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Lucknow News: दोनों पैर गंवाए, लेकिन नहीं हारे सदानंदन मास्टर, अब हजारों छात्रों को देंगे सफलता और संघर्ष का मंत्र

C Sadanandan Master Inspirational Story: दोनों पैर गंवाने के बावजूद शिक्षा और सामाजिक सेवा का सफर जारी रखने वाले राज्यसभा सदस्य सी. सदानंदन मास्टर 31 जुलाई को डॉ. शकुन्तला मिश्रा राष्ट्रीय पुनर्वास विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह के मुख्य अतिथि हों  
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लखनऊ

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Ritesh Singh

Jul 04, 2026

संघर्ष और शिक्षा की मिसाल बने सदानंदन मास्टर विद्यार्थियों को देंगे प्रेरणा का संदेश   (फोटो सोर्स : भाषा संवाद WhatsApp News Group)

संघर्ष और शिक्षा की मिसाल बने सदानंदन मास्टर विद्यार्थियों को देंगे प्रेरणा का संदेश   (फोटो सोर्स : भाषा संवाद WhatsApp News Group)

Rajya Sabha MP C. Sadanandan Master: जीवन में कठिनाइयां चाहे कितनी भी बड़ी क्यों न हों, यदि हौसला बुलंद हो तो हर चुनौती को अवसर में बदला जा सकता है। इस बात का जीवंत उदाहरण हैं राज्यसभा सदस्य सी. सदानंदन मास्टर, जिन्होंने एक जानलेवा हमले में अपने दोनों पैर गंवा दिए, लेकिन जीवन के प्रति उनका साहस और शिक्षा के प्रति समर्पण कभी कम नहीं हुआ।

अब यही प्रेरणादायी व्यक्तित्व 31 जुलाई को आयोजित होने वाले लखनऊ डॉ. शकुन्तला मिश्रा राष्ट्रीय पुनर्वास विश्वविद्यालय के 13वें दीक्षांत समारोह के मुख्य अतिथि होंगे। विश्वविद्यालय प्रशासन का मानना है कि उनका जीवन संघर्ष, आत्मविश्वास और सकारात्मक सोच का ऐसा संदेश देता है, जो विशेष रूप से युवाओं और दिव्यांग विद्यार्थियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगा।

राज्यपाल की मंजूरी के बाद हुआ नाम तय

विश्वविद्यालय के कुलपति आचार्य संजय सिंह ने बताया कि दीक्षांत समारोह के मुख्य अतिथि के लिए विश्वविद्यालय की ओर से तीन नाम राजभवन भेजे गए थे। इन नामों पर विचार करने के बाद उत्तर प्रदेश की राज्यपाल एवं विश्वविद्यालय की कुलाध्यक्ष श्रीमती आनंदीबेन पटेल ने राज्यसभा सदस्य सी. सदानंदन मास्टर के नाम को अंतिम स्वीकृति प्रदान की। इसके बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने तैयारियां तेज कर दी हैं।

उन्होंने बताया कि 13वां दीक्षांत समारोह 31 जुलाई को विश्वविद्यालय परिसर स्थित अटल प्रेक्षागृह में अपराह्न तीन बजे आयोजित होगा। समारोह में विभिन्न संकायों के विद्यार्थियों को उपाधियां प्रदान की जाएंगी और उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले छात्र-छात्राओं को स्वर्ण पदक देकर सम्मानित किया जाएगा।

संघर्ष से सफलता तक की प्रेरक यात्रा

विश्वविद्यालय के प्रवक्ता प्रो. यशवंत वीरोदय ने बताया कि सी. सदानंदन मास्टर का जीवन केवल व्यक्तिगत संघर्ष की कहानी नहीं, बल्कि साहस, आत्मविश्वास और सामाजिक प्रतिबद्धता का प्रेरणादायी उदाहरण है। केरल के कन्नूर जिले के निवासी सदानंदन मास्टर ने अपने करियर की शुरुआत एक प्राथमिक विद्यालय के शिक्षक के रूप में की थी। बाद में उन्होंने सामाजिक विज्ञान के शिक्षक के रूप में हजारों विद्यार्थियों का मार्गदर्शन किया। शिक्षण कार्य के दौरान उनकी पहचान एक अनुशासित, संवेदनशील और समाज के प्रति समर्पित शिक्षक के रूप में बनी। शिक्षा को सामाजिक परिवर्तन का सबसे प्रभावी माध्यम मानने वाले सदानंदन मास्टर हमेशा विद्यार्थियों को केवल पाठ्यक्रम तक सीमित न रहकर जीवन मूल्यों को अपनाने की प्रेरणा देते रहे।

1994 का हमला जिसने बदल दी जिंदगी

वर्ष 1994 में उनके जीवन ने अचानक ऐसा मोड़ लिया जिसने पूरे देश को झकझोर दिया। उन पर एक जानलेवा हमला हुआ, जिसमें उन्हें गंभीर चोटें आईं और डॉक्टरों को उनकी जान बचाने के लिए दोनों पैर काटने पड़े। यह किसी भी व्यक्ति के लिए जीवन की सबसे बड़ी त्रासदी हो सकती थी, लेकिन सदानंदन मास्टर ने इसे अपनी कमजोरी बनने नहीं दिया।

