UP Religious Tourism : लखनऊ मंडल के धार्मिक और सांस्कृतिक पर्यटन को नई पहचान दिलाने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार ने 34 परियोजनाओं को मंजूरी दी है। करीब 16.35 करोड़ रुपये की लागत से प्राचीन मंदिरों, तीर्थस्थलों और सांस्कृतिक धरोहरों का कायाकल्प होगा, जिससे रोजगार और पर्यटन दोनों को बढ़ावा मिलेगा।
UP Heritage and Culture: उत्तर प्रदेश सरकार ने राजधानी लखनऊ और आसपास के जनपदों में पर्यटन विकास को एक नई उड़ान देने के लिए 34 प्राचीन और धार्मिक स्थलों के विकास कार्यों को हरी झंडी दे दी है। मुख्यमंत्री पर्यटन स्थलों के विकास योजना के तहत इन परियोजनाओं पर लगभग 16 करोड़ 35 लाख 75 हजार रुपये खर्च किए जाएंगे। इस घोषणा की जानकारी पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने दी। उन्होंने कहा कि इन परियोजनाओं के माध्यम से लखनऊ मंडल के ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और धार्मिक स्थलों को पर्यटन के नक्शे पर और मजबूत पहचान दिलाई जाएगी।
मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि लखीमपुर खीरी के सदर विधानसभा क्षेत्र में स्थित माता बेलहियाधाम का विकास किया जाएगा। इसके अलावा –
क्षेत्रों के मंदिरों और तीर्थ स्थलों के लिए भी धनराशि स्वीकृत की गई है। इन स्थलों के इन्फ्रास्ट्रक्चर, सौंदर्यीकरण और पर्यटक सुविधाओं में सुधार किया जाएगा।
इसके अलावा, सरोजनी नगर विधानसभा क्षेत्र के महादेव जलसाई नाथ जी प्राचीन मंदिर, श्री ज्वाला मां मंदिर बरिगवां, एलडीए कॉलोनी लखनऊ उत्तरी का संझिया घाट (गोमती नदी तट), राम जानकी मंदिर (लखनऊ मध्य), घटघटा बाबा देव स्थान सालेहनगर माल (मलिहाबाद), याहियागंज गुरुद्वारा, लॉर्ड बुद्धा संस्थान (सरोजनी नगर), और कांशीराम पर्यटन प्रबंधन संस्थान (बी.के.टी.) का उच्चीकरण किया जाएगा।
लखनऊ मंडल का हिस्सा उन्नाव जिला भी इस योजना में खास स्थान रखता है। यहां के प्रमुख धार्मिक स्थलों में –
इन परियोजनाओं के साथ-साथ, कुछ उच्चादेशों पर प्रस्तावित परियोजनाएं और मुख्यमंत्री पर्यटन सहभागिता योजना के तहत भी नए कार्य किए जाएंगे। इसका उद्देश्य स्थानीय निकायों, निजी क्षेत्र और समुदायों को पर्यटन विकास में भागीदार बनाना है।
मंत्री जयवीर सिंह ने कहा कि "सरकार का प्रयास है कि धार्मिक और सांस्कृतिक धरोहरों को संरक्षित करते हुए उन्हें आधुनिक सुविधाओं से जोड़ा जाए, ताकि स्थानीय लोगों को रोजगार मिले और पर्यटकों को आकर्षित किया जा सके।" उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इन परियोजनाओं का लक्ष्य केवल ढांचागत विकास नहीं, बल्कि स्थानीय कला, संस्कृति और परंपराओं को जीवंत बनाए रखना है।