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Sushasan Tihar 2026: गोवा ब्रांड शराब की डिमांड, समाधान शिविर में अनोखी शिकायत, सुनकर मंत्री भी मुस्कुराए

Sushasan Tihar 2026: सुशासन तिहार 2026” के तहत शिविर में आबकारी विभाग को लिखित आवेदन देकर मदिरा दुकानों में “गोवा ब्रांड” की शराब उपलब्ध कराने की मांग की गई।

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Sushasan Tihar 2026

आबकारी विभाग से गोवा ब्रांड शराब की डिमांड (फोटो सोर्स- पत्रिका)

Sushasan Tihar 2026: छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा आयोजित “सुशासन तिहार 2026” के अंतर्गत लगाए जा रहे समाधान शिविरों में आम जनता की समस्याओं का मौके पर ही निराकरण किया जा रहा है। इन शिविरों का उद्देश्य लोगों की शिकायतों और मांगों का त्वरित समाधान करना है, लेकिन कुछ मामलों में यहां पहुंच रही अजीबोगरीब मांगें भी चर्चा का विषय बन रही हैं।

Sushasan Tihar 2026: गोवा ब्रांड शराब की मांग

इसी क्रम में शुक्रवार को महासमुंद जिले के पिथौरा विकासखंड के ग्राम मुढ़ीपार में आयोजित समाधान शिविर में एक अनोखा मामला सामने आया। यहां एक व्यक्ति द्वारा आबकारी विभाग को लिखित आवेदन देकर मदिरा दुकानों में “गोवा ब्रांड” की शराब उपलब्ध कराने की मांग की गई, जिसने सभी का ध्यान अपनी ओर खींच लिया।

डिमांड सुनकर मंत्री भी मुस्कुराए

जानकारी के अनुसार, आबकारी विभाग के अधिकारियों ने बताया कि जिले में अब तक ऐसी दो शिकायतें प्राप्त हुई हैं, जिनमें विशेष रूप से गोवा ब्रांड की शराब की उपलब्धता सुनिश्चित करने की मांग की गई है। इस बात पर मंच पर मौजूद प्रभारी मंत्री दयाल दास बघेल हल्के मुस्कान से प्रतिक्रिया देते नजर आए, जिससे शिविर में कुछ समय के लिए माहौल हल्का-फुल्का हो गया।

हालांकि मंत्री ने स्पष्ट किया कि समाधान शिविर में प्राप्त हर आवेदन को गंभीरता से लिया जा रहा है और किसी भी शिकायत या मांग को अनदेखा नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि सभी आवेदनों का नियमानुसार शीघ्र निराकरण किया जाएगा और कोई भी आवेदन लंबित नहीं रहेगा।

कई जनप्रतिनिधि और वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे

कार्यक्रम में खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री एवं जिले के प्रभारी मंत्री दयाल दास बघेल मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। इस अवसर पर सांसद रूपकुमारी चौधरी, विधायक डॉ. संपत अग्रवाल सहित कई जनप्रतिनिधि और वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद थे।

बीजापुर को ‘बाल विवाह मुक्त’ बनाने की शपथ

वहीं छत्तीसगढ राज्य के बीजापुर जिले को बाल विवाह मुक्त बनाने के लिए जिला प्रशासन, महिला एवं बाल विकास विभाग और पुलिस विभाग मिलकर व्यापक अभियान चला रहे हैं, जिसके तहत अब तक 25 ग्राम पंचायतें बाल विवाह मुक्त घोषित की जा चुकी हैं। कलेक्टर के नेतृत्व में बाल विवाह निषेध अधिनियम 2006 के तहत जागरूकता, शपथ और कड़ी निगरानी के माध्यम से 2028-29 तक पूरी तरह से बाल विवाह मुक्त होने का लक्ष्य है।

शिविरों के दौरान ग्रामीणों, महिलाओं, युवाओं और अभिभावकों ने बाल विवाह जैसी कुप्रथा के विरुद्ध एकजुटता प्रदर्शित की। प्रतिभागियों ने सामूहिक रूप से यह संकल्प लिया कि वे न केवल अपने परिवारों को इस कुरीति से बचाएंगे, बल्कि समाज में भी इसे नहीं होने देंगे। ग्रामीणों ने यह भी वादा किया कि बाल विवाह की किसी भी संभावित घटना की सूचना वे तत्काल प्रशासन को प्रदान करेंगे। समाज में सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए बड़े पैमाने पर हस्ताक्षर अभियान भी चलाया जा रहा है।