत्र की विश्वसनीयता पर प्रश्नचिन्ह खड़ा हो गया।

मंत्री ने बताया कि इस मामले में राजस्थान पुलिस द्वारा की गई जांच, कुलाधिपति और कुलसचिव की गिरफ्तारी, तथा शासन स्तर पर गठित जांच समितियों की रिपोर्ट में गंभीर अनियमितताओं की पुष्टि हुई। जांच में यह भी सामने आया कि विश्वविद्यालय ने डिग्री प्रदान करने की शक्ति का दुरुपयोग किया, संगठित तरीके से फर्जी अंकतालिकाओं और डिग्रियों का वितरण किया गया तथा विश्वविद्यालय के लिए निर्धारित न्यूनतम भूमि मानकों का भी पालन नहीं किया गया।

अधिनियम उल्लंघन के चलते परिसमापन का फैसला

जांच रिपोर्ट में यह भी स्पष्ट हुआ कि जेएस विश्वविद्यालय ने उत्तर प्रदेश राज्य उच्च शिक्षा परिषद को आवश्यक सूचनाएं और विवरण उपलब्ध नहीं कराए, जो कि निजी विश्वविद्यालय अधिनियम के तहत अनिवार्य है। इन सभी तथ्यों को संज्ञान में लेते हुए योगी कैबिनेट ने जेएस विश्वविद्यालय, शिकोहाबाद के परिसमापन को मंजूरी दे दी।

परिसमापन के बाद विश्वविद्यालय के समस्त शैक्षणिक अभिलेख, रिकॉर्ड और दस्तावेज डॉ. भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय, आगरा के संरक्षण में रखे जाएंगे। भविष्य में जेएस विश्वविद्यालय द्वारा जारी की गई डिग्रियों और मार्कशीटों का सत्यापन इन्हीं अभिलेखों के आधार पर किया जाएगा, ताकि वास्तविक छात्रों के हितों की रक्षा की जा सके। इसके साथ ही परिसमापन अवधि के दौरान विश्वविद्यालय की गतिविधियों के सीमित संचालन हेतु उत्तर प्रदेश निजी विश्वविद्यालय अधिनियम की धारा 55(6) के अंतर्गत एक त्रि-सदस्यीय अंतरिम समिति गठित करने का भी निर्णय लिया गया है।

शिक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता बहाल करने की दिशा में कदम

योगी सरकार के इस निर्णय को शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और अनुशासन बहाल करने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। सरकार का स्पष्ट संदेश है कि शिक्षा के नाम पर किसी भी प्रकार की धोखाधड़ी, फर्जीवाड़ा या छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की सख्त कार्रवाई से अन्य निजी विश्वविद्यालयों को भी नियमों के पालन के लिए सचेत रहना पड़ेगा।

आईआईएमटी विश्वविद्यालय के ग्रेटर नोएडा ऑफ-कैंपस को हरी झंडी

कैबिनेट बैठक का दूसरा महत्वपूर्ण निर्णय उच्च शिक्षा के विस्तार और अवसरों की उपलब्धता से जुड़ा रहा। योगी कैबिनेट ने आईआईएमटी विश्वविद्यालय, मेरठ के ग्रेटर नोएडा में ऑफ-कैंपस संचालन के लिए संचालन प्राधिकार पत्र (एलओपी) जारी करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। इस निर्णय से पश्चिमी उत्तर प्रदेश और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) के छात्रों को गुणवत्तापूर्ण उच्च शिक्षा के नए अवसर मिलेंगे।

उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय ने बताया कि उत्तर प्रदेश निजी विश्वविद्यालय अधिनियम, 2019 और उसके द्वितीय संशोधन अधिनियम, 2021 के अंतर्गत विश्वविद्यालयों को दूरस्थ परिसर (ऑफ-कैंपस) स्थापित करने का प्रावधान किया गया है। इसी क्रम में आईआईएमटी विश्वविद्यालय के प्रायोजक संस्था ‘एसोसिएशन ऑफ मैनेजमेंट स्टडीज, मेरठ’ द्वारा ग्रेटर नोएडा औद्योगिक विकास प्राधिकरण क्षेत्र में 4.796 एकड़ भूमि चिन्हित की गई थी।

नियमानुसार प्रक्रिया पूरी होने के बाद मिली मंजूरी

इस भूमि के लिए 25 फरवरी 2025 को आशय पत्र (एलओआई) जारी किया गया था। सभी आवश्यक मानकों, अधोसंरचना और नियामक शर्तों के परीक्षण के बाद अब कैबिनेट द्वारा ऑफ-कैंपस संचालन हेतु एलओपी जारी करने की स्वीकृति दे दी गई है। इस ऑफ-कैंपस के शुरू होने से इंजीनियरिंग, प्रबंधन, तकनीकी और अन्य व्यावसायिक पाठ्यक्रमों में अध्ययन के अवसर बढ़ेंगे।

पश्चिमी यूपी और एनसीआर को मिलेगा शैक्षिक लाभ

ग्रेटर नोएडा में  IIMT विश्वविद्यालय का ऑफ-कैंपस स्थापित होने से पश्चिमी उत्तर प्रदेश और एनसीआर क्षेत्र के विद्यार्थियों को दिल्ली या अन्य राज्यों की ओर पलायन नहीं करना पड़ेगा। स्थानीय स्तर पर ही उन्हें आधुनिक सुविधाओं, उद्योग-संपर्क और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का लाभ मिलेगा। इससे न केवल शिक्षा का स्तर ऊंचा होगा, बल्कि क्षेत्रीय विकास और रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे।

योगी सरकार की दोहरी रणनीति

इन दोनों फैसलों को एक साथ देखने पर योगी सरकार की शिक्षा नीति की स्पष्ट झलक मिलती है। एक ओर जहां नियमों का उल्लंघन करने वाले संस्थानों पर कठोर कार्रवाई की जा रही है, वहीं दूसरी ओर नियमों का पालन करने वाले और गुणवत्ता शिक्षा प्रदान करने वाले संस्थानों को विस्तार का अवसर दिया जा रहा है। यह नीति न केवल शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने में सहायक होगी, बल्कि उत्तर प्रदेश को उच्च शिक्षा का प्रमुख केंद्र बनाने की दिशा में भी अहम साबित होगी। योगी सरकार का यह कदम स्पष्ट करता है कि राज्य में शिक्षा केवल डिग्री बांटने का माध्यम नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण की एक मजबूत आधारशिला है।

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