
नवरात्रि के दौरान दर्शन के लिए मंदिर परिसर में जुटे श्रद्धालु। (फोटो सोर्स :file photo, Ritesh Singh )
Navratri Celebration: शारदीय नवरात्रि शुरू होते ही राजधानी लखनऊ का माहौल पूरी तरह भक्तिमय होने जा रहा है। मां दुर्गा के स्वागत के लिए शहर के प्रमुख मंदिरों में तैयारियां तेज हो गई हैं। कहीं मंदिर परिसर की साफ-सफाई और रंग-रोगन का काम चल रहा है तो कहीं फूलों, झालरों और रंगीन रोशनी से मंदिरों को सजाने की तैयारी की जा रही है। मंदिर समितियां श्रद्धालुओं की बढ़ती भीड़ को देखते हुए दर्शन, पूजा, प्रसाद और सुरक्षा व्यवस्था को अंतिम रूप देने में जुटी हैं। नवरात्रि के नौ दिनों तक राजधानी के मंदिर सुबह से देर शाम तक मां के जयकारों और भक्ति गीतों से गूंजते नजर आएंगे।
नवरात्रि को लेकर लखनऊ के अलग-अलग इलाकों में स्थित दुर्गा मंदिरों में विशेष तैयारियां की जा रही हैं। शास्त्रीनगर, राजाजीपुरम, गोमती नगर, निलमथा, जानकीपुरम, चारबाग और पुराने लखनऊ सहित कई क्षेत्रों में मंदिरों को सजाने का काम शुरू हो चुका है। मंदिर समितियों की ओर से परिसर की सफाई के साथ प्रवेश और निकास की व्यवस्था को व्यवस्थित किया जा रहा है। कई मंदिरों में मां दुर्गा की प्रतिमा के विशेष श्रृंगार की तैयारी है। कहीं फूलों से आकर्षक दरबार सजाया जाएगा तो कहीं रंगीन रोशनी और विद्युत झालरों से मंदिर की भव्यता बढ़ाई जाएगी। नवरात्रि के दौरान श्रद्धालुओं को विशेष आध्यात्मिक वातावरण उपलब्ध कराने के लिए मंदिर समितियां पूजा-पाठ और धार्मिक कार्यक्रमों की तैयारियों में भी जुटी हैं।
नवरात्रि के दौरान राजधानी के मंदिरों में सुबह और शाम विशेष आरती का आयोजन श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र रहेगा। सुबह मंदिरों में मां की आरती के साथ पूजा-अर्चना शुरू होगी। इसके बाद दिनभर श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचेंगे। शाम को आरती के समय मंदिर परिसरों में भक्तों की भीड़ बढ़ने की संभावना है। कई मंदिरों में दुर्गा सप्तशती पाठ, भजन-कीर्तन और धार्मिक प्रवचन जैसे कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएंगे। शाम के समय मंदिरों से उठती घंटियों की आवाज, शंखनाद और मां के जयकारों से आसपास का वातावरण भी भक्तिमय हो जाएगा। परिवार के साथ मंदिर पहुंचने वाले श्रद्धालुओं के लिए यह नौ दिन आस्था और आध्यात्मिक ऊर्जा से भरे रहने वाले हैं।
नवरात्रि के दौरान मंदिरों में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना को देखते हुए व्यवस्थाओं पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। मंदिर समितियां दर्शन के लिए आने वाले लोगों को किसी तरह की परेशानी न हो, इसके लिए परिसर में साफ-सफाई, पेयजल और प्रसाद वितरण की व्यवस्था को बेहतर बनाने में जुटी हैं। भीड़ बढ़ने पर दर्शन की लाइन को व्यवस्थित करने के लिए स्वयंसेवकों की मदद ली जाएगी। मंदिरों में आने वाले बुजुर्गों, महिलाओं और बच्चों को ध्यान में रखते हुए भी व्यवस्थाएं की जा रही हैं। प्रमुख मंदिरों के आसपास यातायात व्यवस्था को लेकर भी संबंधित स्तर पर तैयारियां किए जाने की उम्मीद है।
नवरात्रि का उत्साह केवल मंदिरों तक सीमित नहीं है। राजधानी के बाजारों में भी इसका असर दिखाई देने लगा है। पूजा सामग्री की दुकानों पर फूल-माला, चुनरी, नारियल, कलश, रोली, प्रसाद और मां की तस्वीरों की मांग बढ़ने लगी है। मंदिरों के आसपास छोटी-छोटी दुकानें भी सजने लगी हैं। लाल चुनरी और फूलों से लेकर पूजा की अन्य सामग्री तक दुकानों पर श्रद्धालुओं की आवाजाही बढ़ने लगी है। नवरात्रि के साथ फल और व्रत में इस्तेमाल होने वाली खाद्य सामग्री की मांग भी बढ़ने की उम्मीद है। बाजारों में जगह-जगह नवरात्रि से जुड़ी सामग्री की दुकानें लोगों का ध्यान आकर्षित कर रही हैं।
