UP Election 2027: मालिनी अवस्थी क्या अब राजनीति में कदम रखने जा रही हैं? 2027 यूपी चुनाव से पहले उन्होंने पहली बार राज खोला। बताया कि ऑफर तो कल्याण सिंह, मुलायम सिंह से लेकर मायावती तक ने दिए थे। बड़े-बड़े ऑफर मिलने के बावजूद आखिर क्यों हर बार किया इनकार? जानें मालिनी अवस्थी का जवाब।
मालिनी अक्सर पीएम मोदी और भाजपा की तारीफ करती नजर आ जाती हैं। बंगाल चुनाव में ममता बनर्जी की हार को उन्होंने अहंकार की हार बताया था। ऐसे में यह सवाल पूछा जा रहा है कि क्या 2027 में होने वाले उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से वह राजनीति में प्रवेश करेंगी? मालिनी अवस्थी ने खुद इस सवाल का जवाब दिया है। साथ ही उन्होंने यह भी बताया है कि कब किसने, किस सीट से उन्हें चुनाव लड़ने का ऑफर दिया था।
एक यूट्यूब चैनल ने बात करते हुए मालिनी अवस्थी से पूछा कि क्या आप 2027 में चुनाव लड़ेंगी और यदि हां तो कन्नौज या गोरखपुर किस सीट से किस्मत आजमाना पसंद करेंगी? सवाल सुनकर मालिनी मुस्कुराईं और फिर विस्तार से जवाब दिया। उन्होंने कहा, आज से नहीं, पिछले 30 सालों से मैं अपने राजनीति में जाने की चर्चा सुनती आ रही हूं। आज जब यह बात एक बार फिर से निकली है, तो मैं खुलकर बता सकती हूं कि किसने, कब और किस सीट से मुझे चुनाव लड़ने का ऑफर दिया। मालिनी अवस्थी के अनुसार, सबसे पहले भाजपा लीडर और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे कल्याण सिंह ने उन्हें चुनाव लड़ने को कहा था। लेकिन उन्होंने विनम्रता से इनकार कर दिया।
कल्याण सिंह के बाद दिवंगत समाजवादी पार्टी (सपा) प्रमुख मुलायम सिंह यादव ने उन्हें बदायूं सीट से चुनाव लड़ने का ऑफर दिया। इसी तरह बसपा प्रमुख मायावती भी चाहती थीं कि मालिनी अवस्थी चुनाव में किस्मत आजमाएं। उन्होंने मालिनी को अंबेडकर नगर से खड़े होने को कहा था। हालांकि, उन्होंने किसी भी प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किया। मालिनी कहती हैं - राजनीति ही यदि करनी होती, तो बहुत पहले कर ली होती। यानी एक तरह से उन्होंने उन सभी चर्चाओं पर विराम लगाने की कोशिश की है कि यूपी चुनाव में वे भाजपा की टिकट पर चुनाव लड़ सकती हैं।
मालिनी अवस्थी ने कहा कि चुनाव लड़ने के प्रस्ताव मुझे समय-समय पर मिलते रहे हैं, लेकिन मैंने कभी उन्हें गंभीरता से नहीं लिया। क्योंकि मेरा रास्ता अलग है। लोक कला ने मुझे सबकुछ दिया है। वैसे भी मेरा उद्देश्य कभी धन कमाना नहीं रहा। मैं फिल्मों में गाने के लिए मुंबई नहीं गई। मेरा लक्ष्य था लोक कलाकारों को एक मंच उपलब्ध कराना, उन्हें वाजिब मान-सम्मान दिलाना। और मुझे लगता है कि मैं इसमें सफल रही हूं। लोग अक्सर कहते हैं कि पॉलिटिक्स में ग्लैमर है, सम्मान है, मैं उनसे कहती हूं कि जो ग्लैमर और सम्मान मैंने कला जगत में देखा है, वो राजनीति में कभी नहीं मिल सकता। संगीत ने मुझे सबकुछ दिया है। पर वीडियो के आखिरी में उन्होंने हंसते हुए यह भी कहा कि जो सीटें आपने बताई हैं, वो मेरे ध्यान में रहेंगी।