
Meerut Lalita Gautam Murder Case: मेरठ के चर्चित ललिता गौतम हत्याकांड को लेकर उत्तर प्रदेश की सियासत गरमा गई है। पीड़ित परिवार को ढांढस बंधाने जा रहे कांग्रेस के प्रतिनिधिमंडल को पुलिस ने सख्त रुख अपनाते हुए उनके घरों में ही नजरबंद (हाउस अरेस्ट) कर दिया। दरअसल, कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अजय राय ने बुधवार को इस संवेदनशील मामले में एक 32 सदस्यीय डेलिगेशन का गठन किया था, जिसे गुरुवार को पीड़ित परिवार से मिलने मेरठ पहुंचना था। लेकिन कानून-व्यवस्था का हवाला देते हुए पुलिस ने रास्ते में ही रोक दिया।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय ने एक दिन पहले बुधवार को इस दुखद घटना पर संवेदना जताने के मकसद से 32 नेताओं का एक प्रतिनिधिमंडल तैयार किया था। इस दल में मेरठ के साथ-साथ पड़ोसी जिलों से भी कांग्रेस के कई जाने-माने चेहरों को जगह दी गई थी, ताकि पार्टी की ओर से पीड़ित परिवार को सामूहिक रूप से सांत्वना दी जा सके।
जैसे ही प्रशासन को प्रतिनिधिमंडल के गांव की ओर रवाना होने की भनक लगी, पुलिस टीमें देर रात ही नेताओं के घरों के बाहर पहुंच गईं। सुबह होते-होते इन नेताओं को घर से बाहर निकलने से रोक दिया गया। इस कार्रवाई की जद में पूर्व विधायक गजराज सिंह, महानगर अध्यक्ष रंजन शर्मा, नेत्री पूनम पंडित और जिला अध्यक्ष गौरव भाटी सहित कई अन्य नेता आए।
घटनाक्रम पर कांग्रेसियों ने कहा कि प्रशासन का यह कदम पूरी तरह तानाशाही भरा है। पूनम पंडित का आरोप है कि वह मेरठ के चर्चित दलित छात्रा ललिता गौतम हत्याकांड के पीड़ित परिवार से मिलने और कांग्रेस कार्यकर्ताओं के साथ ज्ञापन देने के लिए मेरठ जाने वाली थीं, लेकिन उससे पहले ही पुलिस ने उन्हें घर से बाहर निकलने से रोक दिया। उन्होंने कहा कि सरकार विपक्ष की आवाज को दबाने की कोशिश कर रही है, जबकि किसी शोकाकुल परिवार से मिलना हर नागरिक का बुनियादी हक है।
फिलहाल मेरठ पुलिस या बुलंदशहर पुलिस की ओर से पूनम पंडित को हाउस अरेस्ट किए जाने के संबंध में कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। गौरव भाटी ने भी कहा कि दल का मकसद केवल संवेदना जताना था, न कि किसी तरह का प्रदर्शन, फिर भी उन्हें रोका जाना गलत है।
विवाद बढ़ने के बाद प्रशासन ने थिरोट गांव को पूरी तरह सील कर दिया है। अब गांव में किसी भी बाहरी व्यक्ति और पत्रकार को घुसने की इजाजत नहीं दी जा रही। इस पाबंदी की वजह से गांव आने वाले रिश्तेदारों और बाहर काम-धंधे के सिलसिले में रहने वाले स्थानीय लोगों को भी आवाजाही में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।