
UP Assembly Election 2027: देश की राजधानी दिल्ली के जंतर मंतर पर चले छात्र आंदोलन के चलते 25 जुलाई, 2026 को धर्मेंद्र प्रधान का शिक्षा मंत्री के पद से इस्तीफा होने के बाद जगह-जगह युवा मुखर हो रहे हैं। झारखंड की राजधानी रांची में चल रहा उनका आंदोलन इन दिनों देश भर में चर्चा है। पेपर लीक के विरोध में कई दिनों से आंदोलनरत छात्र 10 अगस्त को विधान सभा परिसर तक पहुंच गए। हैदराबाद में छात्र दीक्षांत समारोह में मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्य कान्त को बुलाए जाने के खिलाफ लामबंद हो गए हैं। इसी बीच उत्तर प्रदेश में 10 अगस्त को कुछ युवाओं ने बाकायदा संगठन बना कर मैदान में उतरने की घोषणा कर दी है। 12 अगस्त से जस्टिस मोर्चा शिक्षा और रोजगार के सवाल पर राज्य भर में अपनी गतिविधियां शुरू करेगा और जरूरत पड़ी तो 2 अक्तूबर से आंदोलन की शुरुआत होगी।
उत्तर प्रदेश में विधान सभा चुनाव का माहौल बन रहा है। वैसे तो अगले साल मार्च में चुनाव होने हैं, लेकिन कहा जा रहा है कि समय से पहले भी कराए जा सकते हैं। चुनावी माहौल में युवाओं का ऐसे विषय पर आंदोलन के लिए तैयार होना, जो हर मतदाता से जुड़ा हो, राजनीतिक दलों के लिए चुनौती बढ़ाने वाला हो सकता है। ऐसे आंदोलन से ज्यादा मुश्किल सत्ताधारी दल (जो अभी भाजपा है) के लिए ही होगी।
अभी युवाओं की सत्ता में भागीदारी भले न हो, लेकिन वोटर के तौर पर वे शक्तिशाली बन रहे हैं। इस साल असम, तमिलनाडु, पुदुचेरी और पश्चिम बंगाल में हुए चुनावों में उन्होंने अपनी ताकत दिखाई है।
असम में 18-39 साल के मतदाताओं की संख्या 1.28 करोड़ से ज्यादा रही। पश्चिम बंगाल में 18-29 साल के 1.37 करोड़ वोटर थे। इनमें से 5.23 लाख वोटर पहली बार मतदाता सूची में शामिल हुए थे। तमिलनाडु में भी युवा वोटर्स की संख्या 1.04 करोड़ (करीब 19 प्रतिशत) थी। केरल में 96000 से ज्यादा नौजवान पहली बार मतदाता सूची में जुड़े थे, जबकि पुदुचेरी में करीब 2.1 लाख नौजवानों ने वोट डाले।
2022 के विधान सभा चुनाव के समय उत्तर प्रदेश में 18-19 साल के वोटर्स की संख्या करीब 20 लाख थी। ताजा एसआईआर के बाद इनकी संख्या 17,63,360 बताई गई है।
देश भर की बात करें तो 2024 के लोक सभा चुनाव से पहले आए आंकड़ों में 18-29 साल के मतदाताओं की संख्या 21.59 करोड़ से ज्यादा (करीब 23 प्रतिशत) बताई गई थी। 2024 के चुनाव आयोग के एटलस के मुताबिक उत्तर प्रदेश में भी हर पांचवा वोटर युवा (18-29 साल के बीच) है। देश के किस राज्य में इनका प्रतिशत कितना है, इसका अंदाज नीचे के टेबल से लगाया जा सकता है।
| राज्य / केंद्र शासित प्रदेश | मई 2024 में 18-29 साल के मतदाता (%) |
| दादरा और नगर हवेली तथा दमन और दीव (DNH and DDD) | 38.80 |
| मेघालय | 36.31 |
| अरुणाचल प्रदेश | 34.13 |
| मिजोरम | 31.19 |
| असम | 28.95 |
| झारखंड | 28.38 |
| जम्मू और कश्मीर | 27.89 |
| राजस्थान | 27.78 |
| मध्य प्रदेश | 27.16 |
| सिक्किम | 26.16 |
| छत्तीसगढ़ | 26.13 |
| लक्षद्वीप | 25.38 |
| लद्दाख | 25.19 |
| त्रिपुरा | 24.13 |
| पश्चिम बंगाल | 24.07 |
| मणिपुर | 23.74 |
| ओडिशा | 23.60 |
| गुजरात | 23.33 |
| तेलंगाना | 22.97 |
| बिहार | 22.80 |
| अंडमान और निकोबार द्वीप समूह | 22.54 |
| नागालैंड | 22.39 |
| चंडीगढ़ | 22.23 |
| हरियाणा | 22.20 |
| उत्तराखंड | 22.18 |
| हिमाचल प्रदेश | 21.91 |
| पुडुचेरी | 21.62 |
| पंजाब | 21.44 |
| उत्तर प्रदेश | 21.19 |
| कर्नाटक | 21.09 |
| आंध्र प्रदेश | 20.54 |
| महाराष्ट्र | 19.82 |
| गोवा | 19.60 |
| तमिलनाडु | 19.43 |
| दिल्ली (NCT of Delhi) | 15.89 |
| केरल | 15.04 |
| अखिल भारतीय (All India) | 22.70 |
2014 में केंद्र में जब पहली बार भाजपा सत्ता में आई थी, तो इसमें युवाओं का बहुत बड़ा रोल था। असोशिएशन फॉर डेमोक्रैटिक रिफॉर्म (एडीआर) के मुताबिक उस चुनाव में ऐसा पहली बार हुआ था कि 18-25 साल के करीब 70 फीसदी नौजवानों ने अपने मताधिकार का इस्तेमाल किया था। 2029 के आम चुनावों के वक्त संभवतः 18-32 साल के युवा (Gen Z) सबसे बड़ा वोट बैंक बन सकते हैं। यह ट्रेंड राज्यों में भी दिख सकता है। ऐसे में युवाओं का असंतोष राजनीतिक दलों, खास कर सत्ताधारी दलों के लिए बड़ा सरदर्द बन सकता है।
उत्तर प्रदेश में भाजपा और योगी आदित्य नाथ के लिए यह इसलिए भी चुनौती खड़ी कर सकता है, क्योंकि योगी तीसरी बार मुख्यमंत्री बनने के लिए मैदान में उतरेंगे। मतलब उन्हें सत्ता विरोधी लहर के साथ उतरना होगा। युवाओं का असंतोष इस लहर को और मजबूती दे सकता है। इस तथ्य से भी इंकार नहीं किया जा सकता कि 2027 में पहले की तरह 'मोदी लहर' मजबूती के साथ काम नहीं आ सकेगी। इसलिए युवाओं को साधना जरूरी है।