
UP Crime Syndicate Shankar Pandey Robin Singh:उत्तर प्रदेश में अतीक अहमद और मुख्तार अंसारी जैसे पारंपरिक माफिया नेटवर्क के पतन के बाद संगठित अपराध समाप्त नहीं हुआ। इसके बजाय युवा गैंग लीडर्स की नई पीढ़ी उभर रही है। इनमें शंकर पांडे और रॉबिन सिंह का नाम प्रमुखता से सामने आ रहा है। ये नए सिंडिकेट तकनीक, सोशल मीडिया और नए उम्र के शूटरों का नेटवर्क बनाकर रंगदारी, जमीनों पर कब्जे और सुपारी किलिंग जैसे अपराधों को अंजाम दे रहे हैं। पुराने माफिया गिरोहों की जगह ले रहे ये गैंग पुलिस और एसटीएफ (STF) के लिए नई सिरदर्दी बन चुके हैं। हालांकि, यूपी पुलिस इन उभरते अपराधियों को चिन्हित कर उनके आर्थिक साम्राज्य और नेटवर्क को पूरी तरह ध्वस्त करने के लिए सख्त कार्रवाई कर रही है।
6 मई 2026 को पश्चिम बंगाल चुनाव परिणामों के दिन कोलकाता में मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी के निजी सहायक चंद्रनाथ राठ की गोली मारकर हत्या कर दी गई। सीबीआई जांच में साजिश का सूत्र उत्तर प्रदेश तक पहुंचा। एजेंसी ने मुजफ्फरनगर से राजकुमार सिंह, बलिया से नवीन सिंह, लखनऊ से विकास मिश्रा तथा बक्सर सीमा क्षेत्र से मयंक और विक्की को गिरफ्तार किया। सभी आरोपी 20 से 28 वर्ष के बीच के हैं और कथित तौर पर पेशेवर कॉन्ट्रैक्ट किलिंग गैंग के रूप में काम कर रहे थे।
29 मई को गाजीपुर में लग्जरी होटल मालिक विनोद राय के बेटे विनीत राय की सरेआम गोली मारकर हत्या कर दी गई। पुलिस के अनुसार विनीत से 1 करोड़ रुपये की रंगदारी मांगी जा रही थी। कथित मास्टरमाइंड शंकर पांडे हैं, जो कुख्यात ‘कटरा गैंग’ के सरगना हैं। शंकर खुद को सोशल मीडिया पर ‘किंग ऑफ गाजीपुर’ बताते थे और स्कॉर्पियो-फॉर्च्यूनर काफिलों की इंस्टाग्राम रील्स पोस्ट करते थे। उनके सहयोगी कमलेश बिंद को बाद में पुलिस एनकाउंटर में मार गिराया गया।
जांचकर्ताओं के अनुसार यूपी के स्थानीय गैंग्स पर लॉरेंस बिश्नोई नेटवर्क का प्रभाव बढ़ रहा है। फरवरी 2025 में नोएडा में एसटीएफ ने बिश्नोई गैंग के शूटर जितेंद्र सिंह उर्फ जीतू को मार गिराया। बाबा सिद्दीकी हत्याकांड के दो शूटर शिवकुमार गौतम और धर्मराज कश्यप बहराइच जिले के थे। अमरोहा, आगरा और यूट्यूबर अनुराग द्विवेदी को भी बिश्नोई नाम पर रंगदारी की धमकियां मिलीं।
पुलिस का कहना है कि व्हाट्सएप और इंस्टाग्राम युवा अपराधियों के लिए प्रसिद्धि और आसान पैसा कमाने का प्लेटफॉर्म बन गए हैं। कुछ मामलों में मात्र 500 से 1,000 रुपये में मारपीट की पेशकश की जाती थी।
बलिया के बेल्थरा रोड क्षेत्र में पिनकोड ‘221715 गैंग’ सक्रिय हुई। आंतरिक प्रतिद्वंद्विता में आयुष यादव की हत्या हो गई। इस गैंग से जुड़े रॉबिन सिंह पर आयुष यादव और समीर उर्फ मंटू हत्याकांड में मुख्य आरोप लगा। 50 हजार रुपये के इनामी रॉबिन ने बाद में मऊ कोतवाली में सरेंडर कर दिया था।
गोरखपुर-महाराजगंज सीमा पर ‘एके-47 गैंग’ और ‘रेड गैंग’ सक्रिय रहे। अक्टूबर 2025 में दोनों के बीच फायरिंग के बाद 28 युवकों को गिरफ्तार किया गया। कन्नौज में बिच्छू गैंग तथा औरैया में मदा और बॉस गैंग भी पुलिस रडार पर हैं।
पूर्वांचल में 2025-26 में 100 से अधिक नई गैंग्स दर्ज हुईं। आजमगढ़ में डी-130, डी-94 और डी-29 सक्रिय बताई जाती हैं। पश्चिमी यूपी (मेरठ जोन) में 500 से अधिक पंजीकृत गैंग्स हैं।
पूर्व डीजीपी बृजलाल का कहना है कि पुरानी गैंग्स कहीं अधिक खतरनाक थीं। आज की गैंग्स सोशल मीडिया से प्रसिद्धि चाहती हैं। योगी सरकार में दोहरा अपराध करने वालों पर निर्णायक कार्रवाई हो रही है।
पारंपरिक सिंडिकेट्स के पतन के बावजूद सोशल मीडिया प्रभाव, युवा भर्ती, कॉन्ट्रैक्ट किलिंग और अंतरराज्यीय रंगदारी पर आधारित नया इकोसिस्टम उभर रहा है। कानून व्यवस्था के लिए चुनौती अब स्थापित गैंग्स को तोड़ने के साथ-साथ डिजिटली जुड़े युवा अपराधी समूहों के तेजी से फैलने को रोकना भी है।