
UP Police Introduces New Licensing System: प्रदेश में निजी सुरक्षा एजेंसियों (प्राइवेट सिक्योरिटी एजेंसियों) की कार्यप्रणाली को अधिक पेशेवर, पारदर्शी और जवाबदेह बनाने की दिशा में उत्तर प्रदेश पुलिस ने महत्वपूर्ण कदम उठाया है। पुलिस महानिदेशक राजीव कृष्ण के निर्देशन एवं एडीजी कानून-व्यवस्था अमिताभ यश के सतत मार्गदर्शन में प्रदेशभर में प्राइवेट सिक्योरिटी ट्रेनिंग सेंटर स्थापित करने के लिए लाइसेंस प्रदान करने की नई व्यवस्था प्रारंभ की जा रही है। इस नई पहल के अंतर्गत निजी सुरक्षा एजेंसियों के सिक्योरिटी गार्ड एवं सुपरवाइजर को मानक प्रशिक्षण उपलब्ध कराने हेतु अधिकृत प्रशिक्षण केंद्र स्थापित किए जाएंगे। इस संबंध में पुलिस महानिरीक्षक कानून एवं व्यवस्था एल. आर. कुमार ने वीडियो संदेश जारी कर विस्तृत जानकारी दी है।
प्रदेश में बड़ी संख्या में निजी सुरक्षा एजेंसियां कार्यरत हैं, जो बैंकों, औद्योगिक इकाइयों, शैक्षणिक संस्थानों, अस्पतालों, मॉल, आवासीय परिसरों और विभिन्न सरकारी-गैरसरकारी संस्थानों में सुरक्षा सेवाएं प्रदान करती हैं। इन एजेंसियों में कार्यरत गार्डों और सुपरवाइजर की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होती है। नई व्यवस्था के तहत अब प्रशिक्षण प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित और मानकीकृत किया जाएगा। इसके लिए इच्छुक संस्थानों को निर्धारित मानकों के अनुसार लाइसेंस दिया जाएगा, जिससे वे अधिकृत प्राइवेट सिक्योरिटी ट्रेनिंग सेंटर के रूप में कार्य कर सकें।
प्रशिक्षण केंद्र स्थापित करने के लिए स्पष्ट पात्रता मानदंड तय किए जाएंगे। आधारभूत संरचना, प्रशिक्षकों की योग्यता और प्रशिक्षण पाठ्यक्रम का मूल्यांकन किया जाएगा। पुलिस विभाग द्वारा नियमित निरीक्षण और मॉनिटरिंग की व्यवस्था होगी।
प्रशिक्षण की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए निर्धारित पाठ्यक्रम का पालन अनिवार्य होगा। इससे यह सुनिश्चित किया जाएगा कि निजी सुरक्षा कर्मियों को केवल औपचारिक नहीं, बल्कि व्यवहारिक और तकनीकी प्रशिक्षण भी मिले।
प्रशिक्षण पाठ्यक्रम में निम्नलिखित विषयों को प्राथमिकता दी जाएगी। बुनियादी सुरक्षा प्रबंधन,आपातकालीन परिस्थितियों से निपटने की तकनीक,भीड़ नियंत्रण और आपदा प्रबंधन,प्राथमिक उपचार (फर्स्ट एड),अग्नि सुरक्षा उपाय,संचार कौशल और आचरण,कानूनी प्रावधानों की जानकारी,इस प्रशिक्षण के बाद गार्ड और सुपरवाइजर अधिक सक्षम, अनुशासित और जिम्मेदार ढंग से अपने कर्तव्यों का निर्वहन कर सकेंगे।
एडीजी कानून-व्यवस्था अमिताभ यश के मार्गदर्शन में शुरू की गई इस पहल का उद्देश्य केवल प्रशिक्षण देना नहीं, बल्कि प्रदेश की समग्र सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाना है। निजी सुरक्षा एजेंसियां पुलिस के सहयोगी के रूप में कार्य करती हैं। यदि ये एजेंसियां प्रशिक्षित और अनुशासित होंगी, तो संवेदनशील स्थलों की सुरक्षा और अधिक प्रभावी हो सकेगी।
सूत्रों के अनुसार, लाइसेंसिंग प्रक्रिया को डिजिटल प्लेटफॉर्म से जोड़ने की भी योजना है, जिससे आवेदन, सत्यापन और स्वीकृति की प्रक्रिया पारदर्शी और समयबद्ध हो सके। इसके साथ ही प्रशिक्षण रिकॉर्ड का डिजिटल संधारण,प्रमाणपत्रों का सत्यापन,निरीक्षण रिपोर्ट की ऑनलाइन मॉनिटरिंग,जैसी व्यवस्थाएं भी लागू की जा सकती हैं।
इस पहल से प्रदेश में रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे। प्रशिक्षण केंद्र स्थापित होने से प्रशिक्षकों की नियुक्ति,प्रशासनिक स्टाफ,तकनीकी सहयोगी जैसे पदों पर रोजगार बढ़ेगा। साथ ही प्रशिक्षित सुरक्षा कर्मियों की मांग भी बढ़ेगी, जिससे युवाओं को स्थायी रोजगार के अवसर मिलेंगे।
पुलिस महानिरीक्षक कानून एवं व्यवस्था एल.आर. कुमार ने अपने वीडियो संदेश में कहा कि यह पहल प्रदेश की सुरक्षा प्रणाली को अधिक पेशेवर और सुदृढ़ बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने इच्छुक संस्थानों और एजेंसियों से अपील की कि वे निर्धारित मानकों के अनुरूप आवेदन करें और प्रशिक्षण व्यवस्था को गंभीरता से लें। उन्होंने कहा कि गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं किया जाएगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस पहल से प्रदेश में “सुरक्षा संस्कृति” को बढ़ावा मिलेगा। अब तक कई स्थानों पर सुरक्षा कर्मियों को सीमित प्रशिक्षण के साथ तैनात किया जाता था, जिससे आपात स्थिति में प्रभावी प्रतिक्रिया देना कठिन होता था।
मानकीकृत प्रशिक्षण से सुरक्षा कर्मियों का आत्मविश्वास बढ़ेगा,संस्थानों में सुरक्षा स्तर मजबूत होगा,नागरिकों को अधिक सुरक्षित वातावरण मिलेगा।