
UP Politics: उत्तर प्रदेशसरकार की ओर से मदरसों में कामिल (ग्रेजुएशन) और फाजिल (पोस्ट ग्रेजुएशन) की डिग्री पर रोक लगाने के प्रस्ताव और डिप्टी CM केशव प्रसाद मौर्य के हालिया बयान को लेकर समाजवादी पार्टी (SP) ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। पार्टी के कई विधायकों ने सरकार की मंशा और शिक्षा नीति पर सवाल उठाते हुए इसे राजनीतिक मुद्दा बताया।
समाजवादी पार्टी के विधायक मोहम्मद हसन रूमी ने कहा कि मदरसों की भूमिका को गलत तरीके से पेश किया जा रहा है। उनके अनुसार, देश की आजादी की लड़ाई में कई स्वतंत्रता सेनानियों ने मदरसों से शिक्षा हासिल की थी। उन्होंने कहा, " मदरसों से ही स्वतंत्रता सेनानी निकले।''
उन्होंने देवबंद स्थित दारुल उलूम का उल्लेख करते हुए कहा कि वहां से जुड़े लोगों ने स्वतंत्रता आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाई थी और रेशमी रूमाल आंदोलन जैसे अभियानों में भी योगदान दिया था।
डिप्टी CM केशव प्रसाद मौर्य के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए विधायक मोहम्मद हसन रूमी ने आरोप लगाया कि चुनाव नजदीक आने पर ऐसे मुद्दों को राजनीतिक रूप से उछाला जा रहा है। उन्होंने कहा कि जनता को वास्तविक समस्याओं से भटकाने की कोशिश नहीं होनी चाहिए।
SP विधायक जाहिद बेग ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार शिक्षा संस्थानों के प्रति सकारात्मक रवैया नहीं अपना रही है। उन्होंने कहा कि चाहे मदरसों का मामला हो, विश्वविद्यालयों का या अन्य शिक्षण संस्थानों का, सरकार की नीतियां शिक्षा व्यवस्था को प्रभावित कर रही हैं। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार को शिक्षा की गुणवत्ता और छात्रों की सुविधाओं पर अधिक ध्यान देना चाहिए। सपा विधायक जाहिद बेग ने कहा, ''सरकार चाहती है लोग पांच किलो राशन के लिए कतारों में खड़े रहें।"
सपा विधायक अतुल प्रधान ने अपने बयान में जौहर यूनिवर्सिटी का मुद्दा उठाते हुए कहा कि वहां हजारों छात्र पढ़ाई कर रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार शिक्षा के बजाय राजनीतिक और सामाजिक मुद्दों को प्राथमिकता दे रही है। अतुल प्रधान ने यह भी कहा कि सरकार की नीतियों को लेकर जनता के बीच असंतोष बढ़ रहा है।
समाजवादी पार्टी के डिप्टी चीफ व्हिप आर.के. वर्मा ने कहा कि यदि कोई भी शिक्षण संस्थान नियमों के विपरीत डिग्रियां जारी कर रहा है, तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने मांग की कि जिन विश्वविद्यालयों या संस्थानों को कानूनी मान्यता प्राप्त नहीं है, उनकी जांच कर आवश्यक कानूनी कदम उठाए जाएं और उनकी डिग्रियों की वैधता की भी समीक्षा की जाए।