लोगों में बढ़ी बिजली का करंट लगने की घटनाएंगिलास उठाते या दरवाजे पर हाथ लगाते ही लग रहा करंटशुष्क मौसम और प्रोटोन-न्यूटान के कारण लग रहे झटके
पत्रिका न्यूज नेटवर्क
मेरठ ( meerut news ) घर पर अचानक से गिलास उठाते हुए या फिर दरवाजे पर हाथ रखते ही बिजली के करंट जैसा तेज झटका ( Electric current shock ) लगता है और हाथ अपने-आप ही उस स्थान से हट जाता है। आजकल हर काफी लोगों के साथ ऐसा हो रहा है। अगर आपके साथ भी कुछ ऐसा हुआ है ताे जान लीजिए कि माैसम का असर है।
दरअसल इन दिनों यह करंट के झटके एकाएक बढ़ गए हैं। यही कारण है कि कोरोना काल में भी करंट लगने की चर्चा लोगों ( everyone ) के बीच हो रही हैं। ऐसे कई लोग हैं जिनको कुछ भी छूने पर करंट लगने जैसा झटका महसूस हाे रहा है। मेरठ की रहने वाली गृहणी संगीता का कहना है कि आजकल वे दरवाजा या नल की टोटी छूती हैं या कोई बर्तन उठाती हैं तो भी हल्का सा करंट लगता है। पहले तो उन्होंने इसे घर में होने वाली बिजली की वायरिंग के कारण समझा लेकिन जब इस तरह का करंट उन्हें ही लगा और घर के किसी व्यक्ति ने इसको महसूस नहीं किया तो वे अब रबड की चप्पल पहनकर काम करने लगी हैं।
प्रोटोन और न्यूटान के कारण होता है करंट जैसे झटके का आभास
चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय के भौतिक विज्ञान विषय के विभागाध्यक्ष डॉकटर वीरपाल सिंह इसको एक सामान्य सी घटना मानते हैं। उनका कहना है कि स्टेटिक इलेक्ट्रिक आवेश से उत्पन्न प्रोटोन और न्यूटान के कारण करंट का आभास होता है। उनका कहना है कि ऐसा मौसम में तब्दीली के कारण भी कभी-कभी होता है। इस तरह की घटनाएं जब अधिक जाड़ा पड़ता है और मौसम काफी शुष्क हो जाता है तब या फिर जब हवा से नमी पूरी तरह से गायब हो जाती है तो उस समय होती हैं। डॉक्टर वीरपाल सिंह के अनुसार न्यूटान और प्रोटोन आवेश का एक जगह से दूसरी जगह पर आवागमन होता रहता है। जलवाष्प के कारण ही ये एक स्थान से दूसरे स्थान पर आते-जाते रहते हैं। जब जलवाष्प बनना बंद हो जाता है तो यह न्यूटान और प्रोटान का यह आवेश प्रवाहित नहीं होता जिसके चलते करंट लगता है।