UP में पेट्रोल-डीजल और एलपीजी की कालाबाजारी पर सरकार का बड़ा एक्शन, 23 हजार से ज्यादा छापे, 238 एफआईआर दर्ज, 22 गिरफ्तार, पर्याप्त ईंधन भंडार होने का दावा।
UP Cracks Down on Fuel Black Marketing: उत्तर प्रदेश में पेट्रोल, डीजल और एलपीजी की कालाबाजारी पर रोक लगाने के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में सरकार ने सख्त कदम उठाए हैं। प्रदेशभर में बड़े पैमाने पर चलाए गए अभियान के तहत 12 मार्च 2026 से अब तक 23,250 से अधिक छापेमारी और निरीक्षण किए गए हैं। इस दौरान 238 एफआईआर दर्ज की गईं और 22 लोगों को मौके से गिरफ्तार किया गया है, जबकि 249 आरोपियों के खिलाफ अभियोजन की कार्रवाई शुरू की गई है।
सरकार की ओर से जारी आंकड़ों के अनुसार, दर्ज की गई 238 एफआईआर में से 27 मामले एलपीजी वितरकों के खिलाफ हैं, जबकि 211 अन्य मामलों में अलग-अलग आरोपियों को नामजद किया गया है। यह कार्रवाई इस बात का संकेत है कि सरकार ईंधन की कालाबाजारी और जमाखोरी के खिलाफ किसी भी तरह की ढिलाई बरतने के मूड में नहीं है।
प्रदेश सरकार ने स्पष्ट किया है कि पेट्रोल और डीजल की आपूर्ति पूरी तरह सामान्य है। सरकार ने लोगों से अपील की है कि वे घबराकर ईंधन की अनावश्यक खरीदारी या भंडारण न करें, क्योंकि इससे बाजार में कृत्रिम कमी पैदा हो सकती है।
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, वर्तमान में उत्तर प्रदेश में 92,000 किलोलीटर पेट्रोल और 1.22 लाख किलोलीटर डीजल का पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है। प्रदेश में कुल 12,888 पेट्रोल पंप संचालित हैं, जिनके माध्यम से रोजाना हजारों किलोलीटर ईंधन की आपूर्ति की जा रही है। इससे साफ है कि राज्य में किसी प्रकार की ईंधन संकट की स्थिति नहीं है।
एलपीजी सिलेंडरों की उपलब्धता को लेकर भी सरकार पूरी तरह सतर्क है। प्रदेश में 4,107 गैस एजेंसियों के जरिए उपभोक्ताओं को समय पर सिलेंडर की आपूर्ति सुनिश्चित की जा रही है।सरकार का दावा है कि एलपीजी का पर्याप्त स्टॉक मौजूद है और किसी भी उपभोक्ता को परेशानी नहीं होने दी जाएगी।
केंद्र सरकार के निर्देशों के तहत सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क का विस्तार तेजी से किया जा रहा है। घरेलू उपभोक्ताओं को पाइप्ड नेचुरल गैस (PNG) कनेक्शन उपलब्ध कराने की प्रक्रिया भी तेज कर दी गई है। अब तक प्रदेश में 15.94 लाख पीएनजी कनेक्शन जारी किए जा चुके हैं, जिससे लोगों को एलपीजी पर निर्भरता कम करने में मदद मिल रही है।
औद्योगिक और व्यावसायिक गतिविधियों को प्रभावित न होने देने के लिए सरकार ने वाणिज्यिक एलपीजी की 70 प्रतिशत तक सशर्त आपूर्ति की अनुमति दी है। इसमें होटल, ढाबा, रेस्टोरेंट, डेयरी, फूड प्रोसेसिंग यूनिट्स के साथ-साथ स्टील, ऑटोमोबाइल और टेक्सटाइल जैसे उद्योगों को प्राथमिकता दी जा रही है।
स्थिति पर लगातार नजर बनाए रखने के लिए खाद्य आयुक्त कार्यालय सहित सभी जिलों में 24 घंटे संचालित कंट्रोल रूम स्थापित किए गए हैं। इसके अलावा, अधिकारियों को फील्ड में लगातार निरीक्षण करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि किसी भी प्रकार की कालाबाजारी या अवैध गतिविधि पर तुरंत कार्रवाई की जा सके।
सरकार की इस सख्ती का असर साफ तौर पर दिखाई दे रहा है। लगातार हो रही छापेमारी और कानूनी कार्रवाई से कालाबाजारी करने वालों में भय का माहौल बना हुआ है।