
UP Navratri Devi Temple: शारदीय नवरात्रि के पावन अवसर पर उत्तर प्रदेश के प्रमुख देवी मंदिरों में धार्मिक आस्था के साथ महिलाओं और बालिकाओं की सुरक्षा, सम्मान तथा स्वावलंबन का संदेश भी गूंजेगा। प्रदेश के 24 जिलों के 26 प्रमुख देवी मंदिरों में 17 से 19 अक्टूबर तक तीन दिवसीय सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। मिशन शक्ति के तहत होने वाले इन आयोजनों में पारंपरिक देवी गीतों का गायन, दुर्गा सप्तशती का पाठ और सांस्कृतिक प्रस्तुतियां प्रमुख आकर्षण रहेंगी। इन कार्यक्रमों के माध्यम से नवरात्रि की धार्मिक एवं सांस्कृतिक परंपराओं को बढ़ावा देने के साथ समाज में महिलाओं के प्रति सम्मान और उनकी सुरक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाने का प्रयास किया जाएगा।
पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह के अनुसार, धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजनों को सामाजिक जागरूकता का माध्यम बनाने की दिशा में यह पहल की जा रही है। कार्यक्रमों के जरिए लोगों तक यह संदेश पहुंचाया जाएगा कि महिलाओं और बालिकाओं की सुरक्षा, सम्मान तथा आत्मनिर्भरता समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है। मंदिरों में आयोजित होने वाले कार्यक्रमों में पारंपरिक धार्मिक प्रस्तुतियों के साथ इस संदेश को भी प्रमुखता दी जाएगी।
नवरात्रि की सप्तमी, अष्टमी और नवमी के अवसर पर आयोजित होने वाले कार्यक्रमों में देवी गायन की पारंपरिक शैली को विशेष स्थान दिया गया है। विभिन्न मंदिर परिसरों में कलाकार देवी गीत प्रस्तुत करेंगे और दुर्गा सप्तशती का पाठ किया जाएगा। इन आयोजनों से श्रद्धालुओं को धार्मिक-सांस्कृतिक परंपराओं से जुड़ने का अवसर मिलेगा। साथ ही, लोक संस्कृति और पारंपरिक गायन शैलियों को भी मंच प्रदान किया जाएगा।
नवरात्रि के दौरान देवी आराधना का विशेष महत्व होता है। ऐसे में प्रदेश के अलग-अलग जिलों में एक साथ आयोजित होने वाले ये कार्यक्रम धार्मिक वातावरण को और अधिक जीवंत बनाएंगे। आयोजनों में भाग लेने वाले कलाकार देवी गीतों और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से शक्ति उपासना की परंपरा को आगे बढ़ाएंगे। कार्यक्रमों का उद्देश्य केवल धार्मिक आयोजन तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इनके माध्यम से सामाजिक जिम्मेदारी और महिला सम्मान का संदेश भी लोगों तक पहुंचाया जाएगा।
कार्यक्रमों के लिए प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में स्थित प्रमुख देवी मंदिरों का चयन किया गया है। इनमें मिर्जापुर का मां विंध्यवासिनी देवी मंदिर, सोनभद्र का ज्वाला देवी मंदिर, भदोही का सीता समाहित स्थल, प्रयागराज के अलोपी देवी और ललिता देवी मंदिर, कौशांबी का कदवासिनी मंदिर तथा बलरामपुर का देवीपाटन मंदिर शामिल हैं। सीतापुर के नैमिषारण्य स्थित ललिता देवी मंदिर और सहारनपुर के शाकंभरी देवी मंदिर में भी सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इसके अलावा मथुरा का कात्यायनी देवी मंदिर, जौनपुर का मां शीतला चौकिया धाम, प्रतापगढ़ का बेल्हा देवी मंदिर, वाराणसी का विशालाक्षी देवी मंदिर और उन्नाव का चंडिका देवी मंदिर भी चयनित स्थलों में शामिल हैं। इन प्रमुख धार्मिक स्थलों पर नवरात्रि के दौरान श्रद्धालुओं की आवाजाही रहती है। ऐसे में कार्यक्रमों के जरिए धार्मिक आस्था के साथ सांस्कृतिक परंपराओं को भी व्यापक मंच मिलने की उम्मीद है।
