
सौंदर्यीकरण से निखरता प्राचीन मंदिर परिसर(फोटो सोर्स : Ritesh Singh )
UP Tourism Prayagraj: तीर्थराज प्रयागराज की पहचान केवल संगम और बड़े धार्मिक आयोजनों तक सीमित नहीं है। शहर और आसपास के क्षेत्रों में कई ऐसे अति प्राचीन मंदिर और धार्मिक स्थल मौजूद हैं, जिनका इतिहास और आध्यात्मिक महत्व लंबे समय से श्रद्धालुओं को आकर्षित करता रहा है। इनमें से कई स्थल अपेक्षाकृत कम चर्चित होने के कारण पर्यटन के व्यापक मानचित्र पर अपनी पहचान नहीं बना सके हैं। अब इन प्राचीन धार्मिक स्थलों को पर्यटन की दृष्टि से विकसित करने की दिशा में काम किया जा रहा है। इसके तहत मंदिर परिसरों में श्रद्धालुओं के लिए जरूरी सुविधाएं विकसित करने के साथ ही सौंदर्यीकरण, लैंडस्केपिंग और बेहतर आवागमन की व्यवस्था पर जोर दिया जा रहा है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रयागराज के पथरबंधी महादेवालय, अति प्राचीन भोलेगिरि मंदिर, प्राचीन बोलन महादेव मंदिर और घीनपुर स्थित प्राचीन शिवाला मंदिर के विकास एवं सौंदर्यीकरण का कार्य कराया जा रहा है। इन चारों धार्मिक स्थलों पर करीब छह करोड़ रुपये की लागत से विभिन्न विकास कार्य प्रस्तावित और कराए जा रहे हैं। इन परियोजनाओं का उद्देश्य इन मंदिरों की प्राचीन पहचान और धार्मिक महत्व को सुरक्षित रखते हुए यहां आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों को आधुनिक एवं आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराना है।
प्रयागराज में बड़े हनुमान मंदिर, मनकामेश्वर मंदिर और नागवासुकी मंदिर जैसे प्रमुख धार्मिक स्थल पहले से ही देश-विदेश के श्रद्धालुओं के बीच लोकप्रिय हैं। इसके साथ ही पथरबंधी महादेवालय, भोलेगिरि मंदिर, बोलन महादेव मंदिर और प्राचीन शिवाला जैसे स्थलों को विकसित किए जाने से धार्मिक पर्यटन के दायरे को और व्यापक बनाने की कोशिश की जा रही है। विकास कार्यों के तहत मंदिर परिसरों में श्रद्धालुओं की सुविधा को प्राथमिकता दी गई है। बहुउद्देशीय हॉल, यात्री शेड, स्वागत द्वार और गलियारों का निर्माण एवं विकास किया जा रहा है। इन सुविधाओं से श्रद्धालुओं को दर्शन के दौरान प्रतीक्षा, विश्राम और अन्य धार्मिक आयोजनों के लिए व्यवस्थित स्थान मिल सकेगा। खासकर बुजुर्गों, महिलाओं और दूर-दराज से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए यह सुविधाएं उपयोगी साबित होंगी।
मंदिर परिसर में आने-जाने वाले श्रद्धालुओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए स्टैम्प फ्लोरिंग पाथवे विकसित किए जा रहे हैं। इससे परिसर में आवागमन सुगम होगा और श्रद्धालुओं को अलग-अलग हिस्सों तक पहुंचने में आसानी होगी। मंदिर परिसर में बैठने के लिए प्लेटफॉर्म और आरसीसी बेंच भी बनाई जा रही हैं। धार्मिक स्थलों पर बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने के दौरान अक्सर बैठने और विश्राम की समस्या सामने आती है। ऐसे में विकसित किए जा रहे प्लेटफॉर्म और बेंच लोगों के लिए उपयोगी होंगे। विशेष रूप से बुजुर्ग श्रद्धालु और परिवार के साथ आने वाले लोगों को इससे सुविधा मिलने की उम्मीद है।
धार्मिक स्थलों के विकास में केवल निर्माण कार्यों पर ही जोर नहीं दिया जा रहा है, बल्कि मंदिर परिसरों के वातावरण और सौंदर्य को बेहतर बनाने की दिशा में भी काम किया जा रहा है। इसके लिए सजावटी लाइटिंग और बागवानी की व्यवस्था विकसित की जा रही है। लैंडस्केपिंग के जरिए मंदिर परिसर को व्यवस्थित और आकर्षक स्वरूप देने का प्रयास किया जा रहा है। सजावटी रोशनी से शाम और रात के समय मंदिर परिसर का स्वरूप और बेहतर दिखाई देगा। वहीं हरियाली और बागवानी से श्रद्धालुओं को शांत और बेहतर वातावरण उपलब्ध कराने का प्रयास किया जा रहा है। धार्मिक स्थलों के सौंदर्यीकरण के साथ इनके पारंपरिक स्वरूप को बनाए रखने पर भी ध्यान दिया जा रहा है।
पर्यटकों और श्रद्धालुओं के लिए मंदिर परिसर में साइनेज और दिशासूचक बोर्ड लगाए जा रहे हैं। इनकी मदद से लोगों को मंदिर के विभिन्न हिस्सों, प्रवेश और निकास मार्गों तथा उपलब्ध सुविधाओं तक पहुंचने में आसानी होगी। पहली बार आने वाले पर्यटकों के लिए यह व्यवस्था खास तौर पर उपयोगी साबित हो सकती है। धार्मिक पर्यटन स्थलों पर व्यवस्थित साइनेज होने से पर्यटकों का अनुभव बेहतर होता है। इसी को ध्यान में रखते हुए विकसित किए जा रहे इन मंदिर परिसरों में सूचना और दिशा संबंधी व्यवस्थाओं को भी विकास कार्यों का हिस्सा बनाया गया है।
