
Crime Explainer: देश में कई ऐसी आपराधिक घटनाएं हुईं, जिन्होंने अपनी बर्बरता, साजिश और जांच के दौरान सामने आए खुलासों के चलते देशभर में सुर्खियां बटोरीं। साहिल-मुस्कान केस से लेकर अंकिता भंडारी हत्याकांड तक, आपको बताते हैं 3 चर्चित अपराधों के बारे में।
मेरठ का चर्चित नीला ड्रम हत्याकांड एक ऐसे मामले के रूप में सामने आया, जिसमें पति की हत्या, शव को छिपाने की कोशिश, हिमाचल प्रदेश की यात्रा और पुलिस की जांच के बाद लंबी अदालती सुनवाई शामिल रही। इस मामले में सौरभ राजपूत की पत्नी मुस्कान रस्तोगी और उसके साथी साहिल शुक्ला को 14 अक्टूबर 2026 को मौत की सजा सुनाई गई। इससे पहले 30 सितंबर को अदालत ने दोनों को हत्या और सबूत मिटाने के अपराध में दोषी ठहराया था।
सौरभ राजपूत मर्चेंट नेवी से जुड़े थे। उनकी शादी मुस्कान रस्तोगी से वर्ष 2016 में हुई थी। रिपोर्टों के अनुसार, दोनों ने प्रेम विवाह किया था। वर्ष 2019 में उनके घर बेटी का जन्म हुआ। जांच से जुड़ी रिपोर्टों में बताया गया कि सौरभ और मुस्कान के वैवाहिक जीवन में तनाव पैदा हो गया था। मुस्कान के साहिल शुक्ला के साथ संबंधों की बात भी सामने आई। साहिल को मुस्कान का करीबी बताया गया। सौरभ को इस संबंध की जानकारी होने और परिवार में तनाव बढ़ने की बात भी जांच के दौरान सामने आई। सौरभ कुछ समय के लिए मर्चेंट नेवी की नौकरी छोड़कर परिवार के साथ रहने लगे थे। बाद में उन्होंने फिर से काम शुरू किया और वर्ष 2023 में काम के सिलसिले में विदेश चले गए।
सौरभ राजपूत फरवरी 2025 में लंदन से मेरठ लौटे थे। रिपोर्टों के अनुसार, वह अपनी बेटी के छठे जन्मदिन के मौके पर परिवार के साथ रहना चाहते थे। वह 24 फरवरी के आसपास घर पहुंचे थे और कुछ ही दिनों बाद परिवार में जन्मदिन का कार्यक्रम था, लेकिन इसके बाद घटनाक्रम ने गंभीर रूप ले लिया। अभियोजन पक्ष के मुताबिक, मुस्कान और साहिल ने सौरभ की हत्या की योजना बनाई थी।
अभियोजन पक्ष के मुताबिक, वारदात 3 और 4 मार्च 2025 के बीच हुई। आरोप था कि मुस्कान ने सौरभ के खाने में नींद की दवा मिलाई। इसके बाद चाकू से हमला कर उनकी हत्या कर दी गई। जांच में साहिल की भी इस वारदात में भूमिका बताई गई। हत्या के बाद शव को छिपाने के लिए उसके टुकड़े किए गए। फिर उन्हें नीले रंग के प्लास्टिक ड्रम में रखकर सीमेंट और रेत से ढक दिया गया, ताकि शव की पहचान और वारदात का पता चलने में देर हो। यही नीला ड्रम आगे चलकर पूरे मामले की सबसे चर्चित पहचान बन गया। पुलिस ने मामले की जांच के दौरान हत्या के साथ-साथ सबूत मिटाने के पहलू की भी पड़ताल की