अन्य चयनित स्थलों में औरैया का देवकाली मंदिर, गोरखपुर का मां तरकुलहा देवी धाम, मऊ का मां शीतला माता स्थल, चित्रकूट का शिवानी देवी मंदिर और हमीरपुर का गायत्री शक्ति पीठ शामिल हैं। जालौन के कोंच स्थित बैरागढ़ माता मंदिर, कानपुर देहात के घाटमपुर स्थित कुष्मांडा देवी मंदिर, मैनपुरी का शीतला माता मंदिर और फिरोजाबाद का चामुंडा माता मंदिर भी इस आयोजन का हिस्सा होंगे। राजधानी लखनऊ के चंद्रिका देवी और संकटा देवी मंदिरों के साथ फर्रुखाबाद के गुरुग्राम देवी मंदिर में भी कार्यक्रम आयोजित करने की योजना है। प्रदेश के अलग-अलग जिलों में आयोजन होने से स्थानीय कलाकारों को अपनी प्रतिभा प्रस्तुत करने का अवसर मिलेगा। साथ ही, क्षेत्रीय स्तर पर प्रचलित देवी गीतों और लोक सांस्कृतिक परंपराओं को बढ़ावा देने में भी मदद मिल सकती है।
इन कार्यक्रमों के आयोजन के लिए कुल 28.08 लाख रुपये की स्वीकृति दी गई है। निर्धारित बजट में कलाकारों के मानदेय और यात्रा व्यय के लिए सबसे बड़ी राशि रखी गई है। इस मद में 23.40 लाख रुपये खर्च किए जाने की व्यवस्था है। योजना के अनुसार, चयनित 26 स्थलों पर तीन दिवसीय कार्यक्रमों में भाग लेने वाले कलाकारों को निर्धारित प्रावधानों के तहत मानदेय दिया जाएगा और उनके यात्रा व्यय का भुगतान किया जाएगा।
कलाकारों के मानदेय और यात्रा खर्च के लिए बजट का बड़ा हिस्सा निर्धारित किए जाने से आयोजन में उनकी भागीदारी सुनिश्चित करने पर जोर दिखाई देता है। धार्मिक कार्यक्रमों के साथ स्थानीय और पारंपरिक कला रूपों को प्रोत्साहित करने का अवसर भी मिलेगा। इन आयोजनों की सफलता के लिए निर्धारित समय पर कार्यक्रमों का संचालन, कलाकारों की भागीदारी और मंदिर परिसरों में व्यवस्थाओं का समन्वय महत्वपूर्ण रहेगा।
मिशन शक्ति के तहत आयोजित किए जा रहे इन कार्यक्रमों का प्रमुख उद्देश्य महिलाओं और बालिकाओं की सुरक्षा, सम्मान और आत्मनिर्भरता के प्रति जागरूकता बढ़ाना है। धार्मिक आयोजनों में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल होते हैं। ऐसे आयोजनों के माध्यम से महिलाओं के अधिकारों और सामाजिक सम्मान से जुड़े संदेशों को व्यापक स्तर पर लोगों तक पहुंचाने का प्रयास किया जाएगा। पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने कहाकि शारदीय नवरात्रि आस्था, शक्ति और सांस्कृतिक परंपराओं का पर्व है। उनका कहना है कि धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजन सामाजिक बदलाव का माध्यम भी बन सकते हैं। उन्होंने बेटियों को सुरक्षित, सम्मानजनक और आत्मनिर्भर जीवन के लिए प्रोत्साहित करने की जरूरत पर जोर दिया।
प्रदेश के 24 जिलों में 26 देवी मंदिरों पर होने वाले ये कार्यक्रम नवरात्रि की धार्मिक परंपराओं और महिला सशक्तिकरण के संदेश को एक साथ जोड़ेंगे। देवी गीतों, दुर्गा सप्तशती पाठ और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से श्रद्धालुओं को धार्मिक वातावरण से जुड़ने का अवसर मिलेगा। वहीं, मिशन शक्ति के संदेश के जरिए महिलाओं और बालिकाओं की सुरक्षा तथा सम्मान को सामाजिक प्राथमिकता बनाने पर जोर रहेगा। 17 से 19 अक्टूबर तक प्रस्तावित इन आयोजनों में धार्मिक आस्था, लोक संस्कृति और सामाजिक जागरूकता का समन्वय देखने को मिलेगा। कार्यक्रमों के माध्यम से प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत को प्रोत्साहन देने और महिलाओं के प्रति सम्मान का संदेश जन-जन तक पहुंचाने का प्रयास किया जाएगा।