
UP Jails Yogi Government: उत्तर प्रदेश में जेल व्यवस्था को आधुनिक, सुरक्षित और बेहतर सुविधाओं से लैस करने के लिए पिछले साढ़े नौ वर्षों में बड़े स्तर पर काम किए जाने का दावा किया गया है। सरकार के अनुसार, इस अवधि में जेलों के इंफ्रास्ट्रक्चर, आधुनिकीकरण, बंदी क्षमता बढ़ाने और तकनीकी सुविधाओं को मजबूत करने पर 17 हजार करोड़ रुपये से अधिक खर्च किए गए हैं। जेल विभाग के बजट में भी इस दौरान उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई है। वित्तीय वर्ष 2017-18 में जहां जेल विभाग के लिए 913.07 करोड़ रुपये का बजट आवंटित था, वहीं 2026-27 में यह बढ़कर 2,877.58 करोड़ रुपये हो गया। विभाग के मुताबिक यह करीब 215 प्रतिशत की वृद्धि है।
डीजी, कारागार एवं सुधार सेवाएं पीसी मीना के अनुसार, प्रदेश में कानून-व्यवस्था को मजबूत करने के साथ जेलों की व्यवस्थाओं को भी समय की जरूरत के अनुरूप विकसित करने पर जोर दिया जा रहा है। जेलों में क्षमता विस्तार के साथ आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर, सुरक्षा व्यवस्था और तकनीकी संसाधनों को बढ़ाया जा रहा है। जेल विभाग के बजट में हुई बढ़ोतरी को इसी दिशा में उठाए गए कदमों से जोड़कर देखा जा रहा है। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक 2017-18 में 913.07 करोड़ रुपये का बजट था, जो 2026-27 में 2,877.58 करोड़ रुपये तक पहुंच गया। वहीं 2017-18 से 2021-22 के बीच जेल विभाग के लिए कुल 5,494.41 करोड़ रुपये आवंटित किए गए थे। 2022-23 से 2026-27 के बीच यह राशि बढ़कर 11,913.53 करोड़ रुपये हो गई।
जेल विभाग के लिए बजट में बढ़ोतरी केवल एक वित्तीय वर्ष तक सीमित नहीं रही। आंकड़े बताते हैं कि पिछले कुछ वर्षों में जेल प्रशासन के लिए उपलब्ध संसाधनों में लगातार वृद्धि हुई है। इसका उद्देश्य नई जेलों के निर्माण के साथ मौजूदा कारागारों की क्षमता और सुविधाओं को मजबूत करना बताया गया है। प्रदेश के समग्र 2026-27 बजट में भी पूंजीगत व्यय और बुनियादी ढांचे पर बड़ा जोर दिया गया है। यूपी सरकार के बजट दस्तावेज के अनुसार, 2026-27 में राज्य का कुल बजट आकार 9.12 लाख करोड़ रुपये से अधिक है, जबकि पूंजीगत व्यय के लिए 2.48 लाख करोड़ रुपये से अधिक का प्रावधान किया गया है।
जेल विभाग के अनुसार प्रदेश में बंदियों की बढ़ती क्षमता जरूरतों को देखते हुए कई जिलों में नई जिला जेलों के निर्माण की प्रक्रिया चल रही है। अमेठी, महोबा, हाथरस, कुशीनगर, जौनपुर और हापुड़ में नई जिला जेलों के निर्माण पर काम किया जा रहा है। अमेठी में जिला कारागार के निर्माण के लिए 176.12 करोड़ रुपये, महोबा में 203.42 करोड़ रुपये, हाथरस में 184.94 करोड़ रुपये, कुशीनगर में 228.31 करोड़ रुपये, जौनपुर में 179.79 करोड़ रुपये और हापुड़ में 190.08 करोड़ रुपये की लागत निर्धारित की गई है। इन परियोजनाओं का उद्देश्य संबंधित जिलों में कारागार की आधारभूत सुविधाओं और बंदी क्षमता को मजबूत करना है।