जांच से जुड़ी रिपोर्टों के अनुसार, सौरभ की हत्या के बाद मुस्कान और साहिल हिमाचल प्रदेश चले गए। दोनों की शिमला और मनाली समेत कुछ स्थानों पर आवाजाही और होटल में ठहरने से संबंधित जानकारी जांच में शामिल की गई। रिपोर्टों के मुताबिक, सौरभ के फोन और सोशल मीडिया अकाउंट का इस्तेमाल करके ऐसा दिखाने की कोशिश की गई कि वह जीवित हैं और कहीं घूमने गए हैं। इस दौरान परिवार के लोगों ने सौरभ से संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन उनसे बात नहीं हो पा रही थी। पुलिस ने बाद में यात्रा से जुड़े रिकॉर्ड, मोबाइल फोन की जानकारी और अन्य साक्ष्यों की जांच की। अभियोजन पक्ष ने इन जानकारियों को हत्या के बाद की गतिविधियों और आरोपियों की भूमिका से जोड़कर अदालत में पेश किया।
मार्च 2025 के मध्य में मामले ने निर्णायक मोड़ लिया। सौरभ के लापता होने से परेशान परिजनों की चिंता बढ़ रही थी। इसी बीच घर में रखे ड्रम को वहां से हटाने की कोशिश की गई। रिपोर्टों के मुताबिक, ड्रम इतना भारी था कि उसे उठाना मुश्किल हो गया। उसे हटाने के लिए बुलाए गए मजदूरों को स्थिति संदिग्ध लगी। इसके बाद परिवार और पुलिस तक मामला पहुंचा। सौरभ की मां ने मीडिया को बताया था कि उनकी पोती पड़ोसियों से कह रही थी कि उसके पिता ड्रम में हैं। बच्ची की इस बात का उल्लेख बाद की रिपोर्टों में भी हुआ। हालांकि, मामले का खुलासा किसी एक संकेत से नहीं, बल्कि परिजनों की शिकायत, पूछताछ और पुलिस की जांच के बाद हुआ। 17 मार्च 2025 को ड्रम से सौरभ के शव के अवशेष बरामद किए गए। सीमेंट से बंद ड्रम को खोलना आसान नहीं था। रिपोर्टों के मुताबिक, पुलिस को उसे खोलने के लिए अतिरिक्त उपकरणों की मदद लेनी पड़ी।
| तारीख/चरण | मामले में हुई कार्रवाई |
|---|---|
| 18 मार्च 2025 | पुलिस ने मुस्कान रस्तोगी और साहिल शुक्ला को गिरफ्तार किया। दोनों से पूछताछ कर सौरभ की हत्या और शव छिपाने के आरोपों की जांच आगे बढ़ाई गई। |
| 19 मार्च 2025 | अदालत ने दोनों आरोपियों को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया। |
| 12 मई 2025 | पुलिस ने मामले में करीब 1,000 पन्नों की चार्जशीट दाखिल की। इसमें फॉरेंसिक रिपोर्ट, कॉल डिटेल रिकॉर्ड, सीसीटीवी फुटेज और जांच से जुड़े लोगों के बयान शामिल बताए गए। |
| जांच में शामिल गवाह | अभियोजन पक्ष ने सौरभ के परिवार के सदस्यों, कैब चालक, मेडिकल स्टोर से जुड़े व्यक्ति और कथित तौर पर चाकू, ड्रम तथा सीमेंट बेचने वाले लोगों के बयान शामिल किए। |
| हिमाचल प्रदेश से जुड़े साक्ष्य | आरोपियों के वहां ठहरने से संबंधित स्थानों के कर्मचारियों से मिली जानकारी को भी जांच में शामिल किया गया। |
| अभियोजन पक्ष के गवाह | अभियोजन पक्ष ने कुल 22 गवाहों के बयान पेश किए। |
| 30 सितंबर 2026 | अदालत ने मुस्कान रस्तोगी और साहिल शुक्ला को दोषी ठहराया। |
अदालत ने उस दिन सजा सुनाने के बजाय अगली सुनवाई के लिए 14 अक्टूबर की तारीख तय की। 14 अक्टूबर 2026 को मेरठ की अदालत ने मुस्कान रस्तोगी और साहिल शुक्ला को मौत की सजा सुनाई। फैसला जिला एवं सत्र न्यायाधीश अरविंद कुमार मिश्रा की अदालत ने सुनाया। साथ ही दोनों को हत्या के अपराध में 50-50 हजार रुपये और सबूत मिटाने से जुड़े अपराध में 20-20 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया।
उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल जिले में 19 वर्षीय अंकिता भंडारी की हत्या ने सितंबर 2022 में पूरे देश को झकझोर दिया था। ऋषिकेश के पास वनंत्रा रिजॉर्ट में रिसेप्शनिस्ट के रूप में काम करने वाली अंकिता 18 सितंबर 2022 को लापता हुई थीं। 6 दिन बाद उनका शव चीला नहर से बरामद किया गया। जांच के दौरान रिजॉर्ट मालिक पुलकित आर्य और उसके दो कर्मचारियों सौरभ भास्कर तथा अंकित गुप्ता की भूमिका सामने आई। तीनों को गिरफ्तार किया गया और मई 2025 में अदालत ने उन्हें हत्या के मामले में दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई।
लेकिन अदालत के फैसले के बाद भी मामला पूरी तरह चर्चा से बाहर नहीं हुआ। अंकिता के परिवार ने एक कथित प्रभावशाली व्यक्ति यानी ‘VIP’ की भूमिका की जांच की मांग उठाई। जनवरी 2026 में उत्तराखंड सरकार ने इस पहलू की जांच CBI से कराने की सिफारिश की। फरवरी में CBI की स्पेशल क्राइम ब्रांच में इस कथित VIP एंगल से जुड़ा मामला दर्ज होने की खबर सामने आई।
अंकिता भंडारी उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल जिले की रहने वाली थीं। वह ऋषिकेश के नजदीक गंगा-भोगपुर क्षेत्र में स्थित वनंत्रा रिजॉर्ट में रिसेप्शनिस्ट के तौर पर काम करती थीं। उस समय उनकी उम्र 19 वर्ष थी। अंकिता की हत्या के बाद उनके परिवार ने न्याय की मांग की।
अभियोजन पक्ष के अनुसार, 18 सितंबर 2022 को अंकिता रिजॉर्ट से लापता हुईं। इसके बाद उनके परिवार और पुलिस ने उनकी तलाश शुरू की। मामले की जांच में सामने आया कि अंकिता के लापता होने से पहले रिजॉर्ट में उनके और आरोपियों के बीच विवाद हुआ था। अभियोजन पक्ष ने यह भी आरोप लगाया कि अंकिता पर रिजॉर्ट में आने वाले एक कथित VIP को विशेष सेवाएं देने का दबाव बनाया जा रहा था। अंकिता ने इसका विरोध किया था। यह आरोप मामले की शुरुआती जांच और बाद में सामने आए गवाहों के बयानों का महत्वपूर्ण हिस्सा बना। हालांकि, कथित VIP की भूमिका को लेकर बाद में अलग से जांच की मांग उठी और यह सवाल मुख्य मुकदमे से अलग कानूनी चर्चा का विषय बना रहा।
अंकिता के लापता होने के बाद पुलिस ने रिजॉर्ट मालिक पुलकित आर्य, रिजॉर्ट के प्रबंधक सौरभ भास्कर और कर्मचारी अंकित गुप्ता से पूछताछ की। 23 सितंबर 2022 को तीनों को गिरफ्तार कर लिया गया। पुलिस के मुताबिक, पूछताछ के दौरान आरोपियों से मिली जानकारी के आधार पर अंकिता की तलाश को आगे बढ़ाया गया। इसके बाद 24 सितंबर को चीला नहर से उनका शव बरामद हुआ। अंकिता की मौत की खबर सामने आने के बाद उत्तराखंड में व्यापक विरोध प्रदर्शन हुए। लोगों ने आरोपियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई और मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की।
