लखनऊ

UP Politics: आखिर क्यों उपचुनाव में हो रही देरी? सबसे ज्यादा इस सीट को लेकर चर्चा; 3 सीटों पर सस्पेंस बरकरार

UP Politics: यूपी में उपचुनाव को लेकर सस्पेंस बना हुआ है। सबसे ज्यादा एक सीट को लेकर चर्चा हो रही है। उपचुनाव में देरी की वजह क्या है?

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May 18, 2026
यूपी में होने वाले उपचुनाव में क्यों हो रही देरी? फोटो सोर्स-Ai

UP Politics: उत्तर प्रदेश में 3 विधानसभा सीटों पर होने वाले उपचुनाव को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई है। मऊ की घोसी, सोनभद्र की दुद्धी और बरेली की फरीदपुर सीट लंबे समय से खाली हैं, लेकिन चुनाव आयोग ने अब तक उपचुनाव की तारीखों का ऐलान नहीं किया है। खासतौर पर घोसी सीट को लेकर राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है, क्योंकि इस सीट को रिक्त हुए अगले सप्ताह 6 महीने पूरे होने वाले हैं।

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घोसी सीट पर सबसे ज्यादा नजरें

तीनों सीटों में सबसे ज्यादा चर्चा मऊ जिले की घोसी विधानसभा सीट को लेकर हो रही है। समाजवादी पार्टी के विधायक सुधाकर सिंह का 20 नवंबर 2025 को निधन हो गया था। इसके बाद विधानसभा सचिवालय ने सीट को रिक्त घोषित कर इसकी सूचना चुनाव आयोग को भेज दी थी। नियमों के मुताबिक किसी भी खाली विधानसभा सीट पर छह महीने के भीतर उपचुनाव कराया जाना जरूरी माना जाता है। ऐसे में घोसी सीट पर अब तक चुनाव कार्यक्रम घोषित न होने से सवाल खड़े होने लगे हैं।

फरीदपुर और दुद्धी सीट भी हैं खाली

बरेली की फरीदपुर सीट भाजपा विधायक प्रोफेसर श्याम बिहारी लाल के निधन के बाद जनवरी 2026 में खाली हुई थी। वहीं सोनभद्र की दुद्धी सीट समाजवादी पार्टी विधायक विजय सिंह के निधन के बाद रिक्त हुई थी। दोनों सीटों की जानकारी भी जनवरी में ही चुनाव आयोग को भेज दी गई थी।

हालांकि इन दोनों सीटों को खाली हुए अभी करीब चार महीने ही हुए हैं, लेकिन घोसी सीट की छह महीने की समयसीमा पूरी होने के करीब पहुंचने से राजनीतिक चर्चाएं और तेज हो गई हैं।

चुनाव आयोग की चुप्पी पर उठ रहे सवाल

राजनीतिक दलों और स्थानीय नेताओं के बीच यह सवाल लगातार उठ रहा है कि आखिर चुनाव आयोग इन सीटों पर उपचुनाव कराने में देरी क्यों कर रहा है। खासकर तब, जब अन्य राज्यों में खाली हुई सीटों पर उपचुनाव पहले ही कराए जा चुके हैं। चुनाव कार्यक्रम घोषित ना होने और आयोग की ओर से कोई स्पष्ट जानकारी ना दिए जाने से संशय और गहरा गया है।

वोटर लिस्ट रिवीजन को माना जा रहा वजह

सूत्रों के मुताबिक, उपचुनावमें देरी की सबसे बड़ी वजह मतदाता सूची का स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) माना जा रहा है। प्रदेश में अक्टूबर के आखिर में शुरू हुई यह प्रक्रिया दो बार बढ़ाई गई थी। चुनाव आयोग ने अंतिम मतदाता सूची 10 अप्रैल को प्रकाशित कर दी थी। हालांकि सूची जारी हुए एक महीने से ज्यादा समय बीत चुका है, लेकिन उपचुनाव को लेकर अब तक कोई आधिकारिक हलचल नहीं दिखाई दी है।

कानून में क्या है प्रावधान?

उपचुनाव को लेकर जनप्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 150 और 151A में प्रावधान दिए गए हैं। धारा 150 के मुताबिक यदि किसी विधानसभा सीट पर रिक्ति होती है तो चुनाव आयोग अधिसूचना जारी कर चुनाव प्रक्रिया पूरी कराता है। वहीं धारा 151A के अनुसार खाली सीट को भरने के लिए छह महीने के भीतर उपचुनाव कराया जाना चाहिए। हालांकि कानून में कुछ अपवाद भी हैं। यदि विधानसभा का शेष कार्यकाल एक वर्ष से कम बचा हो या केंद्र सरकार से परामर्श के बाद आयोग को लगे कि चुनाव कराना संभव नहीं है, तो उपचुनाव टाले जा सकते हैं।

यूपी विधानसभा का अभी लंबा कार्यकाल बाकी

उत्तर प्रदेश विधानसभा की पहली बैठक 23 मई 2022 को हुई थी। इस आधार पर मौजूदा विधानसभा का कार्यकाल 22 मई 2027 तक माना जाएगा। यानी विधानसभा का कार्यकाल समाप्त होने में अभी एक साल से अधिक समय बाकी है। ऐसे में नियमों के अनुसार तीनों सीटों पर उपचुनाव कराना आवश्यक माना जा रहा है। खासकर घोसी सीट पर छह महीने की समयसीमा पूरी होने के करीब पहुंचने से राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में हलचल तेज हो गई है।

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