
Gen Alpha Protest in Uttar Pradesh: उत्तर प्रदेश में बीते कुछ दिनों से छोटे छोटे स्कूली बच्चों यानी जेन अल्फा द्वारा स्कूलों की लचर व्यवस्थाओं को लेकर किए जा रहे प्रदर्शनों ने योगी सरकार को सतर्क कर दिया है। इसे देखते हुए मुख्य सचिव एसपी गोयल के निर्देश पर अपर मुख्य सचिव पार्थ सारथी शर्मा ने प्रदेश के सभी मंडलायुक्तों और जिलाधिकारियों के लिए कड़े निर्देश जारी किए हैं। प्रशासन ने अधिकारियों को हर शिकायत की गंभीरता से जांच करने और बच्चों से सीधे संवाद करने को कहा है।
आपको बता दें कि जेन अल्फा के तहत आमतौर पर वो बच्चे आते हैं जिनका जन्म साल 2010 से 2024 के बीच हुआ है यानी जिनकी उम्र वर्तमान में लगभग 2 साल से 16 साल के बीच है। जेन जी के बाद आने वाली यह पीढ़ी पूरी तरह से डिजिटल युग में पैदा हुई है जो बचपन से ही स्मार्टफोन, इंटरनेट और तकनीक के साथ बड़ी हो रही है। इस जनरेशन के बच्चे तकनीकी रूप से बहुत अधिक स्मार्ट और अपने आस-पास की व्यवस्थाओं के प्रति काफी जागरूक माने जाते हैं। अब जेन-अल्फा देश-भर के विभिन्न स्कूलों में मूलभूत सुविधाओं के लिए प्रदर्शन कर रहे हैं।
बता दें कि दिल्ली के जंतर-मंतर पर NEET परीक्षा में हुई धांधली को लेकर जेन जी (Gen Z)छात्रों ने बड़ा प्रदर्शन किया था जिसके बाद शिक्षा मंत्री को अपने पद से इस्तीफा देना पड़ा था। इसी प्रदर्शन से प्रेरित होकर अब Gen Alpha बच्चे भी स्कूलों में अपनी मूलभूत सुविधाओं के लिए आवाज उठा रहे हैं। उत्तर प्रदेश से लेकर राजस्थान तक के स्कूलों में यह छोटे बच्चे प्रशासन के सामने अपनी मांगों को लेकर धरने पर बैठ रहे हैं। बच्चे साफ पानी, स्कूल में पंखें और लाइट्स, स्कूल तक पहुंचने के लिए पक्की सड़क जैसे मुद्दों को लेकर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। हाल ही में राजधानी लखनऊ में भी स्कूली छात्राओं ने शिक्षकों की कमी को लेकर विरोध प्रदर्शन किया था।
योगी सरकार की ओर से सभी उच्च अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि अगर स्कूलों की व्यवस्था को लेकर किसी भी तरह की शिकायत आती है तो उसकी तुरंत और गहराई से जांच की जाए। अगर जांच में कोई सूचना गलत या भ्रामक पाई जाती है तो प्रशासन उसका तत्काल प्रभाव से खंडन करे। इसके साथ ही स्कूली छात्रों और उनके अभिभावकों के साथ नियमित तौर पर संवाद स्थापित किया जाए ताकि अधिकारी उनकी समस्याओं को सीधे तौर पर समझकर उनका निवारण कर सकें।
जेन अल्फा की जरूरतों और परेशानियों को समझने के लिए अधिकारियों को अपने-अपने क्षेत्र के स्कूलों का दौरा करने का निर्देश दिया गया है। इससे स्कूलों में बच्चों के लिए उपलब्ध सुविधाओं और व्यवस्थाओं की वास्तविक जमीनी स्थिति का पता चल सकेगा। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे स्कूल के दौरे पर बच्चों के साथ उनकी पढ़ाई को लेकर भी बात करें ताकि स्कूल में शिक्षा के स्तर का सही आकलन किया जा सके और बच्चों की परेशानी दूर की जा सके। साथ ही प्रशासन ने अधिकारियों को कड़े निर्देश दिए हैं कि वे बच्चों की पढ़ाई से लेकर स्कूल में उनके खानपान की व्यवस्था और अन्य सभी जरूरी शिक्षण व्यवस्थाओं को समझने का प्रयास करें।