अंकिता का शव ऋषिकेश के निकट चीला नहर से बरामद किया गया। इसके साथ ही लापता होने का मामला हत्या की जांच में बदल गया। शव मिलने के बाद पुलिस ने पोस्टमार्टम और अन्य फॉरेंसिक प्रक्रियाएं पूरी कीं। जांच का केंद्र यह पता लगाना था कि अंकिता के साथ आखिरी बार क्या हुआ, आरोपियों की भूमिका क्या थी और घटना को साबित करने के लिए कौन-कौन से साक्ष्य उपलब्ध थे। मामले में तीनों आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका था। पुलिस ने रिजॉर्ट में मौजूद लोगों के बयान, मोबाइल फोन से जुड़ी जानकारी और घटनाक्रम से संबंधित अन्य साक्ष्य जुटाने शुरू किए।
| साक्ष्य का प्रकार | जांच में इसकी भूमिका |
|---|---|
| गवाहों के बयान | रिजॉर्ट में मौजूद लोगों और घटनाक्रम से परिचित व्यक्तियों की गवाही। |
| व्हाट्सऐप चैट | अंकिता और अन्य लोगों के बीच बातचीत से जुड़े रिकॉर्ड। |
| सीसीटीवी फुटेज | घटनाओं और संबंधित लोगों की गतिविधियों से जुड़े दृश्य साक्ष्य। |
| कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) | मोबाइल फोन के संपर्क और गतिविधियों से संबंधित जानकारी। |
| फॉरेंसिक रिपोर्ट | जांच में जुटाए गए भौतिक और वैज्ञानिक साक्ष्यों का विश्लेषण। |
| आरोपियों से पूछताछ | आरोपियों के बयानों और अन्य साक्ष्यों के बीच संबंधों की जांच। |
उत्तराखंड पुलिस के अपर पुलिस महानिदेशक डॉ. वी. मुरुगेशन ने 15 अक्टूबर 2026 को बताया कि एसआईटी ने डिजिटल, तकनीकी, फॉरेंसिक और भौतिक साक्ष्य जुटाए थे। पुलिस ने 88 दिनों में जांच पूरी करके लगभग 500 पन्नों का आरोपपत्र अदालत में दाखिल किया था। इन साक्ष्यों के आधार पर अदालत ने तीनों आरोपियों को दोषी ठहराया।
मामले की गंभीरता को देखते हुए विशेष जांच दल यानी एसआईटी का गठन किया गया। पुलिस के मुताबिक, जांच में गवाहों के बयान, तकनीकी रिकॉर्ड, फॉरेंसिक रिपोर्ट और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों का विश्लेषण किया गया। एसआईटी ने 88 दिनों में जांच पूरी कर लगभग 500 पन्नों का आरोपपत्र दाखिल किया। इसके बाद मामला अदालत में चला, जहां अभियोजन पक्ष ने साक्ष्य और गवाह पेश किए। इस मुकदमे में पुलकित आर्य, सौरभ भास्कर और अंकित गुप्ता पर हत्या समेत अन्य अपराधों के आरोप लगाए गए। अदालत में अभियोजन पक्ष ने घटनाओं की कड़ियों को जोड़कर यह साबित करने की कोशिश की कि अंकिता की हत्या में तीनों की भूमिका थी।
कोटद्वार की अपर जिला एवं सत्र अदालत में मामले की सुनवाई चली। अभियोजन पक्ष ने गवाहों के बयान, डिजिटल रिकॉर्ड और फॉरेंसिक साक्ष्य पेश किए। बचाव पक्ष को भी अदालत में अपना पक्ष रखने का अवसर मिला। 30 मई 2025 को अदालत ने पुलकित आर्य, सौरभ भास्कर और अंकित गुप्ता को दोषी ठहराते हुए आजीवन कठोर कारावास की सजा सुनाई। तीनों को हत्या और संबंधित अपराधों में दोषी पाया गया। 14 अक्टूबर 2026 को भी आरोपियों की जमानत अर्जियां फिर खारिज किए जाने की खबर सामने आई।
