
Paddy Procurement: पानी निकासी नहीं होने से लंबे समय तक फसल पानी में डूबी रही। किसानों को अब चिंता सता रही है कि धान खराब होने की स्थिति में खरीदी के समय किसानों को परेशानी न हो। धान खरीदी के कारण ही कई किसान फसल नुकसान की शिकायत भी नहीं कर रहे हैं। खेतों में बाढ़ से आया मिट्टी व रेत दिखाई देने लगा है। इसके अलावा मुरझाए फसल देख किसान मायूस हैं। वहीं धूप खिलने के बाद फसल खराब होने के साथ ही कीट का प्रकोप भी बढ़ गया है। बलास्ट के प्रकोप से किसान परेशान है।
क्षतिपूर्ति नहीं मिली तो किसानों को लागत निकालना भी मुश्किल हो जाएगा। जिले में इस वर्ष 1243 मिमी बारिश दर्ज की गई है। भारतीय किसान संघ के जिला उपाध्यक्ष बीएल साव ने कहा कि ज्यादा बारिश से खेतों में पानी भर गया था, निकासी नहीं होने से कई दिनों तक फसल पानी में डूबी रही। सिंगारपुर से तेंदुकाना तक फसल बर्बाद हुई है। वहीं किसान नेता जागेश्वर चंद्राकर ने बताया कि बारिश के बाद कीट का प्रकोप बहुत ज्यादा है। इसके कारण धान की फसल प्रभावित हो रही है।
कीट के प्रकोप से फसलों को नुकसान हो रहा है। कृषि वैज्ञानिक आरएल शर्मा ने कहा कि फसलों को कीट से बचाने के लिए किसानों को सलाव व परमर्श दिया जा रहा है। कृषि विभाग के उप संचालक एफआर कश्यप ने बताया कि कृषि विभाग को अभी फसल नुकसान की रिपोर्ट प्राप्त नहीं हुई है। एक-दो दिन में नुकसान रिपोर्ट आने के बाद जानकारी दी जाएगी।
महासमुंद विकासखंड में 2026 में 1171 मिमी, सरायपाली में 1359, बसना में 1211 मिमी, पिथौरा में 1428 मिमी, बागबाहरा में 1155 मिमी, कोमाखान में 1129 मिमी बारिश दर्ज की गई। महासमुंद में 107 प्रतिशत, सरायपाली में 142 प्रतिशत, बसना में 110 प्रतिशत, पिथौरा में 135 प्रतिशत, बागबाहरा में 120, कोमाखान में 119 प्रतिशत बारिश दर्ज की गई। कुल 122 प्रतिशत बारिश हुई।
सितंबर के अंतिम सप्ताह में बांधों से पानी छोडऩे से नदी का जलस्तर ज्यादा बढ़ गया। खेत लबालब हो गए। इसका खामियाजा किसानों को भुगतना पड़ा। वहीं नुकसान के लिए अब तक सर्वे नहीं हो पाने से किसान संगठन भी नाराज है। वहीं कृषि विभाग का कहना है कि किसानों ने कोई शिकायत नहीं की है।