कुत्ते आरती के तय समय पर रोज मंदिर पहुंच जाते हैं, लोगों का कहना है कि ऐसा कई वर्षों से जारी है। स्थानीय लोग मानते हैं कि कु्त्ते भी यहां भगवान शिव की आरती करने आते हैं।
मथुरा। इंसानों को तो भगवान की आरती करते हुए रोज देखते होंगे लेकिन क्या आपने कुत्तों को भगवान शिव की आरती करते देखा है। मथुरा में एक ऐसा ही मंदिर है जहां इंसान तो इंसान साथ ही कुत्ते भी भगवान शिव की आरती करते हैं। कुत्ते आरती के तय समय पर रोज मंदिर पहुंच जाते हैं, लोगों का कहना है कि ऐसा कई वर्षों से जारी है। स्थानीय लोग मानते हैं कि कु्त्ते भी यहां भगवान शिव की आरती करने आते हैं।
घंटी की आवाज सुन दौड़े चले आते हैं
इंसानों को तो बहुत आपने भगवान की आरती करते हुए देखा होगा लेकिन यहां इंसान तो इंसान कुत्ते भी भगवान शिव की आरती कर उन्हें प्रसन्न करते हैं। जी हां हम बात कर रहे हैं मथुरा के श्मशान घाट के ध्रुव घाट पर बने भगवान शिव के मंदिर की। यह एक ऐसा मंदिर है जहां एक तरफ श्मशान है और दूसरी तरफ भगवान शिव का मंदिर। ऐसा मंदिर आपको कहीं देखने को नहीं मिलेगा जहां श्मशान होगा वहां शिवजी का मंदिर हो। मथुरा का इकलौता यह मंदिर है जहां श्मशान घाट के पास में भगवान शिव खुद विराजमान हैं।
इस मंदिर में जब आरती होती है शाम के समय तो इंसानों के साथ साथ कुत्ते भी इस आरती में भाग लेने के लिए आते हैं जैसे ही मंदिर का पहला घंटा बजता है और घड़ियाल बजता है ये कुत्ते दौड़े चले आते हैं और मंदिर में भगवान शिव की प्रतिमा के सामने खड़े होकर घंटी और घड़ियालों से सुर में सुर मिला कर भगवान शिव की आरती करते हैं। यहां हर दिन आरती होती है और आरती के समय तकरीबन आधा दर्जन से अधिक कुत्ते प्रतिदिन भगवान शिव की इस आरती में शामिल होते हैं। माना यह भी जाता है कि जो यमराज के दूत हैं उन्हें सिर्फ कुत्ते ही देख सकते हैं और यहां ध्रुव घाट पर बने ऐसे मंदिर के आसपास श्मशान बने होने के कारण यहां आत्माओं का वास है और आरती के वक्त यहां आ जाते हैं।
पूर्व जन्म का संयोग है
मंदिर की पुजारिन शीला देवी ने बताया जब से मंदिर बना है और मैं जब आरती करती हूं तो कुत्ते इकट्ठे होकर मंदिर में आ जाते हैं और मेरे साथ आरती करवाते हैं। ऐसा कभी नहीं हुआ कि जब मंदिर की आरती हुई हो और कुत्ते न आए हों जब भी आरती होती है भगवान शिव की आरती के लिए कुत्ते खुद-ब-खुद दौड़े चले आते हैं और आरती में सम्मिलित होते हैं। पुजारी का कहना है कि यह पूर्व जन्म का संयोग है।
नोट- पत्रिका किसी भी तरह से धर्मांधता और अंध विश्वास को बढ़ाने की पक्षधर नहीं, खबर स्थानीय जनश्रुति और पुजारी की बाइट के आधार पर है।