पुणे के कारोबारी केतन अग्रवाल की मौत का मामला शुरुआत में पहाड़ी किले से गिरने की दुर्घटना माना गया था। लेकिन पुलिस की जांच में यह कथित साजिश के तहत की गई हत्या का मामला बन गया। पुलिस का आरोप है कि केतन की मंगेतर सिया गोयल, उसके कथित प्रेमी चेतन चौधरी और चेतन के दोस्त रितेश हांगे ने मिलकर हत्या की योजना बनाई थी। 18 जून 2026 को महाराष्ट्र के लोहागढ़ किले पर केतन की मौत हुई थी।
19 सितंबर 2026 को पुणे ग्रामीण पुलिस ने वडगांव मावल अदालत में 5,053 पन्नों की चार्जशीट दाखिल की। इसमें डिजिटल रिकॉर्ड, CCTV फुटेज, कॉल डिटेल, चैट और गवाहों के बयान शामिल बताए गए हैं। पुलिस के मुताबिक, इस मामले में करीब 80 से 85 गवाहों का उल्लेख है। 15 अक्टूबर 2026 तक उपलब्ध जानकारी के अनुसार, तीनों आरोपी हिरासत में हैं और मामले में अदालत का अंतिम फैसला नहीं आया है।
केतन अग्रवाल पुणे के कारोबारी थे। वर्ष 2026 में उनकी सगाई सिया प्रवीण गोयल से हुई थी। दोनों परिवार शादी की तैयारियों में जुटे थे और नवंबर 2026 में शादी होने की योजना बताई गई थी। पुलिस की जांच के मुताबिक, इसी दौरान सिया और चेतन चौधरी के बीच प्रेम संबंध थे। जांच में पाया गया कि सिया इस शादी के लिए तैयार नहीं थी और केतन से शादी करने के बजाय चेतन के साथ रहना चाहती थी। पुलिस के मुताबिक सिया और चेतन ने केतन को रास्ते से हटाने की योजना बनाई। जांच में चेतन के दोस्त रितेश हांगे की भूमिका भी सामने आई। पुलिस का दावा है कि रितेश को कथित साजिश की जानकारी थी और उसने योजना बनाने में मदद की।
चार्जशीट के मुताबिक, सिया और चेतन की मुलाकात सिया के भाई के जरिए हुई थी। पुलिस का आरोप है कि दोनों के बीच संबंध बढ़ने के बाद उन्होंने राजस्थान के खाटू श्याम मंदिर में गुपचुप शादी भी की थी। इस कथित शादी से जुड़े फोटो और संदेश जांच के दौरान बरामद किए जाने की बात कही गई है। पुलिस के अनुसार, सिया की शादी केतन से तय होने के बाद भी चेतन के साथ उसका संपर्क बना रहा। जब परिवारों ने नवंबर में शादी की तैयारी शुरू की, तो कथित तौर पर केतन की हत्या की योजना बनाई गई। जांच में यह भी आरोप सामने आया कि तीनों ने पहले किसी अन्य व्यक्ति से हत्या करवाने की संभावना पर विचार किया था, लेकिन पुलिस के मुताबिक, पकड़े जाने और ब्लैकमेल किए जाने की आशंका के कारण उन्होंने खुद ही वारदात को अंजाम देने की योजना बनाई।
पुणे ग्रामीण पुलिस के मुताबिक, लोहागढ़ किले पर केतन की मौत से पहले भी उन्हें निशाना बनाने की कोशिश की गई थी। चार्जशीट में आरोप है कि 14 जून को सिया केतन को लोहागढ़ ले गई थी। वहां उसे चट्टान के किनारे धकेलने की कोशिश की गई, लेकिन केतन एक झाड़ी पकड़कर गिरने से बच गया। जांचकर्ताओं का दावा है कि इस कोशिश के सफल नहीं होने के बाद आरोपियों ने दोबारा योजना बनाई। उन्होंने कथित तौर पर ऐसी जगह चुनी, जहां से केतन के गिरने पर घटना दुर्घटना जैसी दिखाई दे सकती थी।
