मऊ

बुरे फंसे पंचायती राज मंत्री ओपी राजभर! गैरजमानती वारंट हुआ जारी: आखिर पूरा मामला है क्या?

Non Bailable Warrant Against Om Prakash Rajbhar: पंचायती राज मंत्री ओपी राजभर के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी हो गया है। जानिए पूरा मामला क्या है?

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Apr 30, 2026
कैबिनेट मंत्री ओमप्रकाश राजभर के खिलाफ गैरजमानती वारंट। फोटो सोर्स-वीडियो ग्रैब

Non Bailable Warrant Against Om Prakash Rajbhar: उत्तर प्रदेश के मऊ जिले से एक अहम कानूनी कार्रवाई सामने आई है, जहां मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (MP-MLA) डॉ. कृष्ण प्रताप सिंह की अदालत ने कैबिनेट मंत्री ओमप्रकाश राजभर के खिलाफ गैरजमानती वारंट (NBW) जारी कर दिया है। यह मामला लोकसभा चुनाव 2019 के दौरान दिए गए एक विवादित बयान से जुड़ा हुआ है, जिसमें उन पर भाजपा नेताओं के खिलाफ आपत्तिजनक भाषा इस्तेमाल करने और धमकी देने का आरोप है।

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क्या है पूरा मामला?

अभियोजन पक्ष के अनुसार, साल 2019 के लोकसभा चुनाव के दौरान रतनपुरा बाजार में एक जनसभा आयोजित की गई थी। इस सभा में ओमप्रकाश राजभर ने कथित तौर पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेताओं के खिलाफ अभद्र भाषा का प्रयोग किया था। इतना ही नहीं, उन पर यह भी आरोप है कि उन्होंने मंच से जूता मारने जैसी धमकी दी थी, जो कानून व्यवस्था और आचार संहिता दोनों के उल्लंघन की श्रेणी में आता है।

अदालत में चल रही थी सुनवाई

इस मामले में काफी समय से अदालत में सुनवाई जारी है। केस MP-MLA कोर्ट में विचाराधीन है, जहां जनप्रतिनिधियों से जुड़े मामलों की सुनवाई होती है। अदालत ने कई बार ओमप्रकाश राजभर को पेश होने के लिए तलब किया था, लेकिन वह लगातार अदालत में उपस्थित नहीं हो रहे थे। उनकी अनुपस्थिति को गंभीरता से लेते हुए अदालत ने आखिरकार सख्त रुख अपनाया।

गैरहाजिरी पड़ी भारी

बार-बार समन और निर्देशों के बावजूद कोर्ट में पेश न होने पर न्यायालय ने इसे अवमानना जैसा मानते हुए गैरजमानती वारंट जारी करने का फैसला लिया। कोर्ट का यह कदम इस बात का संकेत है कि अब इस मामले को लेकर कोई नरमी नहीं बरती जाएगी और आरोपी को हर हाल में अदालत के सामने पेश होना होगा।

क्या होता है गैरजमानती वारंट?

गैरजमानती वारंट (NBW) एक गंभीर कानूनी प्रक्रिया होती है, जिसमें पुलिस को निर्देश दिया जाता है कि आरोपी को गिरफ्तार कर सीधे अदालत में पेश किया जाए। इस स्थिति में आरोपी को तुरंत जमानत मिलने की गारंटी नहीं होती और कोर्ट के सामने पेश होने के बाद ही आगे की प्रक्रिया तय होती है।

राजनीतिक और कानूनी असर

इस मामले ने राजनीतिक गलियारों में भी हलचल पैदा कर दी है। एक ओर जहां विपक्ष इस कार्रवाई को कानून का पालन सुनिश्चित करने वाला कदम बता सकता है, वहीं समर्थक इसे राजनीतिक दबाव का हिस्सा भी बता सकते हैं। हालांकि, अदालत का रुख साफ है कि कानून के सामने सभी समान हैं और जनप्रतिनिधियों को भी न्यायिक प्रक्रिया का पालन करना अनिवार्य है। अब नजर इस बात पर है कि ओमप्रकाश राजभर कब तक अदालत में पेश होते हैं और इस मामले में उनकी ओर से क्या कानूनी दलील दी जाती है।

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