पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान कृष्ण जी का जन्म सप्तमी और अष्ठमी की मध्य रात्रि में होता है। वैसे मथुरा के सभी मंदिरों में शुक्रवार के दिन मनाया जाता है लेकिन कटरा केशव देव मंदिर में गुरुवार को भगवान का जन्म हुआ।
मथुरा के भगवान केशव देव मंदिर में अजन्मे श्रीकृष्ण का जन्म उत्सव बड़े धूमधाम से मनाया गया। मंदिर में सबसे पहले केशव देव भगवान का दूध, दही, शहद, बूरा व गाय के घी से भगवान का महा अभिषेक किया गया। इस अवसर पर सैकड़ों लोग इस पल के साक्षी बने और भजनों की तान पर जमकर थिरके। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान कृष्ण जी का जन्म सप्तमी और अष्ठमी की मध्य रात्रि में होता है। वैसे मथुरा के सभी मंदिरों में शुक्रवार के दिन मनाया जाता है लेकिन कटरा केशव देव मंदिर में गुरुवार को भगवान का जन्म हुआ।
भगवान की भक्ति में सराबोर नजर आए भक्त
गुरुवार की मध्य रात्रि को श्री कृष्ण जन्मभूमि से सटे भगवान केशव देव मंदिर में जन्म उत्सव बड़ी धूमधाम से मनाया गया। भगवान केशव देव का पंचामृत से अभिषेक किया गया। इस मौके पर सैकड़ों लोग भगवान की भक्ति में सराबोर नजर आए। भगवान केशव देव का महा अभिषेक रात्रि 10:00 बजे से लेकर रात्रि 11:00 बजे तक चला। मंदिर के सेवायत पुजारियों ने भगवान केशव देव का दूध, दही, शहद, बूरा और गाय के घी से महा अभिषेक किया। मंदिर में आए भक्त भजनों की तान पर जमकर थिरकते नजर आए।
भक्तों ने कहा जन्मोत्सव देख कर मन तृप्त हो गया
वहीं मंदिर दर्शन करने आए श्रद्धालुओं से जब बात कि गई तो उनका कहना था कि भगवान के जन्मोत्सव को देख कर मन तृप्त हो गया। भक्तों का कहना है कि मंदिर में आकर सुकून मिलता है और सारे दुख दूर हो जाते हैं। कृष्ण भक्ति का एक ऐसा अनोखा संगम मथुरा में ही देखने को मिलता है क्योंकि राधे के साथ में कृष्ण का नाम जुड़ा हुआ है और कृष्ण के साथ राधे का नाम। रुद्राभिषेक के दर्शन कर हमारा जीवन सफल हो गया और ईश्वर हमें इसी तरह से हर बार अपने रूद्र अभिषेक के दर्शन कराता रहे।