18 जून को केतन अपनी मंगेतर सिया के साथ महाराष्ट्र के पुणे जिले में स्थित लोहागढ़ किले पहुंचे। शुरुआती जानकारी में बताया गया था कि तस्वीरें लेते समय केतन का पैर फिसला और वह लगभग 400 फीट गहरी खाई में गिर गए। लेकिन पुलिस ने बाद में इस घटनाक्रम को संदिग्ध माना। जांचकर्ताओं के अनुसार, केतन को एक कथित जन्मदिन सरप्राइज के बहाने वहां बुलाया गया था। पुलिस का दावा है कि इसके लिए सोशल मीडिया पर एक फर्जी Instagram अकाउंट बनाया गया था। चार्जशीट के मुताबिक, सिया और चेतन ने किले पर एकांत स्थान चुना था। आरोप है कि सिया ने केतन को चट्टान के किनारे पहुंचाया और धक्का दिया, जिसके बाद चेतन ने भी उन्हें नीचे गिराने में भूमिका निभाई। पुलिस ने दावा किया कि घटना के समय कुछ लोगों ने आरोपियों की गतिविधियां देखीं। बाद में उनके बयान दर्ज किए गए।
इस मामले में सबसे अहम डिजिटल सुरागों में से एक कथित फर्जी Instagram अकाउंट बताया गया है। पुलिस के मुताबिक, सिया ने ‘माही’ नाम से एक अकाउंट बनाया था और केतन को यह विश्वास दिलाया कि यह उसकी किसी परिचित का अकाउंट है। इसी माध्यम से उन्हें लोहागढ़ आने के लिए तैयार किया गया। जांचकर्ताओं का आरोप है कि केतन को वहां सिया के जन्मदिन से जुड़ा सरप्राइज देने की बात कही गई थी। पुलिस ने बताया कि वारदात के बाद अकाउंट हटा दिया गया था, लेकिन फॉरेंसिक जांच की मदद से डिलीट किए गए डिजिटल रिकॉर्ड हासिल किए गए। इस अकाउंट से जुड़े संदेश और गतिविधियां जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा बने।
पुलिस की चार्जशीट में सिया और चेतन के बीच बड़ी संख्या में फोन कॉल और लंबे समय तक हुई बातचीत का उल्लेख है। जांचकर्ताओं ने कॉल डिटेल रिकॉर्ड, WhatsApp और अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म से जुड़े रिकॉर्ड की पड़ताल की।पुलिस का दावा है कि आरोपियों ने वारदात से पहले कुछ चैट डिलीट कर दी थीं। फॉरेंसिक जांच के जरिए कुछ हटाए गए संदेश और अन्य डिजिटल सामग्री वापस प्राप्त किए जाने की बात भी सामने आई। चार्जशीट में एक क्षतिग्रस्त मोबाइल फोन का भी उल्लेख है, जिसे पुलिस ने सिया के कमरे से बरामद करने का दावा किया। जांचकर्ताओं के मुताबिक, इस फोन से कथित योजना से संबंधित ऑनलाइन खोजों के सुराग मिले।
सितंबर 2026 में दाखिल चार्जशीट के संबंध में प्रकाशित रिपोर्टों के अनुसार, पुलिस ने लगभग 80 से 85 गवाहों के बयान दर्ज किए हैं। इनमें 3 ऐसे गवाहों का भी उल्लेख है, जिन्होंने कथित तौर पर घटना के समय सिया और चेतन को केतन के साथ देखा था। पुलिस ने गवाहों के बयानों को डिजिटल रिकॉर्ड, CCTV फुटेज और अन्य तकनीकी साक्ष्यों के साथ जोड़ा है। जांचकर्ताओं का कहना है कि इससे घटनाक्रम की कड़ियां जोड़ने में मदद मिली।
