गोलगप्पे और चटपटा पानी का स्वाद आखिर किसे अच्छा नहीं लगता। खासकर महिलाएं और युवतियां तो इन गोलगप्पों की बड़ी दीवानी होती हैं। अक्सर गोलगप्पों बेचने वाले ठेले के चारों ओर महिलाओं और युवतियों की चौकड़ी दिख ही जाती है। लेकिन पिछले कुछ महीने से महिलाओं और युवतियों की ये चौकड़ी नदारत है। इसका कारण भी जानकर हैरान हो जाएंगे।
मेरठ. महंगाई की मार अब महिलाओं और युवतियों के लजीज गोलगप्पों पर भी पड़ने लगी है। पिछले एक-दो महीने से गोलगप्पों की दुकान पर महिलाओं और युवतियों की भीड़ कुछ कम ही दिखाई दे रही है। कारण गोलगप्पे भी महंगे हो गए हैं। जिस कारण महिलाएं इनसे दूरी बनाने लगी हैं। आम तौर पर घर से निकलने के बाद महिलाओं की खासकर दिली इच्छा गोलगप्पे खाने की होती थी। लेकिन अब गोलगप्पे के रेट पर नजर पड़ते ही महिलाएं अपनी गोलगप्पे खाने की इच्छा मन में ही दबा रही है।
कभी मिलते थे दस के छह, आज मिल रहे दस रुपये के तीन
गोलगप्पे जो कि कभी दस रुपये में छह मिलते थे आज वहीं दस रुपये में तीन मिल रहे हैं। यानी गोलगप्पों पर भी महंगाई की मार दो गुनी हो गई है। वहीं सूजी के गोलगप्पे जो कि दस रूपये के चार मिलते थे आज वहीं गोलगप्पे 10 रुपये के दो मिल रहे हैं। यानी सूजी हो या फिर आटे के दोनों ही प्रकार के गोलगप्पों पर महंगाई ने अपना असर छोड़ा है।
पहले हर दूसरे दिन खाते थे, लेकिन अब महीने में एक बार
गोल गप्पे की दुकान पर गोलगप्पे का मजा ले रही शताक्षी ने बताया कि गोलगप्पे काफी महंगे हो गए हैं। पहले दस रुपये के 6 मिलते थे अब तीन ही मिल रहे हैं। उन्होंने बताया कि वो पहले दूसरे-तीसरे दिन गोलगप्पे खातीं थीं। लेकिन अब महंगाई के कारण 15 दिन या फिर महीने में एक बार ही खा रही हैं।