पैगम्बर रसूल को था इत्र लगाना पसंद, ईद के दिन इत्र लगाना सुन्नत
मेरठ। लोगों का मानना है कि सबसे महंगा सोना ही होता है, लेकिन ऐसा नहीं हैं। सोने से भी महंगा इत्र होता है। बात अगर मुश्क इत्र की करें तो इसने सोने को भी फेल कर दिया है। 'मुश्क इत्र’ दिल को सुकून और मानसिक तौर पर ठंडक प्रदान करता है। मन को स्वस्थ रखता है। इसके कई मनोवैज्ञानिक कारण व औषधि के तौर पर भी कई कारक हैं। मुश्क इत्र सोने से ज्यादा कीमती है। एक तोला सोना जहां 33 हजार रुपए का है, वहीं मुश्क 40 हजार रुपए तोला है। जन्नत-उल-फिरदौस नाम का इत्र भी 25 हजार रुपए तोला से कम का बाजार में नहीं है। हालांकि बाजार में मुश्क व जन्नत-उल-फिरदौस आपको आसानी से मिल जाएगा, लेकिन उसके अंदर वो खूबियां नहीं होगी, जो असली इत्र में होती है।
र्इद पर खूब खरीदे जा रहे इत्र
ईद के नजदीक आते ही इत्र की दुकानें भी गुलजार होने लगती हैं। इस समय इत्र खरीदने वाले ग्राहकों की संख्या में इजाफा होने लगा हैं। गुदड़ी बाजार में स्थित एक इत्र की दुकान के मालिक सिराज का कहना है कि मैगनेट, चमेली, मजमुआं कूलावाटर, वाइट मुस्क, सदफ, फवाके, संदल इत्र की खरीद ज्यादा हैं। इन इत्रों की कीमत 250 रुपए से लेकर 20,000 रुपए प्रति तोला से ज्यादा नहीं हैं। सस्ते इत्र ग्राहक आसानी से खरीद लेता है। परफ्यूम में एल्कोहल मिला होने के कारण इत्र की मांग में इजाफा हुआ हैं। उलेमाओं ने भी परफ्यूम लगाने से मना किया है। पैगम्बर रसूल मोहम्मद को खुशबू पसंद थी और जब नमाज पढ़ने के लिए जाते थे तो मुश्क इत्र लगाते थे। ईद के दिन इत्र लगाना सुन्नत है।
महिलाओं को भी पसंद इत्र
ऐसा नहीं की इत्र को पुरुष ही लगाते हैं, बल्कि महिलाएं भी इत्र की दीवानी होती हैं। हालांकि उनकी पसंद अलग हैं। चमेली और मैगनेट महिलाओं की पसंद है। दोनों इत्रों को युवतियां बड़े शौक से लगाती हैं। मजमुआं, कूलर वाटर, वाइट मुस्क, सदफ, संदल, फवाके, जैस्मीन, हिना, शबनम और कैसर की खरीदारी ज्यादा है।
इत्र की कीमत है यह
र्इद के मौके पर बाजारों में कर्इ तरह के इत्र हैं। इनमें मुश्क इत्र 40 हजार रुपये प्रति तोला, जन्नतुल फिरदौस 20 हजार रुपये प्रति तोला, मजमुआं 2500 रुपये प्रति तोला, मैगनेट 150 रुपये प्रति तोला समेेत कर्इ सस्ते आैर महंगे इत्र बाजार में हैं।