
Yogi Government: उत्तर प्रदेश सरकार ने राज्य में भूमि सर्किल रेट्स के पुनरीक्षण की प्रक्रिया तेज कर दी है, जिससे किसानों को उनकी जमीन का उचित मूल्य मिल सके। 1 जनवरी 2024 से अब तक 37 जिलों में यह प्रक्रिया पूरी हो चुकी है, जबकि लखनऊ, वाराणसी, गोरखपुर सहित अन्य जिलों में जल्द ही इसे शुरू किया जाएगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देशानुसार, जिन जिलों में वर्षों से सर्किल रेट का पुनरीक्षण नहीं हुआ है, वहां प्राथमिकता के आधार पर यह कार्य सुनिश्चित किया जा रहा है।
भूमि सर्किल रेट्स का पुनरीक्षण किसानों के लिए विशेष रूप से लाभकारी होता है। इससे भूमि अधिग्रहण के समय उन्हें उनकी जमीन का सही मूल्य प्राप्त होता है, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति में सुधार होता है। साथ ही, यह प्रक्रिया भूमि बाजार में पारदर्शिता लाने और सरकारी राजस्व में वृद्धि करने में सहायक होती है।
मुख्य सचिव की अध्यक्षता में हुई समीक्षा बैठक में यह निर्णय लिया गया कि जिन जिलों में सर्किल रेट्स का पुनरीक्षण वर्षों से लंबित है, वहां तेजी से यह कार्य पूरा किया जाएगा। इन जिलों में लखनऊ, वाराणसी, गोरखपुर, बागपत, इटावा, कन्नौज, हापुड़, बुलंदशहर, मेरठ, महाराजगंज, कुशीनगर, अयोध्या, अम्बेडकरनगर, एटा, कासगंज, मुजफ्फरनगर, बदायूं, झांसी, जालौन, ललितपुर, संत कबीरनगर, कौशाम्बी और प्रयागराज शामिल हैं। वहीं, शामली, सहारनपुर, मीरजापुर, अलीगढ़, बांदा, हमीरपुर, आगरा, सुल्तानपुर, अमेठी और गौतमबुद्धनगर में पुनरीक्षण प्रक्रिया जारी है।
सर्किल रेट्स के पुनरीक्षण से भूमि की खरीद-फरोख्त में पारदर्शिता बढ़ेगी और सरकारी राजस्व में वृद्धि होगी। साथ ही, यह प्रक्रिया किसानों और भूमि मालिकों के हितों की रक्षा करेगी, जिससे उन्हें उनकी संपत्ति का उचित मूल्य मिल सकेगा।
योगी सरकार उत्तर प्रदेश को उत्तम प्रदेश बनाने के लिए निरंतर प्रयासरत है। भूमि सर्किल रेट्स के पुनरीक्षण की यह पहल उसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जो राज्य के समग्र विकास में सहायक सिद्ध होगी।
उत्तर प्रदेश में भूमि सर्किल रेट्स के पुनरीक्षण की प्रक्रिया से न केवल किसानों को लाभ होगा, बल्कि यह राज्य के आर्थिक विकास में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। सरकार की यह पहल राज्य के समग्र विकास और पारदर्शिता की दिशा में एक सराहनीय कदम है।