Yogi Government Launches FastPass System: नए साल पर योगी सरकार ने आम लोगों को बड़ी राहत दी है। अब मकान या दुकान का नक्शा पास कराने के लिए दफ्तरों के चक्कर नहीं लगाने होंगे। नए सॉफ्टवेयर आधारित फास्टपास सिस्टम से भूखंड स्वामी स्वयं ऑनलाइन आवेदन कर मिनटों में नक्शा स्वीकृत कर सकेंगे।
Yogi Government Fast Pass: नए साल की शुरुआत के साथ ही उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने आम नागरिकों, भूखंड स्वामियों और बिल्डरों को बड़ी राहत दी है। अब घर, दुकान या अन्य भवन का नक्शा पास कराने के लिए विकास प्राधिकरणों और नगर निगम कार्यालयों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। राज्य सरकार ने नए बिल्डिंग बायलॉज के तहत “फास्ट ट्रैक सिस्टम” और “फास्टपास” व्यवस्था लागू कर दी है, जिससे ऑनलाइन आवेदन करने पर चंद मिनटों में नक्शा स्वीकृत हो जाएगा। यह व्यवस्था पूरी तरह डिजिटल और सॉफ्टवेयर आधारित होगी, जिसमें मानवीय हस्तक्षेप न्यूनतम रहेगा। सरकार का दावा है कि इससे न केवल भ्रष्टाचार पर रोक लगेगी, बल्कि समय, धन और श्रम की भी बचत होगी।
नई व्यवस्था के तहत भूखंड या भवन स्वामी स्वयं ही ऑनलाइन पोर्टल पर आवेदन कर सकेंगे। आवेदन करते समय भूखंड का विवरण, क्षेत्रफल, उपयोग (आवासीय/व्यावसायिक), निर्माण का प्रकार और अन्य जरूरी जानकारियां दर्ज करनी होंगी। इसके बाद नया सॉफ्टवेयर स्वचालित रूप से नक्शे को बिल्डिंग बायलॉज के अनुरूप जांचेगा। यदि नक्शा तय मानकों पर खरा उतरता है तो बिना किसी अधिकारी की अनुमति के स्वतः स्वीकृति (Auto Approval) मिल जाएगी। स्वीकृति की पूरी प्रक्रिया कुछ ही मिनटों में पूरी हो जाएगी।
योगी सरकार ने फास्ट पास (Fast Pass) नाम से नई व्यवस्था शुरू की है। इसके तहत छोटे और मध्यम स्तर के निर्माण कार्यों जैसे आवासीय मकान, दुकान, छोटे कॉम्प्लेक्स के लिए नक्शा पास कराने की प्रक्रिया बेहद आसान कर दी गई है।
सरकारी अधिकारियों के अनुसार, जिन नक्शों में किसी प्रकार का विचलन नहीं होगा, वे तुरंत स्वीकृत कर दिए जाएंगे। इससे आम लोगों को वर्षों से चली आ रही देरी और परेशानी से निजात मिलेगी।
सरकार ने नए बिल्डिंग बायलॉज को ध्यान में रखते हुए इस प्रणाली को विकसित किया है। इसमें फ्लोर एरिया रेशियो (FAR), सेटबैक, ऊंचाई, पार्किंग, अग्नि सुरक्षा और भूमि उपयोग जैसे सभी मानकों को सॉफ्टवेयर में पहले से फीड किया गया है। इससे यह सुनिश्चित होगा कि कोई भी निर्माण नियमों के विरुद्ध न हो,अवैध निर्माण पर स्वतः रोक लगे,भविष्य में ध्वस्तीकरण और विवाद की नौबत न आए,भ्रष्टाचार और मनमानी पर लगेगी लगाम,अब तक नक्शा पास कराने की प्रक्रिया में लोगों को फाइलें जमा करनी पड़ती थीं। महीनों इंतजार करना पड़ता था और कई बार अनावश्यक दफ्तरों के चक्कर लगाने पड़ते थे। नई ऑनलाइन प्रणाली से मानवीय हस्तक्षेप लगभग समाप्त हो जाएगा, जिससे भ्रष्टाचार, दलाली और अफसरशाही पर प्रभावी अंकुश लगेगा। सरकार का मानना है कि इससे ईज ऑफ लिविंग (Ease of Living) और ईज ऑफ डूइंग बिजनेस (Ease of Doing Business) दोनों को बढ़ावा मिलेगा।
इस नई व्यवस्था का सबसे अधिक लाभ मध्यम वर्ग,निम्न आय वर्ग और छोटे भूखंड स्वामियों को मिलेगा, जो वर्षों से नक्शा पास कराने की जटिल प्रक्रिया से परेशान थे। अब उन्हें न तो आर्किटेक्ट के माध्यम से बार-बार संशोधन करवाने होंगे और न ही दफ्तरों में आवेदन की स्थिति पूछने जाना पड़ेगा।
यह नई प्रणाली विकास प्राधिकरणों,नगर निगमों,नगर पालिकाओं और औद्योगिक विकास प्राधिकरणों में चरणबद्ध तरीके से लागू की जा रही है। लखनऊ, नोएडा, गाजियाबाद, कानपुर, प्रयागराज, वाराणसी जैसे बड़े शहरों में इसे प्राथमिकता के आधार पर शुरू किया गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस फैसले से रियल एस्टेट सेक्टर को नई रफ्तार मिलेगी। निर्माण कार्य समय पर शुरू होंगे, जिससे रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। निवेशकों का भरोसा मजबूत होगा और आवासीय परियोजनाएं समय से पूरी होंगी
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि उनकी सरकार का लक्ष्य डिजिटल, पारदर्शी और जवाबदेह शासन देना है। नक्शा स्वीकृति की यह नई व्यवस्था उसी दिशा में एक ठोस कदम मानी जा रही है। सरकारी सूत्रों के अनुसार, आने वाले समय में कंप्लीशन सर्टिफिकेट,ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट और अन्य भवन संबंधी अनुमतियां भी पूरी तरह ऑनलाइन की जाएंगी। आम नागरिकों, आर्किटेक्ट्स और बिल्डरों ने सरकार के इस कदम का स्वागत किया है। लोगों का कहना है कि यदि यह व्यवस्था प्रभावी ढंग से लागू होती है तो यह शहरी प्रशासन में क्रांतिकारी बदलाव साबित होगी।