
Heat wave Alert : पिछले कुछ दिनों से पश्चिमी विक्षोभ और स्थानीय मौसमी गतिविधियों के कारण उत्तर प्रदेश सहित उत्तर भारत के कई हिस्सों में लोगों को गर्मी से थोड़ी राहत मिली थी। कहीं हल्की बारिश हुई तो कहीं बादलों की आवाजाही के चलते तापमान में गिरावट दर्ज की गई। हालांकि, अब यह राहत ज्यादा दिनों तक रहने वाली नहीं है। भारतीय मौसम विभाग (आईएमडी) के अनुसार पश्चिमी विक्षोभ का प्रभाव लगभग समाप्त हो चुका है और आने वाले दिनों में प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में एक बार फिर भीषण गर्मी का दौर शुरू होने जा रहा है।
मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि अगले 24 घंटों में तापमान में करीब 5 डिग्री सेल्सियस तक की बढ़ोतरी हो सकती है और कई जिलों में अधिकतम तापमान 47 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच सकता है। मौसम वैज्ञानिक अतुल कुमार सिंह का कहना है कि फिलहाल किसी बड़े मौसमी सिस्टम के सक्रिय होने की संभावना नहीं है। ऐसे में बारिश की उम्मीद बेहद कम है। हालांकि कुछ स्थानों पर स्थानीय मौसमी परिस्थितियों के कारण हल्की बारिश या बूंदाबांदी हो सकती है, लेकिन इससे व्यापक स्तर पर गर्मी से राहत मिलने की संभावना नहीं है।
पिछले सप्ताह पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव के चलते कई इलाकों में तापमान सामान्य से नीचे पहुंच गया था। बादलों और हवाओं के कारण लोगों को चिलचिलाती गर्मी से कुछ राहत महसूस हुई थी। लेकिन अब मौसम विभाग का कहना है कि जैसे-जैसे पश्चिमी विक्षोभ का प्रभाव समाप्त हो रहा है, वैसे-वैसे सूर्य की तीखी किरणें और गर्म हवाएं अपना असर दिखाने लगेंगी। विशेषज्ञों के अनुसार अगले एक-दो दिनों में तापमान तेजी से बढ़ेगा। दिन के समय तेज धूप और शुष्क हवाओं के कारण लोगों को अधिक परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। दोपहर के समय घर से बाहर निकलना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
मौसम विभाग ने 9 जून से प्रदेश के कई जिलों में हीटवेव यानी लू चलने की संभावना जताई है। यह स्थिति लगातार तीन दिनों तक बनी रह सकती है। इस दौरान पश्चिमी और मध्य उत्तर प्रदेश के कई जिलों में अत्यधिक गर्म हवाएं चलेंगी। लू की स्थिति तब मानी जाती है जब तापमान सामान्य से काफी अधिक हो और गर्म हवाएं लोगों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव डालने लगें। मौसम विभाग के अनुसार बुजुर्गों, बच्चों और पहले से बीमार लोगों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत होगी। दोपहर के समय अनावश्यक रूप से बाहर निकलने से बचने की सलाह दी गई है।
आईएमडी के पूर्वानुमान के अनुसार अगले 24 घंटे में तापमान में लगभग 5 डिग्री सेल्सियस की बढ़ोतरी हो सकती है। कई जिलों में अधिकतम तापमान 45 से 47 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचने की संभावना है।विशेषज्ञों का कहना है कि इस स्तर का तापमान सामान्य जनजीवन को प्रभावित कर सकता है। सड़कें दोपहर के समय लगभग सूनी दिखाई दे सकती हैं और बिजली की मांग में भी अचानक बढ़ोतरी हो सकती है। गर्मी बढ़ने के साथ ही पेयजल की खपत भी बढ़ेगी, जिससे जलापूर्ति व्यवस्था पर दबाव पड़ सकता है।
बढ़ती गर्मी को देखते हुए (स्वास्थ्य विशेषज्ञ) डॉक्टर राहुल सक्सेना ने लोगों को सावधानी बरतने की सलाह दी है। उनका कहना है कि लू लगने की स्थिति में शरीर का तापमान तेजी से बढ़ सकता है, जिससे चक्कर आना, कमजोरी, सिरदर्द और बेहोशी जैसी समस्याएं हो सकती हैं। डॉक्टरों ने पर्याप्त मात्रा में पानी पीने, हल्के और सूती कपड़े पहनने तथा धूप में निकलते समय सिर को ढकने की सलाह दी है। बच्चों और बुजुर्गों को विशेष रूप से दोपहर के समय घर के अंदर रहने की सलाह दी जा रही है।
भीषण गर्मी और लू के बीच मौसम विभाग ने राहत की भी संभावना जताई है। आईएमडी के अनुसार 11 जून के बाद प्रदेश में प्री-मानसून गतिविधियां शुरू हो सकती हैं। इसके चलते कई जिलों में बादल छाने, तेज हवाएं चलने और बारिश होने की संभावना है। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि प्री-मानसून बारिश से तापमान में गिरावट आ सकती है और लोगों को गर्मी से राहत मिल सकती है। हालांकि मानसून के पूरी तरह सक्रिय होने में अभी कुछ समय लग सकता है।
उत्तर प्रदेश सहित पूरे उत्तर भारत में अब लोगों की निगाहें मानसून पर टिकी हुई हैं। हर साल जून के दूसरे पखवाड़े में मानसून की सक्रियता बढ़ने लगती है। इस बार भी किसानों से लेकर आम नागरिकों तक सभी मानसून के आगमन का इंतजार कर रहे हैं। मौसम विभाग का मानना है कि यदि प्री-मानसून बारिश समय पर होती है तो इससे न केवल तापमान में कमी आएगी बल्कि खरीफ फसलों की तैयारी कर रहे किसानों को भी राहत मिलेगी।
मौसम विभाग का ताजा पूर्वानुमान संकेत दे रहा है कि उत्तर प्रदेश में अगले कुछ दिन बेहद चुनौतीपूर्ण रहने वाले हैं। पश्चिमी विक्षोभ का असर समाप्त होने के बाद गर्मी एक बार फिर अपने चरम पर पहुंच सकती है। 9 जून से शुरू होने वाली संभावित लू और 47 डिग्री तक पहुंचने वाला तापमान लोगों की परीक्षा ले सकता है।