Mahasamund LPG Scam: महासमुंद में जब्त LPG गैस कैप्सूल ट्रकों से डेढ़ करोड़ रुपए की गैस गायब होने के मामले में बड़ा खुलासा हुआ है। जांच में जिला खाद्य अधिकारी अजय यादव को मास्टरमाइंड बताया गया है।
Mahasamund LPG Scam: छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले में जब्त किए गए एलपीजी गैस कैप्सूल ट्रकों से करोड़ों रुपए की गैस गायब होने के मामले में पुलिस ने बड़ा खुलासा किया है। जांच में जिला खाद्य अधिकारी अजय यादव को पूरे गैस घोटाले का मुख्य साजिशकर्ता बताया गया है। पुलिस के अनुसार, इस पूरे खेल में करीब डेढ़ करोड़ रुपए की गैस का गबन किया गया।
जांच में सामने आया कि 23 मार्च 2026 को आरंग के एक ढाबे में बैठक हुई, जहां गैस बेचने की डील तय की गई। आरोप है कि खाद्य अधिकारी अजय यादव, गौरव गैस एजेंसी संचालक पंकज चंद्राकर और अन्य लोगों ने मिलकर 92 टन एलपीजी बेचने की योजना बनाई।
पुलिस के मुताबिक दिसंबर 2025 में सिंघोड़ा थाना क्षेत्र में 6 एलपीजी से भरे कैप्सूल ट्रक जब्त किए गए थे। सुरक्षा कारणों से इन्हें सुरक्षित रखने की जिम्मेदारी खाद्य विभाग को दी गई थी, लेकिन इसी दौरान गैस गबन की साजिश रची गई।
30 मार्च 2026 को सभी 6 कैप्सूल ट्रकों को सुपुर्दनामा के जरिए अभनपुर स्थित ठाकुर पेट्रोकेमिकल्स प्लांट ले जाया गया। इसके बाद 31 मार्च से 5 अप्रैल के बीच अलग-अलग रातों में ट्रकों से गैस निकालकर प्लांट के स्थायी बुलेट, निजी टैंकरों और अन्य एजेंसियों में ट्रांसफर की गई।
पुलिस जांच में सामने आया कि ट्रकों को प्लांट पहुंचाने के बाद तुरंत वजन नहीं कराया गया। 200 किलोमीटर के रास्ते में कई धर्मकांटे होने के बावजूद तौल जानबूझकर टाली गई, ताकि पहले गैस निकाली जा सके। जब 6 और 8 अप्रैल को ट्रकों का वजन हुआ, तब तक कैप्सूल लगभग खाली हो चुके थे।
दस्तावेजों की जांच में पता चला कि अप्रैल में ठाकुर पेट्रोकेमिकल्स ने सिर्फ 47 टन गैस खरीदी, लेकिन बिक्री 107 टन दिखाई गई। यानी करीब 60 टन गैस बिना वैध रिकॉर्ड के बेची गई। कई एजेंसियों को बिना पक्के बिल के कच्चे चालान पर गैस सप्लाई किए जाने के भी सबूत मिले हैं।
जांच में यह भी सामने आया कि आरोपियों ने पूरे मामले का दोष पुलिस पर डालने की योजना बनाई थी। 20 अप्रैल को हुई एक बैठक में सभी ने एक जैसा बयान देने और जांच को भटकाने की रणनीति बनाई। साथ ही प्लांट से जुड़े जरूरी दस्तावेज और एंट्री रजिस्टर भी गायब पाए गए।
महासमुंद पुलिस की 40 सदस्यीय टीम ने 15 दिन तक तकनीकी विश्लेषण, कॉल डिटेल और दस्तावेजों की जांच के बाद पूरे घोटाले का खुलासा किया। जांच में यह साफ हुआ कि गैस किसी लीकेज से नहीं, बल्कि सुनियोजित तरीके से निकाली गई थी।
फिलहाल पुलिस ने जिला खाद्य अधिकारी अजय यादव, पंकज चंद्राकर और मनीष चौधरी समेत कई आरोपियों को गिरफ्तार किया है। वहीं संतोष ठाकुर और सार्थक ठाकुर अब भी फरार हैं, जिनकी तलाश जारी है। मामले में बीएनएस और आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत कार्रवाई की जा रही है।