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पानी से भी सस्ता हुआ कच्चा तेल, कीमत @14 Rs/Litre

भारत में कच्चा तेल की कीमत 2200 रुपए प्रति बैरल पर आई एक बैरल में 159 लीटर होता है कच्चा तेल, एक लीटर दाम 14 रुपए पहुंचे

2 min read
Mar 09, 2020
Crude Oil Price
Crude oil becomes cheaper than water, price at 14 Rs/ liter

नई दिल्ली। कच्चा तेल यानी क्रूड ऑॅयल, जिसे रिफाइन करके पेट्रोल, डीजल और दूसरे पेट्रो पदार्थों को तैयार किया जाता है, के दाम पानी से भी ज्यादा सस्ते हो गए हैं। जी हां, चौंकाने वाली बात तो ये है कि यह स्थिति भारत की है। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज पर सुबह 11 बजे क्रूड ऑयल के दाम 2200 रुपए प्रति बैरल पर आ गए हैं। एक बैरल में 159 लीटर होते हैं। इसका मतलब ये हुआ है भारत में एक लीटर क्रूड ऑयल की कीमत 14 रुपए प्रति लीटर के आसपास आ गई है। जबकि भारत में पैक्ड एक लीटर पानी की बोतल 20 रुपए प्रति लीटर है। अब आप समझ गए होंगे कि किस तरह से भारत के बाजारों में पानी से भी सस्ता हो गया है क्रूड ऑयल।

क्रूड ऑयल के दाम में बड़ी गिरावट
आज इंटरनेशनल मार्केट में क्रूड ऑयल के दाम 31 डॉलर प्रति बैरल के आसपास कारोबार कर रहा है। ब्रेंट क्रूड ऑयल और डब्ल्यूटीआई क्रूड ऑयल के दाम में 30 फीसदी से ज्यादा की कटौती दिख चुकी है। जबकि शुक्रवार को क्रूड ऑयल के दाम 9 फीसदी से ज्यादा की कटौती देखने को मिली। यानी दो कारोबारी दिनों में क्रूड ऑयल के दाम में 40 फीसदी से ज्यादा की कटौती देखने को मिल चुकी है। जिसकी वजह से क्रूड ऑयल के दाम 5 साल के निचले स्तर पर आ गए हैं।

पानी सस्ता क्रूड ऑयल कैसे?
अब सवाल ये है कि भारत में क्रूड ऑयल के दाम पानी से भी सस्ता कैसे हो गए हैं। एंजेल ब्रोकिंग के डिप्टी वाइस प्रेसीडेंट ( कमोडिटी एंड रिसर्च ) अनुज गुप्ता ने बताया कि मौजूदा समय में भारतीय वायदा बाजारों में क्रूड ऑयल के दाम 2200 रुपए प्रति बैरल पर पहुंच गए हैं। यानी 159 लीटर क्रूड ऑयल की कीमत 2200 रुपए है।अगर इसे प्रति लीटर के रूप में गणना करें तो 14 रुपए प्रति लीटर के आसपास दाम निकल रहे हैं। जबकि भारत में पैक्ड पानी के एक लीटर बोतल के दाम 20 रुपए हैं। ऐसे में कहा जा सकता है कि एक लीटर पानी बोतल क्रूड ऑयल से महंगी है।

रूस और सउदी में प्राइस वॉर
वास्तव में रूस और सउदी में प्राइस वॉर शुरू हो गया है। जिसकी वजह से कच्चे तेल की कीमतों में बड़ी गिरावट देखने को मिली है। जानकारी के अनुसार सउदी अरब के नेतृत्व में ओपेक ने क्रूड ऑयल प्रोडक्शन कम करने का प्रस्ताव दिया था। जिसे रूस की सहमति के लिए भेजा गया था, लेकिन रूस ने प्रोडक्शन कम करने के लिए मना कर दिया। जिसके बाद दोनों देशों के बीच प्राइस वॉर शुरू हो गया। जिसका असर दुनियाभर के बाजारों में देखने को मिल रहा है।

Updated on:
10 Mar 2020 09:30 am
Published on:
09 Mar 2020 01:24 pm
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