उत्तर प्रदेश में मऊ जिले के चर्चित राम किशुन मल्लाह हत्याकांड (Ram Kishun Mallah Murder Case) में कोर्ट ने 3 दोषियों को सजा सुनाई है। कोर्ट ने करीब 23 साल बाद यह फैसला सुनाया है।
Ram Kishun Mallah Murder in Mau: मऊ जिले के चर्चित राम किशुन मल्लाह हत्याकांड (Ram Kishun Mallah Murder) में जिला कोर्ट ने 23 साल बाद बड़ा फैसला सुनाया है। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश प्रथम बाकर शमीम रिजवी की अदालत ने मंगलवार को रमेश सिंह काका (Ramesh Singh Kaka) समेत इस केस के 3 दोषियों को सजा सुनाई है।
राम किशुन मल्लाह हत्याकांड में अपर जनपद एवं सत्र न्यायाधीश प्रथम बाकर शमीम रिजवी की अदालत ने रमेश सिंह काका, सुदर्शन सिंह और बृजेश सिंह को हत्या का दोषी करार दिया है। कोर्ट ने इन तीनों आरोपियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। कोर्ट ने 23 साल बाद यह फैसला सुनाया है।
जिला शासकीय अधिवक्ता अजय कुमार सिंह के अनुसार, यह मामला मऊ जिले के कोतवाली थाना क्षेत्र के भीटी इलाके का है। बीते 6 मार्च 2003 को राम किशुन मल्लाह की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। वारदात के बाद पुलिस ने तत्काल रमेश सिंह काका समेत अन्य आरोपियों के खिलाफ हत्या सहित कई गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज किया था।
लंबे समय तक चली न्यायिक प्रक्रिया में लगभग 23 वर्ष बाद कोर्ट ने उपलब्ध साक्ष्यों, गवाहों के बयानों और अभियोजन पक्ष की मजबूत पैरवी के आधार पर तीनों आरोपियों को दोषी ठहराया है। सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने कई महत्वपूर्ण गवाहों को अदालत में पेश किया और ठोस सबूत प्रस्तुत किए। अदालत ने माना कि अभियोजन पक्ष आरोपों को सिद्ध करने में सफल रहा है।
कोर्ट ने हत्या के इस मामले में रमेश सिंह काका, सुदर्शन सिंह और बृजेश सिंह को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। कोर्ट फैसले के समय न्यायालय परिसर में सुरक्षा व्यवस्था अत्यंत कड़ी रखी गई थी। इस फैसले से पीड़ित परिवार के लोगों ने राहत की सांस ली।
लंबे समय से इस मामले पर सभी की निगाहें टिकी हुई थीं। राम किशुन मल्लाह हत्याकांड जनपद मऊ के इतिहास में चर्चित रहा है। अब राम किशुन मल्लाह के परिजनों ने कोर्ट के फैसले का स्वागत किया है। पीड़ित परिवार का कहना है कि इतने वर्षों बाद भी अपराधियों को सजा मिलने से उन्हें संतोष मिला है। न्याय मिलने के बाद पीड़ित परिवार का कानून व्यवस्था पर विश्वास बढ़ गया है।