नगर पंचायत अध्यक्ष पद के चुनाव को लेकर बड़ा फैसला सामने आया है। मतगणना में धांधली के आरोपों पर सुनवाई करते हुए अपर सत्र न्यायाधीश फास्ट ट्रैक कोर्ट के न्यायाधीश दीप नारायण तिवारी ने 17 मई 2026 को चुनाव की दोबारा मतगणना कराने का आदेश दिया है।
Mau News: मऊ जनपद की घोसी नगर पंचायत अध्यक्ष पद के चुनाव को लेकर बड़ा फैसला सामने आया है। मतगणना में धांधली के आरोपों पर सुनवाई करते हुए अपर सत्र न्यायाधीश फास्ट ट्रैक कोर्ट के न्यायाधीश दीप नारायण तिवारी ने 17 मई 2026 को चुनाव की दोबारा मतगणना कराने का आदेश दिया है। न्यायालय ने पूरी प्रक्रिया की वीडियोग्राफी और लाइव स्ट्रीमिंग कराने के साथ-साथ उसका डिजिटल रिकॉर्ड पेन ड्राइव में सुरक्षित रखने का निर्देश भी दिया है।
यह मामला वर्ष 2023 के नगर पंचायत चुनाव से जुड़ा है। घोसी नगर क्षेत्र के मदापुर समसपुर बैसवाड़ा निवासी और तत्कालीन प्रत्याशी वसीम पुत्र इकबाल अहमद ने 31 मई 2023 को अदालत में चुनाव याचिका दाखिल की थी। उन्होंने आरोप लगाया था कि 13 मई 2023 को हुई मतगणना के दौरान बड़े पैमाने पर अनियमितता और धांधली की गई, जिसके चलते चुनाव परिणाम प्रभावित हुआ और मुन्ना प्रसाद गुप्ता को विजयी घोषित कर दिया गया।
याचिका में कहा गया कि मतगणना स्थल पर उस समय के नगर विकास एवं ऊर्जा मंत्री भी मौजूद थे और उनके दबाव में वसीम के वैध मतों को अवैध घोषित किया जाता रहा। आरोप के अनुसार मतगणना सात चरणों में हुई थी और प्रत्येक चरण में उनके पक्ष के कई वैध मत निरस्त कर दिए गए। प्रथम चरण में जहां वसीम को 1003 मत मिले थे, वहीं विपक्षी प्रत्याशी को 1148 मत बताए गए। इसी तरह दूसरे चरण में उनके मतों की संख्या घटाकर 788 दर्शाई गई, जबकि विपक्षी प्रत्याशी को 1100 मत दिए गए।
याची ने अदालत में दावा किया कि हर चरण में अवैध मतों को विपक्षी उम्मीदवार के खाते में जोड़ा गया और उनके वैध मतों को जानबूझकर निरस्त किया गया। मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने उपलब्ध मौखिक और दस्तावेजी साक्ष्यों का अवलोकन किया। अदालत ने प्रथम दृष्टया माना कि मतगणना प्रक्रिया में गंभीर त्रुटियां और भ्रष्ट आचरण सामने आए हैं, जिससे चुनाव परिणाम प्रभावित होने की संभावना प्रतीत होती है।
कोर्ट ने जिलाधिकारी मऊ को निर्देश दिया है कि 17 मई को सर्वोदय इंटर कॉलेज घोसी में सभी प्रत्याशियों और उनके अधिवक्ताओं की मौजूदगी में वरिष्ठ प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों की निगरानी में पुनर्मतगणना कराई जाए।