लखनऊ

UP Farmers: मायावती-अखिलेश से तीन गुना ज्यादा खर्च! किसानों को लेकर कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही का बड़ा बयान

UP Farmers: उत्तर प्रदेश के कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने दावा किया कि योगी सरकार ने किसानों पर ₹69,163 करोड़ खर्च किए। आपदा प्रभावित नौ लाख से अधिक किसानों को राहत मिली।
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Oct 12, 2026
नौ लाख से अधिक किसानों को फसल क्षति की राहत राशि, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सौंपी सहायता (फोटो सोर्स :file photo, Ritesh Singh )
नौ लाख से अधिक किसानों को फसल क्षति की राहत राशि, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सौंपी सहायता (फोटो सोर्स :file photo, Ritesh Singh )

UP farmers relief funds: उत्तर प्रदेश में बाढ़, अतिवृष्टि, ओलावृष्टि और चक्रवात जैसी प्राकृतिक आपदाओं से फसलों को हुए नुकसान के बाद नौ लाख से अधिक किसानों को राहत राशि दी गई है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गोरखपुर में आयोजित कार्यक्रम के दौरान प्रभावित किसानों को सहायता राशि सौंपी। इस मौके पर प्रदेश के कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने किसानों के लिए सरकार के खर्च और कृषि क्षेत्र में किए गए कार्यों का ब्यौरा प्रस्तुत किया। उन्होंने दावा किया कि योगी सरकार ने किसानों पर पिछली मायावती और अखिलेश यादव सरकारों की तुलना में तीन गुना से अधिक राशि खर्च की है।

शाही ने कहा कि प्रदेश सरकार किसानों को प्राकृतिक आपदाओं से राहत देने के साथ-साथ खेती के लिए जरूरी संसाधन उपलब्ध कराने पर भी जोर दे रही है। उनके मुताबिक, किसानों को समय पर बीज, बिजली और पर्याप्त उर्वरक उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई है। कृषि मंत्री ने पिछली सरकारों के कार्यकाल का उल्लेख करते हुए कहा कि किसानों के हित में किए गए प्रयासों और खर्च के मामले में मौजूदा सरकार ने अलग स्तर पर काम किया है।

कर्जमाफी से लेकर राहत राशि तक, खर्च के आंकड़े गिनाए

कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने कहा कि वर्ष 2017 में सरकार बनने के बाद पहली कैबिनेट बैठक में 86 लाख किसानों के 36 हजार करोड़ रुपये के कर्ज माफ करने का निर्णय लिया गया था। उन्होंने इसे किसानों को आर्थिक राहत देने की दिशा में उठाया गया अहम कदम बताया।

शाही के अनुसार, मायावती सरकार के कार्यकाल में किसानों पर 10,207 करोड़ रुपये खर्च किए गए थे, जबकि अखिलेश यादव सरकार के दौरान यह राशि करीब 12 हजार करोड़ रुपये रही। इसके मुकाबले योगी सरकार अब तक किसानों पर 69,163 करोड़ रुपये खर्च कर चुकी है। कृषि मंत्री ने इन आंकड़ों के आधार पर दावा किया कि मौजूदा सरकार ने किसानों के लिए पिछली सरकारों की तुलना में तीन गुना से अधिक धनराशि खर्च की है। उन्होंने कहा कि सरकार की प्राथमिकता किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत करने, खेती की लागत से जुड़ी समस्याओं को कम करने और प्राकृतिक आपदाओं के समय उन्हें राहत पहुंचाने की है।

आपदा राहत के वितरण में तेजी का दावा

प्राकृतिक आपदाओं से फसलों को होने वाले नुकसान का जिक्र करते हुए शाही ने पिछली सरकारों के समय राहत राशि के वितरण पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि पहले केंद्र सरकार से आपदा राहत के लिए मिले 3,200 करोड़ रुपये में से केवल 800 करोड़ रुपये किसानों को वितरित किए गए थे।

कृषि मंत्री के मुताबिक, योगी सरकार बनने के बाद शेष राशि में से 1,200 करोड़ रुपये सात दिनों के भीतर किसानों के खातों में भेजे गए। उन्होंने कहा कि मौजूदा सरकार आपदा प्रभावित किसानों तक सहायता पहुंचाने और राहत वितरण की प्रक्रिया में तेजी लाने पर जोर दे रही है। हाल में बाढ़, अतिवृष्टि, ओलावृष्टि और चक्रवात से प्रभावित किसानों को दी गई सहायता को भी इसी प्रयास का हिस्सा बताया गया। मुख्यमंत्री की ओर से राहत राशि सौंपे जाने के कार्यक्रम का उद्देश्य प्रभावित किसानों को नुकसान के बाद आर्थिक सहारा उपलब्ध कराना रहा।