केतन की मौत के पांच दिन बाद, 23 जून 2026 को पुणे ग्रामीण पुलिस ने सिया गोयल और चेतन चौधरी को गिरफ्तार किया। दोनों से पूछताछ की गई। पुलिस ने उनके मोबाइल फोन, डिजिटल रिकॉर्ड और अन्य सामग्री की जांच की। आरोपियों को अदालत में पेश किया गया और जांच के लिए पुलिस हिरासत मांगी गई। जून के अंत में अदालत ने पुलिस को दोनों से पूछताछ जारी रखने की अनुमति दी। पुलिस ने अदालत को बताया कि डिजिटल साक्ष्य की बरामदगी और कथित साजिश के विभिन्न पहलुओं की जांच अभी बाकी है। इसके बाद जुलाई में दोनों को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। अदालत ने समय-समय पर उनकी न्यायिक हिरासत बढ़ाई।
जांच आगे बढ़ने के साथ चेतन के दोस्त रितेश हांगे का नाम सामने आया। पुलिस का आरोप था कि रितेश को हत्या की योजना की जानकारी थी और उसने सिया तथा चेतन को योजना बनाने में मदद की। 5 सितंबर 2026 को पुलिस ने रितेश हांगे को गिरफ्तार किया। जांचकर्ताओं के मुताबिक, उसे चेतन के मोबाइल फोन से मिली जानकारी के आधार पर तलाशा गया। पुलिस ने दावा किया कि रितेश को पहले से कथित योजना की जानकारी थी और उसने आरोपियों के साथ कुछ चर्चाओं में भाग लिया था। हालांकि, उसके खिलाफ लगाए गए आरोप भी अदालत में साबित होने बाकी हैं। इस गिरफ्तारी के बाद मामले में आरोपियों की संख्या तीन हो गई। पुलिस ने तीनों की कथित भूमिका को चार्जशीट में अलग-अलग तरीके से समझाया।
पुणे ग्रामीण पुलिस ने 19 सितंबर 2026 को वडगांव मावल अदालत में 5,053 पन्नों की चार्जशीट दाखिल की। इसमें सिया गोयल, चेतन चौधरी और रितेश हांगे को आरोपी बनाया गया। चार्जशीट में कथित साजिश, फर्जी Instagram अकाउंट, मोबाइल फोन रिकॉर्ड, कॉल डिटेल, CCTV फुटेज, तस्वीरें, चैट और गवाहों के बयान शामिल बताए गए हैं। रिपोर्टों के अनुसार, इसमें लगभग 80 से 85 गवाहों का उल्लेख है। पुलिस ने दावा किया कि डिजिटल और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर घटनाओं का क्रम स्थापित किया गया है। चार्जशीट दाखिल होने के बाद अगला चरण अदालत द्वारा दस्तावेजों की समीक्षा और आरोप तय करने की प्रक्रिया है।
इस मामले में सिया और चेतन को जून 2026 में गिरफ्तार किया गया था। पूछताछ के बाद दोनों न्यायिक हिरासत में भेजे गए और अदालत ने समय-समय पर हिरासत बढ़ाई। जुलाई में अदालत ने दोनों की न्यायिक हिरासत बढ़ाने के साथ चेतन के वकील की एक याचिका पर भी आदेश दिया था। बचाव पक्ष ने गिरफ्तारी के समय और पुलिस की प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाए थे। अदालत ने पुलिस कार्यालय की CCTV फुटेज सुरक्षित रखने और पेश करने का निर्देश दिया था, जबकि अवैध हिरासत घोषित करने की मांग स्वीकार नहीं की गई थी। सितंबर में तीसरे आरोपी रितेश हांगे की गिरफ्तारी हुई। 19 सितंबर को चार्जशीट दाखिल होने के समय तीनों आरोपियों के जेल में होने की रिपोर्ट दी गई। 15 अक्टूबर 2026 तक उपलब्ध रिपोर्टों में किसी आरोपी को जमानत मिलने या मामले में अंतिम दोषसिद्धि का फैसला आने की पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए फिलहाल तीनों के खिलाफ आरोपों को अदालत में साबित होना बाकी है।