पुलिस ने बिल्‍डर के ऑफिस में छापा मारकर बरामद किए थे 25 करोड़ रुपये के पुराने नोट
मेरठ। मेरठ में साल 2017 के आखिरी में पुलिस को बड़ी सफलता हाथ लगी थी। पुलिस ने 29 दिसंबर को परतापुर स्थित राजकमल एन्क्लेव में बिल्डर के ऑफिस में छापा मारकर 25 करोड़ रुपये के पुराने नोट बरामद किए थे। नोटबंदी के बाद इसे मेरठ की सबसे बड़ी रिकवरी तक बताया गया। पुलिस ने चार लोगों को हिरासत में भी लिया था लेकिन मजबूरी में उन पर रिपोर्ट दर्ज नहीं कर पाई तो छोड़ दिया गया। हालांकि, इस मामले में फरार बिल्डर का अब तक पता नहीं चल पाया है। बिल्डर के यहां दिल्ली से लोग कमीशन पर नोट बदलवाने आए थे। ये नोट एनआरआई के द्वारा बदले जाने थे। वहीं, अब 31 दिसंबर के बाद से नोट बदलने के सारे रास्ते बंद हो चुके हैं।
क्या था मामला
दरअसल, मामला थाना परतापुर क्षेत्र के दिल्ली रोड स्थित राजकमल एंक्लेव का है। 29 दिसंबर को पुलिस ने बिल्डर संजीव मित्तल के ऑफिस से लगभग 25 करोड़ रुपए की पुरानी करंसी बरामद की थी। संजीव मित्तल के पास दिल्ली से चार-पांच लोग पुरानी करंसी बदलने के लिए आए थे।
अब क्या हुआ
जिन चार लोगों को 25 करोड़ की करंसी के साथ पुलिस ने पकड़ा था, उनको पुलिस ने मुचलकों को भरवाकर छोड़ दिया। उनसे कोई खास जानकारी हाथ नहीं लग पाई। चारों आरोपियों के थाने पहुंचने से पहले ही उनके वकील थाने में मौजूद थे। वहीं, पुलिस ने अभी तक कोई रिपोर्ट दर्ज नहीं की है क्योंकि यह लीगल टेंडर नहीं है। मतलब रद्दी रखने पर रिपोर्ट कैसे दर्ज की जाए। हालांकि, बिल्डर के घर को सील कर उसके बाहर दो पुलिसकर्मी तैनात कर दिये गए हैं।
नोटबंदी के बाद से कर रहा था यह काम
सूत्रों के अनुसार, संजीव मित्तल नोट बंदी के बाद से पुराने नोट बदलने का काम कर रहा था। पुलिस को उसकी डायरी से कई नाम उजागर हुए हैं। पुलिस के अनुसार, नोटबंदी के बाद संजीव करीब 100 करोड़ से अधिक के पुराने नोटों को नए नोटों में बदलवाने का काम कमीशन लेकर करवा चुका है। कंकरखेड़ा थाना प्रभारी ने बताया कि अभी और कई चौंकाने वाले नाम सामने आ सकते हैं, जिनमें महानगर के कई नामी प्रकाशक भी शामिल हैं जिनके पुराने नोट संजीव ने बदलवाए हैं।
ऐसे बदलते थे नोट
पुरानी रकम एनआरआई के खाते में एनजीओ के माध्यम से जाती थी। इस पर एनआरआई अपना और संजीव का कमीशन काटकर रकम को कैश मेरठ या दिल्ली किसी भी स्थान पर दिलवा दिया करते थे, लेकिन जब एनआरआई ने नोट बदलने से इंकार कर दिया तो यह पूरा मामला फंस गया और संजीव की 25 करोड़ की रकम फंस गई।
नहीं दर्ज हो सकती रिपोर्ट
वहीं, इस मामले में पुलिस कोई रिपोर्ट दर्ज नहीं कर सकती है। कानून के जानकार विशेषज्ञों का मानना है कि कानूनी कार्रवाई को लेकर पुलिस के हाथ बंधे हुए हैं। इतना ही नहीं आयकर विभाग भी कुछ नहीं कर सकता। बरामद नोटों की कोई कीमत नहीं है। वे सब बाजारी और कानून रूप से रद्दी हैं। वरिष्ठ अधिवक्ता ओपी शर्मा के मुताबिक, इस पूरे प्रकरण में कोई भी ऐसी धारा नहीं है, जिसके कारण पकड़े गए आरोपियों पर कोई मुकदमा बनता हो। उनका कहना है कि बरामद हुई करंसी लीगल टेंडर आम चलन में नोट नहीं है। ऐसे में सवाल उठता है कि पुलिस किस धारा में मुकदमा दर्ज करे। आयकर विभाग भी यह मानकर चल रहा है कि इसमें कोई बड़ी कार्रवाई नहीं बनती है।
क्या हैं नियम
नोटबंदी के दौरान 30 जून तक नोट बदलने के बाद सभी प्रावधानों की समय सीमा खत्म हो चुकी है। इसके बाद आरबीआई ने एक हजार और पांच सौ रुपये के पुराने नोट रखने की संख्या और उल्लंघन पर पेनाल्टी का प्रावधान किया है। इस नोटिफिकेशन में 30 दिसंबर 2016 के बाद पुराने नोट रखने की संख्या निर्धारित की गई है। सामान्य व्यक्ति 500 रुपये या एक हजार रुपये के 10 नोट ही अपने पास रख सकता है। अगर कोई मुद्रा शास्त्र का अध्ययन या शोध कर रहा है तो उसे अधिकतम 25 नोट रखने की अनुमति है। इसके अलावा अदालत की इजाजत से किसी मामले की सुनवाई के लिए आवश्यक होने पर पुराने नोट रखने की इजाजत होगी। अगर किसी के पास तय सीमा से अधिक नोट पकड़े जाते हैं तो दस हजार रुपये या जितनी राशि के नोट जब्त किए गए हैं, उसका पांच गुना के बराबर जुर्माना देना होगा।
अब नोट बदलने के सारे रास्ते बंद
वहीं, जानकारों का कहना है कि अब 31 दिसंबर 2017 के बाद पुराने नोट नहीं बदले जा सकते हैं। इसकी एडवाइजरी रिजर्व बैंक से भारत सरकार को जा चुकी है। इसके अलावा एक हजार और पांच सौ रुपये के पुराने नोटों को अवैध घोषित करने के बाद किसी भी देश में इनकी मान्यता नहीं है। ऐसे में इन नोटों को वहां से भी नहीं बदला जा सकता है।