नई जेलों के निर्माण के साथ-साथ प्रस्तावित कारागारों के लिए भूमि उपलब्ध कराने की प्रक्रिया भी आगे बढ़ाई जा रही है। विभाग के अनुसार संभल में प्रस्तावित जेल के लिए भूमि खरीद के लिए 24.56 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं। शामली में 96.20 करोड़ रुपये, बलिया में 24.12 करोड़ रुपये और सहारनपुर में 50.87 करोड़ रुपये भूमि के लिए मंजूर किए गए हैं। इसी तरह अमरोहा में प्रस्तावित कारागार के लिए 32.28 करोड़ रुपये और चंदौली में 34.27 करोड़ रुपये भूमि खरीद के लिए स्वीकृत किए गए हैं। इससे संकेत मिलता है कि जेलों के निर्माण को केवल भवन निर्माण तक सीमित न रखकर इसके लिए आवश्यक जमीन और आधारभूत संरचना तैयार करने पर भी काम किया जा रहा है।
नई जेलों के निर्माण के साथ मौजूदा जेलों की क्षमता बढ़ाना भी विभाग की प्राथमिकताओं में शामिल है। बंदियों की संख्या के अनुरूप पर्याप्त स्थान, बेहतर प्रशासनिक व्यवस्था और सुरक्षा इंतजाम उपलब्ध कराना कारागार प्रशासन के सामने लगातार बड़ी चुनौती रहती है। ऐसे में नई जिला जेलों का निर्माण इस दबाव को कम करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। आधुनिकीकरण के तहत जेल प्रशासन में तकनीक के इस्तेमाल को भी बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है। सरकार की ओर से जेलों को अधिक सुरक्षित और प्रशासनिक रूप से प्रभावी बनाने के लिए आधुनिक संसाधनों को शामिल करने की बात कही गई है। इससे निगरानी, सुरक्षा और जेल संचालन की व्यवस्थाओं को मजबूत करने में मदद मिलने की उम्मीद है।
पिछले साढ़े नौ वर्षों में जेल व्यवस्था के लिए खर्च की गई 17 हजार करोड़ रुपये से अधिक की राशि में सबसे बड़ा फोकस इंफ्रास्ट्रक्चर पर बताया गया है। नई जेलों का निर्माण, भूमि की खरीद, बंदी क्षमता का विस्तार और मौजूदा व्यवस्थाओं का विकास इसी व्यापक योजना का हिस्सा हैं। सरकार का जोर ऐसे कारागार ढांचे पर है जिसमें सुरक्षा के साथ प्रशासनिक जरूरतों और बंदियों के लिए जरूरी सुविधाओं को भी बेहतर तरीके से उपलब्ध कराया जा सके। इस पूरी प्रक्रिया में तकनीकी संसाधनों का इस्तेमाल बढ़ाने की दिशा में भी कदम उठाए जा रहे हैं।
जेल विभाग के बजट में 2017-18 के 913.07 करोड़ रुपये से 2026-27 में 2,877.58 करोड़ रुपये तक पहुंचना इस बदलाव का महत्वपूर्ण वित्तीय संकेतक है। विभाग के मुताबिक करीब 215 प्रतिशत की यह वृद्धि जेलों के विकास और आधुनिकीकरण को दी जा रही प्राथमिकता को दर्शाती है। वहीं राज्य के 2026-27 बजट में कुल पूंजीगत व्यय 2.48 लाख करोड़ रुपये से अधिक निर्धारित किया गया है और पूंजीगत परिव्यय 1.77 लाख करोड़ रुपये से अधिक है। जेल विभाग में बढ़े आवंटन को इसी व्यापक इंफ्रास्ट्रक्चर-केंद्रित बजट नीति के एक हिस्से के रूप में देखा जा सकता है।
नई जिला जेलों के निर्माण और प्रस्तावित कारागारों के लिए भूमि खरीद की प्रक्रिया के आगे बढ़ने के साथ आने वाले वर्षों में प्रदेश की जेल क्षमता में और विस्तार की संभावना है। सरकार के सामने चुनौती यह भी होगी कि नई सुविधाओं के निर्माण के साथ उनका प्रभावी संचालन, रखरखाव और सुरक्षा व्यवस्था लगातार मजबूत बनी रहे। कुल मिलाकर पिछले साढ़े नौ वर्षों के दौरान जेल विभाग के बजट में हुई वृद्धि और नई परियोजनाओं को प्रदेश की कारागार व्यवस्था में बड़े ढांचागत बदलाव के रूप में पेश किया जा रहा है। नई जेलों के निर्माण से लेकर भूमि खरीद और तकनीकी आधुनिकीकरण तक, सरकार का फोकस ऐसी जेल व्यवस्था तैयार करने पर है जो सुरक्षा और प्रशासन के लिहाज से अधिक आधुनिक हो।