उत्तर प्रदेश के 51 जिलों में मौसम विभाग ने बारिश, तेज हवाओं और बिजली गिरने का अलर्ट जारी किया है। पश्चिमी और तराई क्षेत्रों में मौसम सुहाना रहा, जबकि बुंदेलखंड में भीषण गर्मी पड़ी।
UP Weather Update: उत्तर प्रदेश के 51 जिलों में मौसम विभाग ने बारिश और तेज हवाओं का अलर्ट जारी किया है। इन जिलों में 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चल सकती हैं। साथ ही कहीं-कहीं बिजली गिरने की भी संभावना है।
बुधवार को प्रदेश में मौसम अलग-अलग नजर आया। पश्चिमी इलाके और तराई क्षेत्रों में आंधी के साथ बारिश हुई, जिससे मौसम सुहाना हो गया। वहीं बुंदेलखंड और दक्षिणी जिलों में तेज धूप और भारी गर्मी रही। बांदा में तापमान 45.4 डिग्री सेल्सियस पहुंच गया, जो पूरे प्रदेश में सबसे ज्यादा था।
आंचलिक मौसम विज्ञान केंद्र लखनऊ के वैज्ञानिक अतुल कुमार सिंह के अनुसार, बृहस्पतिवार से तापमान धीरे-धीरे बढ़ने लगेगा। 16 मई से बुंदेलखंड और दक्षिणी जिलों में लू चलने और तपिश बढ़ने की संभावना है।
फतेहपुर, प्रतापगढ़, देवरिया, गोरखपुर, संत कबीर नगर, बस्ती, कुशीनगर, महाराजगंज, सिद्धार्थ नगर, गोंडा, बलरामपुर, श्रावस्ती, बहराइच, लखीमपुर खीरी, सीतापुर, हरदोई, फर्रुखाबाद, कन्नौज, कानपुर देहात, कानपुर नगर, उन्नाव, लखनऊ, बाराबंकी, रायबरेली, अमेठी, सुल्तानपुर, अयोध्या, अंबेडकर नगर, सहारनपुर, शामली, मुजफ्फरनगर, बागपत, मेरठ, गाजियाबाद, हापुड़, गौतम बुद्ध नगर, बुलंदशहर, अलीगढ़, कासगंज, एटा, मैनपुरी, बिजनौर, अमरोहा, मुरादाबाद, रामपुर, बरेली, पीलीभीत, शाहजहांपुर, संभल और बदायूं में बारिश और तेज हवाओं का अलर्ट है।
14 मई: पूर्वी और पश्चिमी यूपी में कई जगहों पर बारिश हो सकती है। बिजली गिरने और 30 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलने की संभावना है।
15 मई: पूरे प्रदेश में तेज धूप रहेगी। आसमान साफ रहेगा और तापमान 45 डिग्री तक पहुंच सकता है।
16 मई: आसमान पूरी तरह साफ रहेगा। तेज धूप से गर्मी और बढ़ेगी। रात में भी गर्मी का एहसास होगा।
17 मई: मौसम पूरी तरह सूखा रहेगा। कहीं भी आंधी या बारिश का अलर्ट नहीं है।
एक मौसम एजेंसी ने इस साल के मानसून का अनुमान जारी किया है। इसके मुताबिक, पूरे देश में मानसून की बारिश सामान्य से 6 प्रतिशत कम हो सकती है। जून से सितंबर तक का सामान्य औसत 868.6 मिलीमीटर है, लेकिन इस बार केवल 94 प्रतिशत बारिश होने की उम्मीद है। जून में बारिश सामान्य रहेगी, लेकिन जुलाई से बारिश कम होने लगेगी। अगस्त और सितंबर में मानसून सबसे कमजोर रहने के संकेत हैं। किसानों को इस कमी का असर फसलों पर पड़ सकता है।