पश्चिम उत्तर प्रदेश के जिलों के नाम भी बदलने पर विचार कर रही योगी सरकार
मेरठ। प्रदेश भाजपा सरकार द्वारा इलाहाबाद जिले का नाम प्रयागराज कर देने के फैसले से विपक्षी दलों के तेवर तेज हो गए हैं। कांग्रेस, सपा और रालोद भाजपा के इस फैसले की अलोचना कर रहे हैं] जबकि बसपा इस मामले में मौन साधे हुए है। वहीं सरकारी सूत्रों की मानें तो अभी कुछ जिले और हैं, जिनके नाम बदलने पर भाजपा सरकार प्रमुखता से विचार कर रही है। इन जिलों में कुछ जिले पश्चिम के भी हैं। बताया जा रहा है कि इनमें बागपत का नाम भी शामिल है। सरकार बागपत को चौधरी चरण सिंह के नाम पर रखने पर विचार कर रही है। पश्चिम में सरकार द्वारा जिलों के नाम बदलने पर विचार करने मात्र से यहां की सियासत तेज हो गई है।
रालोद नेताआें ने कहा- भयंकर परिणाम होंगे
रालोद जो कि किसान मसीहा चौधरी चरण सिंह के नाम पर ही राजनीति करती आई है उसने जिले का नाम बदलने पर विरोध की राजनीति शुरू कर दी है। रालोद के राष्ट्रीय महासचिव डा. मैराजुद्दीन ने बताया कि अगर भाजपा सरकार ने पश्चिम के जिलों का नाम बदलने की कुचेष्टा की तो उसको भयंकर परिणाम भुगतने पड़ेंगे। उन्होंने कहा कि पश्चिम के जिलों को जो नाम वर्षों से पड़ा हुआ है। उसका अपना इतिहास है। पश्चिम के जिलों के नाम लोगों की भावनाओं से जुड़े हुए हैं। ऐसे में सरकार लोगों की भावनाओं से नहीं खेल सकती। पश्चिम की जनता भाजपा के जिला नाम परिवर्तन नीति के खिलाफ है। यह सरासर गलत है। डा. मैराजुद्दीन ने कहा कि अगर भाजपा सरकार ने ऐसा करने की सोची भी तो रालोद ऐसा नहीं होने देगा। रालोद भाजपा सरकार की इस नीति का प्रबल विरोध करेगा। बड़ा आंदोलन चलाया जाएगा।
किसानों के लिए कुछ करे भाजपा सरकार
उन्होंने कहा कि भाजपा जिलों के नाम परिवर्तन के बहाने से लोगों को भटकाने की राजनीति बंद करें। भाजपा सरकार अगर कुछ करना चाहती है तो किसानों के हित की बात करे। आज किसान सबसे अधिक परेशान हैं। गन्ने का भुगतान का मामला हो या फिर किसी भी फसल के समर्थन मूल्य का। किसानों के बिजली की दरें बढ़ा दी गई। आज प्रदेश का किसान भुखमरी के कगार पर है और भाजपा सरकार को जिलों के नाम परिवर्तन में लगी है।