नवरात्रि के पर्व में महिलाओं की भागीदारी विशेष रूप से दिखाई देती है। बड़ी संख्या में महिलाएं सुबह पूजा-अर्चना के लिए मंदिर पहुंचती हैं। कई स्थानों पर महिलाओं की ओर से सामूहिक भजन-कीर्तन और माता के गीतों के कार्यक्रम भी आयोजित किए जाते हैं। बच्चों में भी नवरात्रि को लेकर खास उत्साह रहता है। मंदिरों की सजावट और मां के विशेष श्रृंगार को देखने के लिए बच्चे परिवार के साथ मंदिर पहुंचते हैं। अष्टमी और नवमी पर होने वाले कन्या पूजन को लेकर भी परिवारों में तैयारियां शुरू हो जाती हैं। घरों में कन्याओं के स्वागत और पूजन के लिए आवश्यक सामग्री जुटाई जाने लगती है।
नवरात्रि के शुरुआती दिनों की तुलना में अष्टमी और नवमी पर मंदिरों में श्रद्धालुओं की संख्या और बढ़ने की संभावना रहती है। इन दिनों मां के दर्शन के साथ कन्या पूजन, भंडारे और प्रसाद वितरण के विशेष आयोजन किए जाते हैं। कई मंदिरों में भक्तों के लिए विशेष प्रसाद की व्यवस्था भी की जाती है। मंदिर समितियों की ओर से श्रद्धालुओं से अपील की जा रही है कि वे भीड़ के दौरान धैर्य बनाए रखें और व्यवस्था में सहयोग करें। मंदिर परिसर में अनावश्यक भीड़ न लगाने तथा निर्धारित मार्ग से ही दर्शन करने की अपील भी की जाएगी।
नवरात्रि केवल धार्मिक अनुष्ठानों का पर्व नहीं, बल्कि सेवा और सद्भाव का भी संदेश देता है। इस दौरान कई स्थानों पर श्रद्धालुओं के लिए जलपान और प्रसाद वितरण किया जाता है। कुछ मंदिरों और सामाजिक संगठनों की ओर से भंडारे और सेवा कार्यक्रम भी आयोजित किए जाते हैं। मां दुर्गा की आराधना के साथ समाज में सकारात्मकता, महिला सम्मान और सेवा की भावना को मजबूत करने का संदेश भी नवरात्रि के दौरान दिया जाता है। मंदिरों में होने वाले धार्मिक कार्यक्रमों के माध्यम से श्रद्धालुओं को भारतीय संस्कृति और परंपराओं से जोड़ने का प्रयास किया जाता है।
लखनऊ की नवरात्रि की अपनी अलग पहचान है। इन नौ दिनों में मंदिरों के आसपास सुबह से ही अलग तरह की चहल-पहल दिखाई देने लगती है। मंदिर की घंटियां, शंखनाद औरआरती की ध्वनि वातावरण में भक्ति का रंग घोल देती है। शाम होते ही रोशनी से जगमगाते मंदिर और मां के जयकारे शहर के धार्मिक उत्साह को और बढ़ा देते हैं। पुराने लखनऊ से लेकर गोमतीनगर और राजाजीपुरम तक कई इलाकों में नवरात्रि के दौरान मंदिरों की रौनक देखते ही बनती है। श्रद्धालुओं के लिए मां के दरबार में पहुंचना केवल पूजा का अवसर नहीं, बल्कि परिवार और समाज के साथ आस्था साझा करने का भी मौका होता है।
नवरात्रि के आगमन के साथ ही लखनऊ में तैयारियों का अंतिम दौर शुरू हो गया है। मंदिरों के दरबार सज रहे हैं, बाजारों में पूजा सामग्री की मांग बढ़ रही है और श्रद्धालु मां के दर्शन की तैयारी में जुट गए हैं। आने वाले नौ दिनों में राजधानी के मंदिर भक्ति और उल्लास के प्रमुख केंद्र बनेंगे। सुबह की आरती से लेकर शाम के जयकारों तक लखनऊ का माहौल मां की भक्ति में डूबा नजर आएगा। मंदिरों में जलने वाले दीप, फूलों से सजे दरबार, गूंजती घंटियां और मां के जयकारे राजधानी को एक अलग ही आध्यात्मिक रंग देंगे। नवरात्रि के इन नौ दिनों में लखनऊ आस्था, भक्ति, सेवा और उल्लास के खूबसूरत संगम का गवाह बनेगा।
Updated on:
08 Oct 2026 02:24 pm
Published on:
08 Oct 2026 02:24 pm
Copyright © 2026 Patrika Group. All Rights Reserved.