रिकॉर्ड खाद्यान्न उत्पादन का भी किया उल्लेख

कृषि मंत्री ने प्रदेश में कृषि उत्पादन का जिक्र करते हुए बताया कि पिछले वर्ष उत्तर प्रदेश में रिकॉर्ड 752 लाख मीट्रिक टन खाद्यान्न उत्पादन हुआ। उन्होंने कहा कि खेती के लिए बीज, बिजली और उर्वरक की उपलब्धता सुनिश्चित करने की दिशा में सरकार काम कर रही है। शाही के मुताबिक, कृषि उत्पादन बढ़ाने के लिए किसानों को समय पर जरूरी संसाधन मिलना अहम है। खेती की बुवाई से लेकर फसल तैयार होने तक किसानों को कई तरह की चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। ऐसे में कृषि सामग्री की उपलब्धता और विपरीत परिस्थितियों में आर्थिक सहायता किसानों के लिए महत्वपूर्ण होती है।

गन्ना किसानों के भुगतान पर भी रखे आंकड़े

गन्ना किसानों का मुद्दा उठाते हुए शाही ने कहा कि सरकार ने गन्ने का मूल्य बढ़ाकर 400 रुपये प्रति क्विंटल किया है। उन्होंने दावा किया कि पिछली सरकार ने पांच वर्षों में करीब 62 हजार करोड़ रुपये का गन्ना भुगतान किया था, जबकि योगी सरकार ने दस वर्षों में 3.25 लाख करोड़ रुपये का भुगतान किया है। कृषि मंत्री ने यह भी कहा कि प्रदेश की 105 चीनी मिलें 15 दिनों के भीतर भुगतान कर रही हैं। उनके अनुसार, गन्ना किसानों को समय पर भुगतान उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है। गन्ना भुगतान को लेकर प्रस्तुत आंकड़ों के जरिए उन्होंने किसानों की आय और कृषि क्षेत्र से जुड़े आर्थिक लेन-देन पर सरकार के रुख को रेखांकित किया।

फसल बीमा योजना से 6,125 करोड़ रुपये की क्षतिपूर्ति

प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत किसानों को मिली सहायता का विवरण देते हुए शाही ने बताया कि वित्त वर्ष 2017-18 से अब तक प्रदेश के किसानों को 6,125 करोड़ रुपये की क्षतिपूर्ति दी जा चुकी है। उन्होंने कहा कि यह योजना प्राकृतिक आपदाओं या अन्य बीमित जोखिमों से फसल को नुकसान होने की स्थिति में किसानों को आर्थिक सुरक्षा देने का माध्यम है।

कृषि मंत्री के अनुसार, वर्ष 2025-26 में आपदा से प्रभावित 7.31 लाख किसानों को इस योजना के माध्यम से 812.76 करोड़ रुपये दिए गए। उन्होंने यह भी बताया कि फसल बीमा कराने वाले किसानों की संख्या पिछले वर्ष के लगभग 18 लाख से बढ़कर इस वर्ष 23 से 24 लाख तक पहुंच गई है। शाही ने कहा कि मुख्यमंत्री ने फसल नुकसान के सर्वेक्षण और क्षतिपूर्ति वितरण में तेजी लाने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने जालौन का उल्लेख करते हुए बताया कि वहां भी प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत करीब पांच करोड़ रुपये किसानों को अंतरित किए जा रहे हैं।

किसानों तक राहत पहुंचाने पर सरकार का जोर

कृषि मंत्री ने कहा कि किसानों को प्राकृतिक आपदाओं से हुए नुकसान के बाद समय पर सहायता मिलना जरूरी है। उन्होंने पिछली सरकारों पर किसानों के लिए पर्याप्त प्रयास नहीं करने का आरोप लगाते हुए कहा कि यदि पहले किसानों के हित में प्रभावी कदम उठाए गए होते, तो उन्हें गरीबी और बदहाली का सामना कम करना पड़ता। सरकार की ओर से प्रस्तुत आंकड़ों में कर्जमाफी, आपदा राहत, फसल बीमा, गन्ना भुगतान और कृषि उत्पादन जैसे मुद्दों को प्रमुखता दी गई। इन दावों के बीच किसानों के लिए राहत योजनाओं का प्रभाव इस बात से भी आंका जाएगा कि सहायता कितनी तेजी से पात्र किसानों तक पहुंचती है और खेती की लागत, फसल के उचित मूल्य तथा नुकसान की भरपाई जैसी समस्याओं में उन्हें कितना लाभ मिलता है।