लंबे इलाज और कठिन पुनर्वास प्रक्रिया के बाद उन्होंने कृत्रिम पैरों की सहायता से फिर से खड़ा होना सीखा। इतना ही नहीं, उन्होंने दोबारा विद्यालय जाकर बच्चों को पढ़ाना शुरू किया। यह केवल एक शिक्षक की वापसी नहीं थी, बल्कि यह संदेश था कि शारीरिक सीमाएं किसी व्यक्ति के सपनों और संकल्प को रोक नहीं सकतीं।

शिक्षा और सेवा को बनाया जीवन का उद्देश्य

हमले के बाद भी सदानंदन मास्टर ने शिक्षा और समाज सेवा के अपने मिशन को नहीं छोड़ा। उन्होंने दिव्यांगजनों के अधिकारों, शिक्षा और सामाजिक समावेशन के लिए लगातार काम किया। समाज में सकारात्मक बदलाव लाने की उनकी सोच और शिक्षा के क्षेत्र में योगदान ने उन्हें देशभर में सम्मान दिलाया। उनकी कहानी लाखों युवाओं और दिव्यांगजनों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनी। कई सामाजिक और शैक्षणिक मंचों पर उन्हें आमंत्रित किया गया, जहां उन्होंने अपने अनुभव साझा करते हुए लोगों को विपरीत परिस्थितियों में भी हार न मानने का संदेश दिया।

राज्यसभा तक का सफर

शिक्षा और सामाजिक क्षेत्र में उनके उल्लेखनीय योगदान को देखते हुए वर्ष 2025 में भारत के राष्ट्रपति ने उन्हें राज्यसभा के लिए मनोनीत किया। यह सम्मान केवल उनके व्यक्तिगत संघर्ष का नहीं, बल्कि शिक्षा, सेवा और समाज के प्रति उनके समर्पण का भी सम्मान माना गया। राज्यसभा सदस्य बनने के बाद भी उन्होंने शिक्षा, दिव्यांग अधिकारों और सामाजिक न्याय से जुड़े मुद्दों को प्राथमिकता दी। वे लगातार इस बात पर जोर देते रहे हैं कि समाज तभी आगे बढ़ सकता है, जब हर व्यक्ति को समान अवसर और सम्मान मिले।

विद्यार्थियों के लिए प्रेरणा बनेगा दीक्षांत संबोधन

विश्वविद्यालय प्रशासन का मानना है कि इस वर्ष का दीक्षांत समारोह केवल डिग्री वितरण का कार्यक्रम नहीं होगा, बल्कि विद्यार्थियों के लिए जीवन की नई दिशा तय करने वाला अवसर भी बनेगा। सी. सदानंदन मास्टर का संबोधन उन छात्रों के लिए विशेष रूप से प्रेरणादायी होगा, जो जीवन में चुनौतियों का सामना कर रहे हैं। दीक्षांत समारोह में स्नातक, स्नातकोत्तर और शोध स्तर के विद्यार्थियों को उनकी उपाधियां प्रदान की जाएंगी। साथ ही विभिन्न संकायों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले मेधावी विद्यार्थियों को स्वर्ण पदक देकर सम्मानित किया जाएगा।

कुलपति ने बताया प्रेरणा का प्रतीक

कुलपति आचार्य संजय सिंह ने कहा कि सी. सदानंदन मास्टर का व्यक्तित्व संघर्ष, साहस और शिक्षा के प्रति अटूट समर्पण का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि कठिन परिस्थितियों में भी जिस तरह उन्होंने हार नहीं मानी और दोबारा समाज व शिक्षा की मुख्यधारा में लौटकर सेवा की, वह हर विद्यार्थी के लिए सीख है।

कुलपति ने विश्वास जताया कि उनका दीक्षांत भाषण विद्यार्थियों को केवल डिग्री प्राप्त करने की खुशी ही नहीं देगा, बल्कि उन्हें जीवन में चुनौतियों का सामना करने का आत्मविश्वास भी प्रदान करेगा। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय हमेशा ऐसे व्यक्तित्वों को विद्यार्थियों के सामने लाने का प्रयास करता है, जिनके जीवन से युवा प्रेरणा ले सकें।

तैयारियों को अंतिम रूप देने में जुटा विश्वविद्यालय

विश्वविद्यालय के कुलसचिव रोहित सिंह ने बताया कि दीक्षांत समारोह की तैयारियां तेजी से चल रही हैं। जल्द ही समारोह का विस्तृत कार्यक्रम जारी किया जाएगा। परिसर की सजावट, सुरक्षा व्यवस्था, अतिथियों के स्वागत और विद्यार्थियों की सुविधाओं को लेकर सभी आवश्यक व्यवस्थाएं की जा रही हैं। उन्होंने बताया कि इस समारोह में बड़ी संख्या में विद्यार्थी, अभिभावक, शिक्षाविद, प्रशासनिक अधिकारी और गणमान्य नागरिक शामिल होंगे। विश्वविद्यालय का प्रयास है कि यह दीक्षांत समारोह विद्यार्थियों के लिए यादगार और प्रेरणादायी अनुभव बने।