
BJP will Cancel Tickets Poor Reports MLAs?: उत्तर प्रदेश में साल 2027 में होने वाले विधानसभा चुनावों को लेकर राजनीतिक दलों ने अभी से अपनी रणनीति पर काम शुरू कर दिया है। भारतीय जनता पार्टी भी चुनावी तैयारियों में पूरी तरह सक्रिय हो गई है। पार्टी अब 2022 में जीतकर विधानसभा पहुंचे विधायकों की जमीनी पकड़ और जनता के बीच उनकी सक्रियता का आकलन करा रही है। जिन विधायकों को लेकर जनता के बीच नाराजगी या दूरी की शिकायतें सामने आ रही हैं, उनकी जगह नए चेहरों की तलाश भी शुरू हो गई है।
BJPके एक पदाधिकारी की माने तो पार्टी हाईकमान ने इस पूरे सर्वे और फीडबैक प्रक्रिया के लिए दो अलग-अलग एजेंसियों को जिम्मेदारी दी है। एजेंसियों की टीम पिछले कई दिनों से शहरों और गांवों में जाकर लोगों से बातचीत कर रही है। सर्वे के दौरान आम जनता से मौजूदा विधायकों के कामकाज, व्यवहार और क्षेत्र में उनकी सक्रियता को लेकर राय ली जा रही है।
इसके साथ ही संभावित नए उम्मीदवारों की लोकप्रियता और सामाजिक प्रभाव को भी परखा जा रहा है। पार्टी यह जानने की कोशिश कर रही है कि कौन सा चेहरा आगामी चुनाव में बेहतर प्रदर्शन कर सकता है।
भाजपा नेताओं के मुताबिक एजेंसियों की टीम मंडलवार सर्वे कर रही है। प्रदेश के ज्यादातर मंडलों में भाजपा का प्रदर्शन मजबूत रहा है, लेकिन मुरादाबाद मंडल को लेकर पार्टी की चिंता ज्यादा बताई जा रही है। पार्टी सूत्रों के अनुसार, 2017 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने मुरादाबाद मंडल की 27 में से 14 सीटों पर जीत दर्ज की थी, जबकि 2022 में यह संख्या घटकर 10 रह गई। यही वजह है कि पार्टी इस क्षेत्र में ज्यादा सतर्क दिखाई दे रही है और यहां मजबूत व जिताऊ उम्मीदवारों की तलाश पर विशेष जोर दिया जा रहा है।
भाजपा संगठन जिला और क्षेत्र स्तर पर संभावित उम्मीदवारों की सूची तैयार कर रहा है। इसके साथ ही सांसदों और राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ की राय को भी अहम माना जाएगा। बाहरी एजेंसियों द्वारा तैयार की गई रिपोर्ट का मिलान संगठन की सूची से किया जाएगा। जिन नामों पर दोनों स्तरों पर सहमति बनेगी, उन्हें आगे बढ़ाने की संभावना ज्यादा मानी जा रही है। बताया जा रहा है कि एजेंसियां जल्द अपनी रिपोर्ट पार्टी हाईकमान को सौंप देंगी।
सर्वे के दौरान केवल विधायकों की लोकप्रियता ही नहीं, बल्कि सरकार की योजनाओं और कामकाज को लेकर जनता की राय भी जुटाई जा रही है। पार्टी यह समझने की कोशिश कर रही है कि किन क्षेत्रों में सरकार की छवि मजबूत है और कहां असंतोष की स्थिति बनी हुई है। भाजपा नेतृत्व का मानना है कि समय रहते फीडबैक मिलने से चुनावी रणनीति को बेहतर तरीके से तैयार किया जा सकेगा। पार्टी सूत्रों के मुताबिक, जिन नेताओं ने विधायक बनने के बाद काम नहीं किया पार्टी की उन पर नजर बनी हुई है। साथ ही जिन विधायकों का रिपोर्ट कार्ड खराब है आगामी चुनाव में उनका टिकट कट सकता है।
सिर्फ भाजपा ही नहीं, बल्कि प्रदेश के अन्य राजनीतिक दल भी 2027 की तैयारियों में जुट गए हैं। कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, बहुजन समाज पार्टी और आजाद समाज पार्टी ने भी संभावित उम्मीदवारों को लेकर सक्रियता बढ़ा दी है। कांग्रेस ने पश्चिमी उत्तर प्रदेश की सीटों पर बाहरी एजेंसियों के जरिए संभावित उम्मीदवारों की सूची तैयार कराई है। वहीं समाजवादी पार्टी भी उम्मीदवार चयन के लिए सर्वे और फीडबैक प्रक्रिया का सहारा ले चुकी है।
बहुजन समाज पार्टी ने कई सीटों पर अपने प्रभारियों और संभावित प्रत्याशियों के नाम घोषित करने शुरू कर दिए हैं। दूसरी ओर आजाद समाज पार्टी दूसरे दलों के प्रभावशाली नेताओं को अपने साथ जोड़कर चुनावी समीकरण मजबूत करने में लगी हुई है। छोटे दल भी लगातार क्षेत्रीय स्तर पर सक्रियता बढ़ा रहे हैं।
उत्तर प्रदेश की राजनीति में 2027 का विधानसभा चुनाव अभी भले दूर हो, लेकिन राजनीतिक दलों ने अपनी जमीन मजबूत करने की कवायद तेज कर दी है। उम्मीदवारों की तलाश, सर्वे, सामाजिक समीकरण और संगठनात्मक रणनीति को लेकर सभी दल लगातार सक्रिय दिखाई दे रहे हैं।