कुछ धार्मिक स्थलों पर हॉल के नवीनीकरण, म्यूरल वर्क और शिवलिंग के लिए बलुआ पत्थर के मेहराब तैयार किए जा रहे हैं। इन कार्यों के जरिए मंदिरों के धार्मिक एवं पारंपरिक स्वरूप को उभारने का प्रयास किया जा रहा है। साथ ही परिसर को ऐसा रूप देने की कोशिश है, जिससे श्रद्धालुओं को प्राचीनता और आधुनिक सुविधाओं का बेहतर संयोजन देखने को मिले। म्यूरल वर्क और पत्थर से तैयार किए जा रहे स्थापत्य तत्व मंदिरों की दृश्यात्मक पहचान को मजबूत करेंगे। इससे धार्मिक स्थल केवल पूजा और दर्शन के केंद्र के रूप में ही नहीं, बल्कि ऐतिहासिक और सांस्कृतिक दृष्टि से भी पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र बन सकेंगे।
पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने कहा कि प्रदेश सरकार की प्राथमिकता अति प्राचीन धार्मिक और सांस्कृतिक स्थलों को उनकी ऐतिहासिक पहचान के अनुरूप विकसित करना है। उन्होंने कहा कि इन स्थलों पर श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने के साथ परिसर के सौंदर्यीकरण पर भी ध्यान दिया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि प्रयागराज के प्राचीन मंदिरों में चल रहे विकास कार्य इसी दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं। सुविधाओं के विकास और सौंदर्यीकरण से धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिलने के साथ स्थानीय स्तर पर पर्यटन गतिविधियों को भी गति मिलने की उम्मीद है। सरकार प्रदेश के अन्य प्राचीन और महत्वपूर्ण धार्मिक एवं सांस्कृतिक स्थलों को भी पर्यटन की दृष्टि से विकसित करने पर काम कर रही है।
ऐतिहासिक पहचान को सहेजने की कोशिश
इन परियोजनाओं की खास बात यह है कि विकास के साथ प्राचीन धार्मिक स्थलों की पहचान और महत्व को बनाए रखने पर जोर दिया जा रहा है। मंदिरों की मूल आस्था और पारंपरिक स्वरूप को बरकरार रखते हुए श्रद्धालुओं की मौजूदा जरूरतों के अनुरूप सुविधाएं विकसित की जा रही हैं। प्रयागराज में धार्मिक पर्यटन की संभावनाएं पहले से ही व्यापक हैं। संगम, कुंभ और प्रमुख मंदिरों के कारण देश-विदेश से बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं। ऐसे में कम चर्चित लेकिन ऐतिहासिक महत्व वाले मंदिरों को बेहतर सुविधाओं से जोड़ने से पर्यटकों के सामने प्रयागराज की धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत का एक और व्यापक स्वरूप सामने आ सकेगा।
प्राचीन मंदिरों के विकास का असर केवल मंदिर परिसर तक सीमित रहने की उम्मीद नहीं है। इन स्थलों पर पर्यटकों की आवाजाही बढ़ने से आसपास के क्षेत्रों में भी पर्यटन से जुड़ी गतिविधियों को बढ़ावा मिल सकता है। स्थानीय स्तर पर परिवहन, छोटे कारोबार और अन्य पर्यटन सेवाओं को इससे लाभ मिलने की संभावना है। करीब छह करोड़ रुपये की लागत से चल रहे विकास कार्यों के जरिए इन चार प्राचीन धार्मिक स्थलों को सुविधासंपन्न और आकर्षक बनाने का प्रयास किया जा रहा है। मंदिरों में यात्री सुविधाएं, पाथवे, बैठने की व्यवस्था, लाइटिंग, हरियाली, साइनेज और अन्य विकास कार्य पूरे होने के बाद श्रद्धालुओं को अधिक व्यवस्थित वातावरण मिल सकेगा।
प्रयागराज की धार्मिक विरासत में इन प्राचीन मंदिरों का अपना महत्व है। विकास कार्यों के जरिए इन्हें पर्यटन की मुख्यधारा से जोड़ने की कोशिश की जा रही है। इससे स्थानीय श्रद्धालुओं के साथ प्रयागराज आने वाले पर्यटकों को भी इन स्थलों तक पहुंचने और इनके धार्मिक एवं ऐतिहासिक महत्व को समझने का अवसर मिलेगा। कुल मिलाकर, प्राचीन मंदिरों का विकास धार्मिक आस्था, सांस्कृतिक विरासत और पर्यटन सुविधाओं के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करने की दिशा में उठाया गया कदम है। सुविधाओं और सौंदर्यीकरण के साथ इन स्थलों की ऐतिहासिक पहचान को सहेजने का प्रयास प्रयागराज के धार्मिक पर्यटन को एक नया विस्तार देने की संभावनाएं तैयार कर रहा है।
Updated on:
06 Oct 2026 02:26 pm
Published on:
06 Oct 2026 02:26 pm
Copyright © 2026 Patrika Group. All Rights Reserved.
