लखनऊ

2019 से पहले विपक्षी एकता का लिटमस टेस्ट होंगे पंचायत उपचुनाव, शहरी मतदाताओं तक ऐसे पहुंच बनाएगी बीजेपी

निर्वाचन आयोग ने पंचायत उपचुनाव के करीब चार हजार पदों की अधिसूचना जारी कर दी है...

2 min read
Aug 04, 2018
2019 से पहले विपक्षी एकता का लिटमस टेस्ट होंगे पंचायत उपचुनाव, शहरी मतदाताओं में सेंध लगाएगी बीजेपी

लखनऊ. लोकसभा चुनाव से पहले पंचायत उपचुनाव विपक्षी एकता का लिटमस टेस्ट साबित होंगे। ग्राम पंचायत के करीब चार हजार रिक्त पदों पर इसी महीने उपचुनाव होने हैं। इनमें ग्राम प्रधान के 170 पद, ग्राम पंचायत सदस्य के 3978 पद और जिला पंचायत सदस्य के 11 पद खाली हैं। निर्वाचन आयोग ने पंचायत उपचुनाव की अधिसूचना जारी कर दी है। इन पदों के लिये 08 अगस्त को नामांकन, 17 अगस्त को वोटिंग और 20 अगस्त को मतदान होना है। विपक्ष इन पदों पर संयुक्त प्रत्याशी उतारकर 2019 के लोकसभा चुनाव से पहले बीजेपी को मात देकर ग्रामीण मतदाताओं तक पहुंच बनाने की तैयारी में है। वहीं, बीजेपी करीब 2500 पार्षदों के नामित पदों पर पार्टी कार्यकर्ताओं को नॉमिनेट कर एक तीर से दो निशाने साधने की तैयारी में है।

गोरखुपर-फूलपुर के बाद कैराना और नूरपुर उपचुनाव में हार के बाद बीजेपी प्रदेश नेतृत्व रूठे कार्यकर्ताओं को आयोगों, बोर्डों, निगमों और स्थानीय निकाय में नामित पदों पर बिठाकर उन्हें खुश करने में जुटा है। पार्टी आलाकमान को लगता है कि इन उपचुनावों में कहीं न कहीं हार की एक वजह कार्यकर्ताओं का नाराज होना भी है। 15 साल बाद जब यूपी की सत्ता में बीजेपी आई तो कार्यकर्ताओं को उम्मीद थी कि उन्हें सरकार में भागीदारी मिलेगी, लेकिन निकाय चुनाव में पार्टी से टिकट न मिलने कारण बड़ी संख्या में पार्टी कार्यकर्ताओं को निराश होना पड़ा। इस समय पूरे प्रदेश में 16 नगर निगम, 194 नगर पालिकायें, 653 नगर पंचायतें और 28 विकास प्राधिकरण बोर्डों में भी 03 सदस्य नामित हो सकते हैं।

ये भी पढ़ें

चुनाव आयोग ने घोषित की पंचायत चुनाव की तारीख, जानें- आपके जिले में कब पड़ेंगे वोट

भारतीय जनता पार्टी नगर निगमों, नगर पालिकाओं, नगर पंचायतों समेत विकास प्राधिकरण बोर्डों के कुल 2543 नामित पदों पर कार्यकर्ताओं को बिठाने की तैयारी में है। इससे एक तरफ जहां रूठे कार्यकर्ताओं को मनाया जा सकेगा, वहीं आम चुनाव से पहले शहरी मतदाताओं तक बीजेपी की पहुंच भी बढ़ेगी। इसे लेकर जिला संगठन के पदाधिकारी, सांसदों व विधायकों संग मिलकर मंथन में जुटे गये हैं। जिला संगठन जल्द ही पार्षद पद के लिए नामित होने वाले कार्यकर्ताओं की सूची फाइनल कर प्रदेश नेतृत्व तक भेजेगा। इसके लिये नगर निगम और नगर पालिकाओं के पार्षद या फिर आम लेकिन सक्रिय कार्यकर्ताओं को पार्षद के तौर पर नामित किया जा सकता है। अखिलेश यादव सरकार में भी पार्षदों के नामित पदों पर सपा कार्यकर्ताओं को ही बिठाया गया था।

आसान नहीं विपक्ष की राह
निर्वाचन आयोग ने पंचायत उपचुनाव की अधिसूचना जारी कर दी है। सत्ता पक्ष की कोशिश पंचायत उपचुनाव में जीत दर्ज कर 2019 के लोकसभा चुनाव से पहले कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ाना है। लेकिन, इन सभी पदों पर विपक्ष ने संयुक्त प्रत्याशी उतारने की घोषणा कर बीजेपी की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। हालांकि, विपक्षी दलों के लिए ये इतना आसान नहीं होगा। क्योंकि गांवों में हर दल के अपने-अपने मजबूत कार्यकर्ता हैं और सभी की नजर उपचुनाव पर है। ऐसे में सपा-बसपा और कांग्रेसी कार्यकर्ताओं को किसी एक पार्टी के किसी एक नाम पर सहमत कर पाना इतना आसान नहीं होगा। आगामी आम चुनाव से पहले पंचायत उपचुनाव विपक्षी एकता के लिये लिटमस टेस्ट साबित होने वाले हैं।

ये भी पढ़ें

मायावती पर भड़के भाजपा प्रदेश अध्यक्ष, कहा- बीजेपी की बढ़ती लोकप्रियता से भयभीत हैं बसपा सुप्रीमो
Updated on:
04 Aug 2018 02:11 pm
Published on:
04 Aug 2018 02:04 pm
Also Read
View All