सरायपाली की रहने वाली पीलीबाई ने 18 जून को अपनी ही जाति के एक लड़के से अपनी बेटी का विवाह कर दिया। गांव में उसकी जाति के लोगों ने इसपर ऐतराज जताया और बैठक बुलाई। यादव समाज ने महिला को 11 हजार रूपये का अर्थदंड लगाया और पुरे समाज को बकरा भात का भोज कराने को कहा।
महासमुंद. जात-पात ख़त्म करने के लिए दशकों से प्रयास कर रहे हैं। उसके प्रयास से परिवर्तन भी आया है लेकिन अब भी एक बड़ी आबादी ऐसी है जो जाती प्रथा से अभी तक उबर नहीं पायी है। विशेष तौर पर ग्रामीण इलाकों में लोग अपनी जाति और दकियानूसी रिवाजों से उबर नहीं पाए हैं।
ऐसा ही एक मामला महासमुंद जिले में भी सामने आया है। जहाँ अपनी ही जात के एक लड़के से अपनी बेटी की शादी करना उन्हें काफी भारी पड़ रहा है। इस सजातीय शादी का विरोध करते हुए ग्रामीणों ने उन्हें समाज से बेदखल कर दिया है।
जानकारी के अनुसार सरायपाली की रहने वाली पीलीबाई ने 18 जून को अपनी ही जाति के एक लड़के से अपनी बेटी का विवाह कर दिया। गांव में उसकी जाति के लोगों ने इसपर ऐतराज जताया और बैठक बुलाई। यादव समाज ने महिला को 11 हजार रूपये का अर्थदंड लगाया और पुरे समाज को बकरा भात का भोज कराने को कहा।
महिला ने समाज के इस सजा को स्वीकार करते हुए उन्हें 11 हजार रुपये भी दिए और बकरा भात का भोज भी कराया लेकिन इसके बाद समाज वाले अपनी बात से पलट गए और उसे समाज से बेदखल करने का फरमान सुना दिया। जिसके कारण उसे अपने दैनिक जीवन में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
इसकी शिकायत पीड़ित महिला ने जिले के कलेक्टर और एसपी के पास की। उसने बताया की समाज का दंड स्वीकार करने के बाद भी उसे समाज से बेदखल किया जा रहा है। यही नहीं उसके समाज के लोग उसे जान से मारने की धमकी दे रहे हैं।