मथुरा

बांके बिहारी मंदिर में सैकड़ों साल पुरानी भोग परंपरा टूटी, गुस्से में सेवायत, सामने आई यह वजह

Banke Bihari Mandir News : विश्व प्रसिद्ध ठाकुर बांके बिहारी मंदिर में सोमवार को सदियों पुरानी परंपरा टूट गई। आराध्य ठाकुर जी को समय पर न बाल भोग अर्पित हो सका और न ही राजभोग।

2 min read
Dec 15, 2025
बांके बिहारी मंदिर में समय पर नहीं लगा बांके बिहारी को भोग, PC- X

वृंदावन : विश्व प्रसिद्ध ठाकुर बांके बिहारी मंदिर में सोमवार को सदियों पुरानी परंपरा टूट गई। आराध्य ठाकुर जी को समय पर न बाल भोग अर्पित हो सका और न ही राजभोग। भोग तैयार करने वाले हलवाई बकाया भुगतान न मिलने के कारण काम पर नहीं आए, जिससे मंदिर में हंगामा मच गया। सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित हाई पावर्ड मैनेजमेंट कमेटी की व्यवस्थाओं पर सवाल उठ रहे हैं। सेवायत गोस्वामी समाज और श्रद्धालुओं में भारी आक्रोश है।

ये भी पढ़ें

UPPSC Protest Prayagraj : पुलिस ने छात्र को दौड़ाकर घसीटा, 300 जवान छात्रों को रोकने के लिए तैनात

क्या हुआ पूरा मामला?

मंदिर में ठाकुर जी को प्रतिदिन चार भोग अर्पित किए जाते हैं - बालभोग (सुबह श्रृंगार के बाद), राजभोग (दोपहर), उत्थापन भोग (शाम) और शयन भोग (रात्रि)। भोग तैयार करने की जिम्मेदारी मयंक गुप्ता नामक व्यक्ति को दी गई है, जो हलवाइयों से भोग बनवाकर सेवाधिकारी को सौंपते हैं। सोमवार सुबह बालभोग समय पर नहीं पहुंचा। पता चला कि कमेटी ने हलवाइयों का पूर्व भुगतान नहीं किया, इसलिए वे काम पर नहीं आए।

कमेटी सदस्य दिनेश गोस्वामी ने दर्शन के दौरान जानकारी मिलते ही व्यक्तिगत रूप से व्यवस्था की और भोग तैयार कराया। उन्होंने बताया कि मयंक गुप्ता का भुगतान बाकी था, जिसके लिए कई बार कहा गया लेकिन प्रक्रिया में देरी हुई। पहले भी उन्होंने अपनी ओर से सहायता की थी। बाद में बालभोग और राजभोग में काफी देरी से अर्पित किए गए।

सेवायतों और श्रद्धालुओं में गुस्सा

सेवायतों का आरोप है कि कमेटी गठन के बाद से बार-बार व्यवस्थागत चूक हो रही हैं, जिससे पारंपरिक सेवा-पूजा प्रभावित हो रही है। गोस्वामी समाज नाराज है कि सैकड़ों वर्ष पुरानी परंपरा टूटने से ठाकुर जी की मर्यादा भंग हुई। श्रद्धालुओं ने कहा कि प्रशासनिक लापरवाही का खामियाजा भगवान की सेवा और भक्तों की आस्था भुगत रही है।

सेवायतों ने मांग की है कि हलवाइयों का बकाया तुरंत भुगतान हो और भविष्य में सेवा में कोई बाधा न आए। कमेटी को परंपराओं का सम्मान करते हुए निर्णय लेने चाहिए।

कमेटी की कार्यप्रणाली पर खड़े हुए सवाल

सुप्रीम कोर्ट ने अगस्त 2025 में मंदिर प्रबंधन के लिए हाई पावर्ड कमेटी गठित की थी। हाल ही में दर्शन समय बढ़ाने और कुछ प्रथाओं पर रोक के खिलाफ सेवायतों की याचिका पर कोर्ट ने कमेटी और यूपी सरकार को नोटिस जारी किया है। आज की घटना ने कमेटी की कार्यप्रणाली पर और सवाल खड़े कर दिए हैं।

ये भी पढ़ें

बहराइच मेडिकल कॉलेज में जोरदार ब्लास्ट, ऑपरेशन थिएटर में फटी मशीन

Updated on:
15 Dec 2025 08:56 pm
Published on:
15 Dec 2025 08:55 pm
Also Read
View All

अगली खबर