मेरठ

50 से अधिक उम्र वालों को शिकार बनाता है यह कैंसर, इससे बचने के लिए बस ये हैं उपाय

देश में प्रतिवर्ष मल्टिपल माइलोमा के करीब दो लाख नए केस दर्ज हो रहे हैं, इससे अनुमानित वार्षिक मृत्यु दर लगभग 106000 है

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Oct 17, 2018
50 से अधिक उम्र वालों को शिकार बनाता है यह कैंसर, इससे बचने के लिए बस ये हैं उपाय

केपी त्रिपाठी, मेरठ। चिकित्सा जगत में नित नई खोजों और रोगों के प्रति होती आधुनिक प्रगति के चलते आज पहले से साध्य माने जाने वाले रोगों पर भी नियंत्रण पाना संभव हो गया है। पहले कैंसर का नाम सुनते ही पीड़ित के घर ही नहीं आसपास के इलाके में दहशत फैल जाती थी, लेकिन आज कैंसर की बीमारी का पता चलते ही लगता है कि वह दवाइयों से ठीक हो सकता है।

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50 से अधिक आयु वालों को अधिक बनाती है शिकार

कैंसर स्पेलिस्ट डाॅ. राहुल भागर्व इन दिनों कैंसर जैसे असाध्य रोगों से लड़ने के लिए लोगों को प्रेरित कर रहे हैं। मानव शरीर में जरा सी चूक अनेकों बीमारियाें को जन्म देती है। इन्हीं में से एक है मल्टिपल माइलोमा। यह एक तरह का ब्लड कैंसर है। यह बीमारी 50 से अधिक आयु वालों को अधिकतर होती है। डाॅ. भार्गव कहते हैं कि 50 से कम उम्र वालों को भी यह बीमारी हो सकती है। देश में प्रतिवर्ष इस रोग के करीब दो लाख नए केस दर्ज हो रहे हैं। इससे अनुमानित वार्षिक मृत्यु दर लगभग 106000 है।

क्या है मल्टीपल माइलोमा

मेरठ के वैलेटिंस कैंसर अस्पताल के सर्जन डाॅ. राहुल भागर्व के अनुसार, मल्टीपल माइलोमा एक विषम व घातक प्लाज्मा सेल विकार है। इसमें गुर्दों की खराबी, शरीर में खून की कमी, हड्डी की कमजोरी या अन्य इस बीमारी के प्रमुख लक्षण हैं। मल्टीपल माइलोमा 25 प्रतिशत रक्त कैंसर के लिए जिम्मेदार है। यह नो हाइज्किन्स लिंफोमा कैंसर के बाद सबसे अधिक पाया जाने वाला कैंसर है।

वरदान साबित हुई कीमोथैरेपी

अब तक मल्टीपल माइलोमा को एक असाध्य रोग माना जाता था लेकिन स्टेम सेल प्रत्यारोपण और कीमोथेरेपी ऐसे रोगियों के लिए एक वरदान साबित हई है। इसके कारण केवल बीमारी को नियंत्रित करना ही संभव नहीं हुआ है बल्कि कैंसर के प्रकार को रोककर इस रोग से ग्रसित रोगियों की आयु में वृद्धि करना भी संभव हुआ है।

2001 से 2018 के बीच आई दवाओं ने बढ़ाई आयु

मल्टीपल माइलोमा के निदान के लिए कीमोथेरेपी देनी होती है। वर्ष 2001 से 2018 के बीच कीमोथेरेपी की दवाओं में काफी वृद्धि हुई है। ऐसी दवाएं बाजार में आई हैं, जो अधिक असरदार, सुरक्षित और बीमारी को टार्गेट कर 90 से 92 प्रतिशत तक लाभ पहुंचाती हैं। इससे रोगियों की आयु में काफी वृद्धि देखी गई। डाॅ. राहुल भार्गव के अनुसार, जिस प्रकार शुगर दवाइयों और खानपान पर नियंत्रण से ठीक होती है, उसी प्रकार मल्टीपल माइलोमा की बीमारी है। प्रत्येक वर्ष नई व आधुनिक दवाएं रोगियों को उपलब्ध हो रही हैं जो सस्ती भी हैं और रोग की वृद्धि रोकने में सक्षम भी हैं।

अकेले मेरठ में हैं करीब सौ मरीज

डाॅ. भार्गव के अनुसार, अकेले मेरठ में करीब 100 मरीज इस बीमारी से पीड़ित हैं। वे दवाओं के सहारे कई साल से अच्छा जीवन जी रहे हैं। ये बीमारी ऐसी नहीं है कि इस पर काबू न पाया जा सके, लेकिन जरूरत है दवाइयों के साथ-साथ सावधानी बरतने की।

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Published on:
17 Oct 2018 11:32 am
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