UP Panchayat Elections postponed : उत्तर प्रदेश में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव अब 2027 के विधानसभा चुनाव के बाद ही होंगे। 26 मई को ग्राम प्रधानों का कार्यकाल खत्म होने के बाद गांवों में 'प्रशासक राज' लागू करने की तैयारी है। जानिए क्यों टले चुनाव और क्या हैं इसके मुख्य कारण।
लखनऊ : उत्तर प्रदेश में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव अब 2027 के विधानसभा चुनाव के बाद ही कराए जाएंगे। प्रदेश की 57,695 ग्राम पंचायतों के प्रधानों, क्षेत्र पंचायतों और जिला पंचायतों का 5 वर्षीय कार्यकाल 26 मई 2026 को समाप्त हो रहा है। पंचायतीराज विभाग ने इसके बाद गांवों में प्रशासक (Administrator) नियुक्त करने का प्रस्ताव मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को भेज दिया है।
पंचायतीराज मंत्री ओमप्रकाश राजभर ने स्पष्ट किया कि अभी कोई आधिकारिक आदेश जारी नहीं हुआ है। प्रस्ताव मुख्यमंत्री के पास विचाराधीन है। उन्होंने कहा कि ग्राम प्रधानों का कार्यकाल बढ़ाने का कोई प्रावधान नहीं है, इसलिए शासन स्तर से प्रशासक नियुक्त किए जाएंगे।
राष्ट्रीय पंचायतीराज ग्राम प्रधान संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश सिंह ने 20 अप्रैल को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और 16 मई को भाजपा प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी से मुलाकात कर प्रशासनिक समिति गठन की मांग की थी। संगठन चाहता है कि मौजूदा प्रधानों सहित वार्ड सदस्यों और ग्राम पंचायत सहायकों को शामिल करके समिति बनाई जाए, ताकि बाहरी प्रशासक की जगह स्थानीय लोग ही कामकाज संभाल सकें।
प्रधान संगठन के अनुसार, सरकारी कर्मचारी को प्रशासक बनाने से कई समस्याएं आ सकती हैं:
पंचायतीराज अधिनियम 1947 की धारा-12 (उपधारा 3A) के तहत यदि चुनाव समय पर नहीं हो पाते, तो सरकार या जिलाधिकारी प्रशासक या प्रशासनिक समिति नियुक्त कर सकते हैं।
पंचायत चुनाव में यह देरी यूपी की स्थानीय राजनीति और ग्रामीण प्रशासन पर लंबे समय तक असर डालेगी। सरकार का फोकस 2027 विधानसभा चुनाव पर केंद्रित होने के कारण पंचायत स्तर पर प्रशासक राज लगभग तय माना जा रहा है।