उत्तर प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी की सरकार बनने के बाद से ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भ्रष्ट अफसरों पर शिकंजा कस रहे हैं
लखनऊ. उत्तर प्रदेश में बीजेपी की सरकार बनने के बाद से ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भ्रष्ट अफसरों पर शिकंजा कस रहे हैं। करीब ढाई साल के कार्यकाल में योगी सरकार ने अलग-अलग विभागों के 200 से ज्यादा अफसरों और कर्मचारियों को जबरन रिटायर किया है। वहीं, अब तक 400 से ज्यादा अफसर-कर्मचारी दंडित किये जा चुके हैं। काम में लापरवाही और भ्रष्टाचार की शिकायत के बाद योगी सरकार ने शुक्रवार को प्रांतीय पुलिस सेवा (पीपीएस) के सात अफसरों को जबरन रिटायर कर दिया। जुलाई में जारी सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, सरकार ने बीते दो वर्षों में 600 से ज्यादा सरकारी अफसरों और कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की है।
सात पीपीएस अफसरों के खिलाफ कार्रवाई के बाद योगी आदित्यनाथ ऑफिस के आधिकारिक टि्वटर हैंडल से एक के बाद एक कई ट्वीट किए गए, जिनमें साफ किया गया है कि सरकार भ्रष्टाचार बर्दाश्त नहीं करेगी। पहले ट्वीट में लिखा है, यह 'योगी राज' है..। इसमें बाकी सरकारों की तरह 'साहब की मर्जी ही कानून है' नहीं चलेगा। यहां कानून का ऐसा राज है जिसमें किसी भी तरह के भ्रष्टाचार की कोई गुंजाइश नहीं है। भ्रष्टाचारी चाहे जितने रसूख वाले हों, बचेंगे नहीं।
यूपी पुलिस के तीन आयाम
योगी आदित्यनाथ ऑफिस के ट्विटर पर यूपी पुलिस के सत्यनिष्ठा, कर्मठता, और दक्षता समेत तीन आयाम बताये गये हैं। लिखा है कि इन पैमानों पर खरा न उतरने वाले सात अधिकारियों को आज अनिवार्य सेवानिवृत्ति दे दी गयी। साथ ही लिखा है कि मुख्यमंत्री का स्पष्ट संकेत है कि कर्तव्यपाल में लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।