महासमुंद

Monsoon Rainfall: 100 में से 75 जलाशय लबालब! महासमुंद में 16 सितंबर तक फिर भारी बारिश की चेतावनी, किसानों को बड़ी राहत

Chhattisgarh Rain Alert: महासमुंद जिले में इस बार मानसून की अच्छी बारिश से जलाशयों में पर्याप्त पानी जमा हो गया है। जिले के 100 में से करीब 75 लघु जलाशय भर चुके हैं, जबकि कोडार बांध और केशवा जलाशय करीब छह साल बाद पूरी क्षमता तक पहुंच गए हैं।
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Keshwa Reservoir
जलाशयों में पर्याप्त पानी जमा (फोटो सोर्स- पत्रिका)

Monsoon Rainfall: इस बार मानसून किसानों के लिए उम्मीदों का पानी लेकर आया है। लगातार अंतराल में हुई बारिश से महासमुंद जिले के जलस्रोतों की तस्वीर बदली है। खेतों में खरीफ फसल के लिए पानी की चिंता काफी हद तक दूर होने के बाद अब किसानों की नजर रबी सीजन पर है।

जलाशयों में पर्याप्त भंडारण होने से इस बार रबी में सिंचाई के लिए पानी मिलने की संभावना मजबूत हुई है। खास बात यह है कि जिले के दो प्रमुख जलस्रोत कोडार बांध और केशवा जलाशय करीब छह साल बाद पूरी क्षमता तक पहुंच गए हैं। इससे खेती के साथ ग्रामीण क्षेत्रों में गर्मी के दिनों में भी पानी की उपलब्धता को लेकर राहत की स्थिति बनी है। जिले में कुल 100 लघु जलाशय हैं। इनमें करीब 75 जलाशय भर चुके हैं। बड़े जलाशयों में भी इस बार स्थिति बेहतर है और अगस्त की बारिश के दौरान ही उनमें पर्याप्त पानी जमा हो गया था। सितंबर में अभी बारिश का दौर बाकी है।

16 सितंबर तक फिर भारी बारिश की चेतावनी

मौसम विभाग की ओर से 16 सितंबर तक फिर भारी बारिश की चेतावनी जारी की गई है। इसके बाद छोटे जलाशयों में जलभराव का आंकड़ा और बढ़ने की संभावना है। रबी सीजन में जिले में धान की खेती भी की जाती है। इस फसल के लिए अपेक्षाकृत अधिक सिंचाई की आवश्यकता होती है। जलाशयों में पर्याप्त भंडारण होने पर ही किसानों को सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध कराया जाता है। इस लिहाज से मौजूदा स्थिति किसानों के लिए राहत भरी मानी जा रही है।

कोडार बांध में इस समय 32 फीट और केशवा जलाशय में 36 फीट पानी दर्ज किया गया है। दोनों जलस्रोत पूरी तरह भर चुके हैं। लंबे अंतराल के बाद इन जलाशयों के इस स्तर तक पहुंचने से सिंचाई व्यवस्था को मजबूती मिलने की उम्मीद है। जल संसाधन विभाग के ईई एके खरे के अनुसार, जिले के लगभग 75 लघु जलाशय भर चुके हैं। बड़े बांधों के साथ लघु जलाशयों में भी इस साल जलस्तर अच्छा है। सितंबर की बारिश के बाद स्थिति और बेहतर होने की संभावना है। जलाशयों में जमा पानी का उपयोग केवल खेती तक सीमित नहीं रहता। गर्मी के मौसम में गांवों के तालाबों में पानी पहुंचाने के लिए भी जलाशयों से जलापूर्ति की जाती है।

पिथौरा में ज्यादा, कोमाखान में कम वर्षा

जिले में इस मानसून सीजन में अब तक सामान्य से अधिक वर्षा दर्ज की गई है। एक जून से 13 सितंबर तक जिले में 1121 मिमी बारिश हो चुकी है। तहसीलवार आंकड़ों में पिथौरा सबसे आगे है, जहां 1314 मिमी वर्षा रिकॉर्ड की गई है। सरायपाली में 1239, बसना में 1095, महासमुंद में 1067, बागबाहरा में 1027 और कोमाखान में 983 मिमी बारिश दर्ज हुई है। जिले में अब तक सामान्य से 25 प्रतिशत अधिक वर्षा दर्ज की गई है।

13 सितंबर को भी बारिश का सिलसिला जारी रहा। इस दिन पिथौरा में 26.7, सरायपाली में 12.7, कोमाखान में 6, बसना में 4.6, बागबाहरा में 4 और महासमुंद में 2.1 मिमी बारिश दर्ज की गई।

12 गांवों तक पहुंचा था रबी का पानी

पिछले रबी सीजन में जलाशय से 12 गांवों को सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध कराया गया था। उस समय एलबीसी गेट के जरिए पानी छोड़ा गया था। इस बार आरबीसी गेट से जलापूर्ति की जाएगी। विभाग की व्यवस्था के अनुसार, अलग-अलग वर्षों में अलग गेट से पानी निकाला जाता है। जलाशय में पर्याप्त भंडारण रहने से इस बार भी सिंचाई के लिए पानी मिलने की संभावना है। इसका सीधा लाभ उन किसानों को मिलेगा, जो खरीफ फसल के बाद अपने खेतों को खाली रखने के बजाय रबी में दूसरी फसल लेना चाहते हैं।

Updated on:
14 Sept 2026 05:15 pm
Published on:
14 Sept 2026 05:15 pm