लखनऊ

क्या ‘दलित-ब्राह्मण’ के सहारे मायावती लड़ेंगी यूपी विधानसभा चुनाव का रण? 2027 के लिए 2007 वाला प्लान!

UP Politics: 2027 चुनाव से पहले बसपा संगठन मजबूत करने में जुटी है। ब्राह्मण समाज को साधने के लिए पार्टी 80 से अधिक टिकट देने की योजना बना रही है।

2 min read
Feb 26, 2026
up assembly elections 2027 mayawati nominated zulfikar ahmad gama from shahganj seat in jaunpur
बसपा प्रमुख मायावती। फोटो सोर्स-IANS

UP Politics, UP Assembly Election 2027: बहुजन समाज पार्टी ने 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के लिए अभी से अपनी तैयारियां पूरी कर ली हैं। पार्टी सुप्रीमो मायावती 2007 के चुनाव वाले सोशल इंजीनियरिंग फॉर्मूले को दोहराने की योजना बना रही हैं। 2007 में मायावती ने दलित वोटों के साथ ब्राह्मण वोटरों को जोड़कर पूर्ण बहुमत की सरकार बनाई थी। उस समय इस गठजोड़ ने विपक्ष को पूरी तरह हरा दिया था। अब मायावती पिछले तीन महीनों से सभी बैठकों में यही बात दोहरा रही हैं कि ब्राह्मण-दलित गठजोड़ के साथ बसपा 2027 में जाएगी और पूर्ण बहुमत से सत्ता में वापसी करेगी। पार्टी का मुख्य नारा 'सर्वजन हिताय सर्वजन सुखाय' रहेगा।

पहला प्रत्याशी घोषित, ब्राह्मण चेहरा चुना

बसपा ने 2027 चुनाव के लिए पहला टिकट ब्राह्मण नेता को दिया है। जालौन जिले की माधौगढ़ विधानसभा सीट से आशीष पांडेय को पार्टी का प्रत्याशी बनाया गया है। उन्हें इस सीट का प्रभारी भी बनाया गया है। माधौगढ़ सीट बसपा का मजबूत गढ़ मानी जाती है। यहां 2017 में पार्टी दूसरे नंबर पर रही थी। बसपा की पुरानी परंपरा के अनुसार, प्रभारियों को ही बाद में प्रत्याशी बनाया जाता है। इसलिए यह घोषणा पार्टी के पहले उम्मीदवार के रूप में देखी जा रही है। पार्टी जल्द ही अन्य प्रभारियों के नाम भी घोषित करेगी। सूत्रों के अनुसार, होली के बाद कानपुर मंडल की 5 या अधिक सीटों पर प्रभारियों का ऐलान होगा।

ब्राह्मणों को बड़ी संख्या में टिकट देने की योजना

पार्टी सूत्र बताते हैं कि 2027 में बसपा 80 या इससे ज्यादा ब्राह्मण प्रत्याशियों को मैदान में उतार सकती है। कुछ रिपोर्टों में कहा गया है कि कुल सीटों का लगभग 40-50 प्रतिशत ब्राह्मण उम्मीदवारों को दिया जा सकता है। इसका आधिकारिक ऐलान जून तक हो सकता है। मायावती ब्राह्मण समाज को लगातार संदेश दे रही हैं कि बसपा में उन्हें सम्मान, पद और सुरक्षा मिलती है। उन्होंने हाल ही में कहा कि अन्य पार्टियां या सरकारें ब्राह्मणों को उतना सम्मान नहीं दे पाईं जितना बसपा ने दिया। यह बयान ब्राह्मण वोटरों को जोड़ने के लिए दिया गया है।

ब्राह्मण मुद्दों पर मायावती मुखर

मायावती ब्राह्मणों के मुद्दों पर खुलकर बोल रही हैं। हाल ही में फिल्म 'घूसखोर पंडत' में ब्राह्मण समाज के कथित अपमान पर उन्होंने नाराजगी जताई और केंद्र सरकार से इस पर बैन लगाने की मांग की। अपने जन्मदिन पर भी उन्होंने कहा कि ब्राह्मणों का सम्मान नहीं हो रहा है। इससे साफ है कि पार्टी ब्राह्मणों की नाराजगी का फायदा उठाना चाहती है। दूसरी तरफ सपा इस मामले पर चुप है। सपा प्रवक्ता फखरुल हसन ने कहा कि सपा में हमेशा सभी जातियों का सम्मान होता रहा है और 2027 का इंतजार करेंगे।

बसपा की मौजूदा स्थिति और चुनौतियां

फिलहाल बसपा 'करो या मरो' की स्थिति में है। पार्टी पिछले चुनावों में कमजोर हुई है और सत्ता में वापसी का सपना देख रही है। दलितों के साथ ब्राह्मणों को जोड़ने का यह प्रयोग पार्टी के लिए सकारात्मक माना जा रहा है। ब्राह्मण वोटरों की नाराजगी BJP से भी जुड़ी है, जिसका फायदा बसपा उठाना चाहती है। लेकिन यह प्रयोग कितना सफल होगा, यह समय बताएगा। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि अगर ब्राह्मण-दलित गठजोड़ मजबूत हुआ तो बसपा को फायदा मिल सकता है। पार्टी अभी से सक्रिय होकर संगठन मजबूत कर रही है।

Updated on:
26 Feb 2026 11:23 am
Published on:
26 Feb 2026 11:20 am