
रांची एसपी पारस राणा (फोटो- ANI)
Jharkhand Student Protest: रांची में झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) की परीक्षाओं में सुधार की मांग को लेकर छात्रों का विरोध प्रदर्शन जारी है। सोमवार को प्रदर्शनकारियों ने विधानसभा का घेराव करने के लिए मार्च निकाला, जिसके बाद हजारों परीक्षार्थियों और पुलिस के बीच हिंसक झड़प हुई।
रांची सिटी SP पारस राणा के अनुसार, जब उपद्रवियों ने पत्थरबाजी की और बैरिकेड्स तोड़ दिए, तो स्थिति को काबू में करने के लिए पुलिस को वॉटर कैनन, आंसू गैस के गोले और लाठीचार्ज का सहारा लेना पड़ा। राणा ने बताया कि हालांकि पुलिस ने शुरू से ही बहुत संयम बरता, लेकिन भीड़ में मौजूद कुछ लोगों के कानून हाथ में लेने और पुलिसकर्मियों की जान खतरे में डालने के बाद हल्का बल प्रयोग करना जरूरी हो गया।
लाठीचार्ज के बारे में रांची सिटी SP पारस राणा ने बताया कि जब प्रदर्शनकारियों ने पुलिस बैरिकेड्स तोड़े, तो अफरातफरी मच गई। बैरिकेड्स टूटने के बाद, सुरक्षा में तैनात तीन पुलिसकर्मी गिर गए और गुस्साई भीड़ के बीच फंस गए, जिससे उनके कुचले जाने का खतरा पैदा हो गया। अगर उस वक्त पुलिस ने बल का इस्तेमाल न किया होता, तो उन पुलिसकर्मियों के साथ कोई हादसा हो सकता था। अपने साथियों की जान बचाने और उन्हें भीड़ से सुरक्षित बाहर निकालने के लिए हल्का लाठीचार्ज करना जरूरी हो गया था।
सिटी SP ने कहा कि पुलिस प्रशासन इस घटना के लिए सिस्टम के खिलाफ विरोध कर रहे आम उम्मीदवारों को ज़िम्मेदार नहीं मानता। बल्कि, भीड़ में मौजूद कुछ असामाजिक तत्वों ने जान-बूझकर हालात को भड़काया। पारस राणा ने आगे बताया कि प्रदर्शन कर रहे छात्रों ने शुरू में शांतिपूर्ण विरोध का भरोसा दिलाया था। असल में, हिस्सा लेने वाले लगभग 80 से 90 प्रतिशत उम्मीदवार शांति से अपनी मांगें रख रहे थे। हालांकि, 15 से 20 प्रतिशत उपद्रवियों ने हंगामा किया।
पारस राणा ने बताया कि उपद्रवियों ने पुलिस टीम पर बार-बार पत्थर फेंके। पत्थरबाज़ी में तीन-चार पुलिसकर्मी घायल हो गए, उनमें से दो के सिर पर चोटें आईं, जिनके लिए टांके लगाने पड़े। SP ने बताया कि जिन इलाकों में पुलिस का पहुंचना मुश्किल था, वहां पत्थरबाज़ों को पीछे धकेलने के लिए डमी शेल और स्मोक ग्रेनेड का इस्तेमाल किया गया।
इस बीच, घंटों से विधानसभा के बाहर डटे उम्मीदवारों का कहना था कि वे न तो अराजकतावादी हैं और न ही कानून तोड़ने वाले उपद्रवी। प्रदर्शनकारी छात्रों का आरोप था कि वे सुबह से ही बिना कुछ खाए-पिए शांति से अपनी मांगें रख रहे थे, लेकिन जब प्रशासन ने उनकी बात पर ध्यान नहीं दिया, तो उन्हें आगे बढ़ने के लिए मजबूर होना पड़ा।
एक प्रदर्शनकारी उम्मीदवार ने कहा, "हम पुलिस से लड़ने आए दंगाई नहीं हैं, हम छात्र हैं। हम सुबह से ही बिना कुछ खाए-पिए यहां खड़े थे। अगर सरकार का कोई प्रतिनिधि आकर हमें भरोसा दिलाता, तो हमें बैरिकेड्स के पास जाने की जरूरत नहीं पड़ती। हमारा सब्र जवाब दे गया था, इसीलिए हमें यह कदम उठाना पड़ा।"
प्रदर्शन के दौरान जब झमाझम बारिश शुरू हुई, तो कई छात्र तिरंगा और बैनर लिए भीगते हुए भी अपनी मांगों के समर्थन में नारे लगाते रहे। पुलिस प्रशासन ने लाउडस्पीकर के जरिए छात्रों को वहां से हटने और घर लौटने के लिए मनाने की कोशिश की।
Updated on:
10 Aug 2026 07:54 pm
Published on:
10 Aug 2026 07:51 pm
